Varanasi Ropeway: बनारस में 90 गोंडोलों की हुई टेस्टिंग, अब आसमान से तय होगा सफर, जाम से मिलेगी मुक्ति
Varanasi Ropeway: वाराणसी में विकास की रफ्तार अब जमीन से ऊपर उठ चुकी है। शहर को ट्रैफिक जाम से राहत देने और पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए रोपवे प्रोजेक्ट अपने पहले महत्वपूर्ण चरण में पहुंच गया है। बुधवार को इसके लिए 90 हाईटेक गोंडोलों का ट्रायल किया गया।
यह परीक्षण कैंट से रथयात्रा तक बनाए गए पहले सेक्शन में किया गया। यह पहली बार है जब गोंडोलों को असल रूट पर चलाकर उनकी कार्यक्षमता और सुरक्षा की जांच की गई। इससे पहले केवल तकनीकी डेमो के माध्यम से परीक्षण किया जा रहा था।

नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया की परियोजना प्रबंधक पूजा मिश्रा ने बताया कि ट्रायल में हर तकनीकी पहलू की बारीकी से निगरानी की जा रही है। एक बार में तीन गोंडोलों को चलाकर उनकी गति, संतुलन, सेफ्टी ब्रेक्स और कंट्रोल सिस्टम का आंकलन किया गया।
विदेशी विशेषज्ञों की देखरेख में हो रहा परीक्षण
इस पूरे परीक्षण कार्य की निगरानी ऑस्ट्रिया की लाइटनर कंपनी के अनुभवी इंजीनियरों की टीम कर रही है। पहले सेक्शन का कार्य इसी वर्ष सितंबर तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। ट्रायल कार्य 14 जुलाई से शुरू हुआ था और इसे अगस्त के मध्य तक पूरा करने की योजना है।
गोंडोला संचालन से पहले सभी तकनीकी और संरचनात्मक कसौटियों पर खरा उतरना जरूरी है। किसी भी तरह की कमी को समय रहते सुधारने के लिए ट्रायल चरण को गंभीरता से अंजाम दिया जा रहा है। ट्रैफिक लोड, टाइमिंग और आपातकालीन स्थितियों की भी जांच हो रही है।
हर 90 सेकंड में चलेगा गोंडोला
पूजा मिश्रा के मुताबिक, पूरा रोपवे नेटवर्क दो चरणों में तैयार हो रहा है। पहले चरण में कैंट, विद्यापीठ और रथयात्रा स्टेशन शामिल हैं। दूसरे चरण में रथयात्रा से गोदौलिया तक का निर्माण कार्य तेज़ी से जारी है।
इस प्रोजेक्ट के पूरा होने के बाद कैंट से गोदौलिया तक का सफर महज 15 से 16 मिनट में तय हो सकेगा। अब यही दूरी सड़क मार्ग से तय करने में करीब 45 मिनट लगते हैं। इस तरह यात्री समय की बचत के साथ-साथ जाम से भी छुटकारा पाएंगे।
एक घंटे में 6000 यात्री कर सकेंगे सफर
रोपवे की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह एक दिशा में हर घंटे 3000 यात्रियों को ले जाने में सक्षम होगा। दोनों दिशाओं में कुल 6000 लोग एक घंटे में यात्रा कर सकेंगे। हर डेढ़ से दो मिनट में एक गोंडोला उपलब्ध रहेगा।
करीब 148 ट्रॉली कारों को इस रूट पर चलाने की योजना है, जिनमें प्रत्येक में 10 यात्री बैठ सकेंगे। यह पूरा सिस्टम 16 घंटे रोज़ाना चलेगा। यह काशी को भीड़भाड़ से राहत देने के साथ पर्यटकों को एक आधुनिक ट्रैवल अनुभव भी देगा।
यह भी बता दें कि इससे कैंट से रथयात्रा तक की दूरी 2.4 किलोमीटर तय करने में सिर्फ 6.5 मिनट लगेंगे। विश्वनाथ मंदिर और आसपास के क्षेत्रों तक पहुंच आसान हो जाएगी। यह भी संभावना है कि भविष्य में इसका दायरा और भी बढ़ाया जा सकता है।












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