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Varanasi : जब 'भगवान' को भी लगी ठंड! मंदिरों में पहनाए गए गर्म कपड़े, सोशल मीडिया पर वायरल हुई तस्वीरें

भक्ति को दर्शाने के लिए बढ़ती ठंड के बीच धार्मिक आस्था की नगरी काशी के मंदिरों में भक्तों ने अपने भगवान को शीतलहर से बचाने के लिए ऊनी वस्त्र पहनाए हैं।

Varanasi God also felt cold Warm clothes worn in temples pictures went viral on social media

भक्त और भगवान के बीच में आस्था की डोर भावना से ही बनती है और इसी भावना के कारण ही भक्त अपने भगवान से सीधा जुड़ जाता है। जिस प्रकार से भक्तों को भूख प्यास सर्दी गर्मी सहित अनेक चीज का एहसास होता है उसी प्रकार से उसके भगवान को भी। इसी भक्ति को दर्शाने के लिए बढ़ती ठंड के बीच धार्मिक आस्था की नगरी काशी के मंदिरों में भक्तों ने अपने भगवान को शीतलहर से बचाने के लिए ऊनी वस्त्र पहनाए हैं।

स्वेटर और रजाई में भगवान्

स्वेटर और रजाई में भगवान्

दरअसल, जो तस्वीरें आप देख रहे हैं वह काशी के गोलघर में स्थित प्राचीन सिद्धिदात्री मंदिर मैदागिन इलाके में शनि देव महाराज का मंदिर, लोटिया के राम जानकी मंदिर और बड़ा गणेश का मंदिर की हैं। जहां पर भगवान को ठंड से बचाने के लिए ऊनी वस्त्र पहनाए गए हैं। वहाँ मौजूद भक्तो में एक बुजुर्ग द्वारा बताया गया कि यहां पर यह प्रथा काफी समय से चली आ रही है। यहां तक की उन्होंने कहा कि यह आदिकाल से चल रही है।
उन्होंने यह भी बताया कि बैकुंठ चतुर्दशी से विशेष रूप से भगवन को ऊनी वस्त्र, रजाई कम्बल आदि पहनाया जाता है। यही नहीं खाने में भी इस बात का ख़ास ध्यान रखा जाता है कि भगवन को गरमा गरम खाना मिले, जैसे गाजर का हलवा का भोग लगता है। उनका कहना है कि जैसी व्यवस्थाएं हम जाड़ों में अपने लिए करते हैं वैसे ही भगवन के लिए भी व्यवस्था की जाती है। बसंत पंचिमी तक यह व्यवस्था रहेगी और उसके बाद दोनों भक्त और भगवान साधारण कपड़ो में दिखाई देंगे।

सोशल मीडिया पर जमकर वायरल

सोशल मीडिया पर जमकर वायरल

वहीं एक ओर मौजूद भक्त सताक्षी का कहना है कि जिस तरह से हमें ठंड लगती है, वैसे ही भगवन को भी लगती है। इसलिए हमारे मंदिर में उनको गरम कपडे पहनाना जरूरी है। इतनी ठंडी हवाएं चल रही है और कोहरा भी पड़ रहा है। ऐसे में हम अपने भगवान् को गरम कपडे और गरम खाना चढ़ाते हैं।
आपको बता दें कि सोशल मीडिया पर भी यह तस्वीरें जमकर वायरल हो रही हैं और लोग इस कार्य की खूब सरहाना भी कर रहे हैं। परन्तु कुछ बुद्धिजीवी इसपर यह तर्क भी दे रहे हैं कि आज के इस आधुनिक युग में ऐसी बातें करना अन्धविश्वास को बढ़ाना है। भगवान् को आखिर इंसान की क्या जरूरत, वह खुद ही इतना ताकतवर और शक्तिशाली है।

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    जब भगवान को भी लगी ठंड! मंदिरों में पहनाए गए गर्म कपड़े...
    ऐसे ही लोगों ने इंसानियत को जिन्दा रखा हुआ है

    ऐसे ही लोगों ने इंसानियत को जिन्दा रखा हुआ है

    तो उनसे हम बस इतना ही कहना चाहते हैं कि यह सही बात है जिस भगवान ने हमें बनाया उसे हमारी जरूरत भले ही न हो परन्तु इस सरहानीय कार्य के पीछे की मासूमियत को, भावनाओ को और पवित्रता को समझना चाहिए और ऐसे ही लोगों ने इंसानियत को जिन्दा रखा हुआ है। जरा सोचिये कि जो लोग एक मूर्ति को इतना प्रेम कर सकते हैं तो वह लोग हमारे और आपके लिए एक मिसाल होने चाहिए या उनका मजाक बनाना चाहिए। इंसानियत की परिभाषा यह होनी चाहिए कि अगर भगवान् को भी हमारी जरूरत पड़ जाए तो हम पीछे न हटें। तात्पर्य यह है कि भगवान् के आगे बस हाथ फैला कर माँगना ही नहीं होता है।

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