तेरह गांवों की 370 एकड़ भूमि में होगा Varanasi Airport का विस्तार, शासन को भेजी रिपोर्ट
Varanasi Airport के विस्तारीकरण के लिए भूमि अधिग्रहण किए जाने के लिए भूमि का सर्वे पूरा हो गया है। सर्वे के बाद भूमि की रिपोर्ट शासन को भेज दी गई है। एयरपोर्ट विस्तारीकरण के लिए दो फेज में भूमि अधिग्रहित की जाएगी।

वाराणसी के लाल बहादुर शास्त्री अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के विस्तारीकरण को लेकर पिछले 7 साल से प्रक्रिया चल रही है। कई बार मास्टर प्लान तैयार किया गया और उसमें बदलाव भी किए गए। अब एक बार फिर Varanasi Airport विस्तारीकरण का मामला सुर्खियों में है। पिछले माह वाराणसी एयरपोर्ट पर भूमि सीमांकन कराई गई थी। भूमि सीमांकन कराए जाने के बाद मंडलायुक्त वाराणसी द्वारा एयरपोर्ट पर में जाने वाली भूमि के अधिग्रहण से संबंधित रिपोर्ट शासन को भेज दी गई है। बताया जा रहा है कि अब वाराणसी एयरपोर्ट पर दो चरणों में भूमि अधिग्रहण की जाएगी, जिसमें पहले चरण में 109 एकड़ और दूसरे चरण में 260 एकड़ भूमि का अधिग्रहण किया जाएगा।

भूमि अधिग्रहण के बाद एयरपोर्ट का होगा विस्तार
एयरपोर्ट के अधिकारियों का कहना है कि भूमि की कमी होने के चलते वाराणसी एयरपोर्ट का विस्तार नहीं हो पा रहा है। भूमि अधिग्रहण किए जाने के बाद रनवे की लंबाई बढ़ाई जाएगी और आईएलएस की क्षमता में भी वृद्धि की जाएगी। रनवे की लंबाई बढ़ाए जाने के बाद वाराणसी एयरपोर्ट पर बड़े बोइंग विमान भी आसानी से उतर सकेंगे। वर्तमान में रनवे की लंबाई 2745 मीटर है, जिसके चलते बड़े बोइंग और एयरबस विमानों की लैंडिंग और टेकऑफ वाराणसी एयरपोर्ट पर नहीं हो पाती है। एयरपोर्ट के अधिकारियों ने यह भी बताया कि एयरपोर्ट पर सिटी साइड एरिया और नया टर्मिनल भवन भी बनाया जाना है ऐसे में भूमि की नितांत आवश्यकता है।

पिछले माह कराया गया था भूमि का सर्वे
वाराणसी एयरपोर्ट के विस्तार के लिए पिंडरा तहसील के राजस्व कर्मियों द्वारा वाराणसी एयरपोर्ट से सटे 13 गांव में जमीन चिन्हित की गई है। एक माह तक यहां पर सर्वे कराया गया। सर्वे में दो फेज में वाराणसी एयरपोर्ट पर भूमि अधिग्रहण किए जाने की बात सामने आ रही है। पहले फेज में 109 एकड़ भूमि अधिग्रहण की जाएगी जबकि दूसरे फेज में 260 एकड़ भूमि अधिग्रहित की जाएगी। इस तरह वाराणसी एयरपोर्ट के विस्तारीकरण में करीब 369 एकड़ भूमि की आवश्यकता बताई जा रही है। यह भी कहा जा रहा है कि वाराणसी एयरपोर्ट के समीप कुछ गांव में भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण की भी भूमि है। कुछ जगह पर ग्रामीण भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण की भूमि को कब्जा कर लिए हैं। ऐसे में एयरपोर्ट पर भूमि अधिग्रहीत किए जाने की स्थिति में कुछ किसानों को एयरपोर्ट की खाली पड़ी भूमि में स्थानांतरित किए जाने को लेकर भी चर्चा चल रही है। हालांकि इस बारे में आधिकारिक रूप से कोई भी स्पष्ट जानकारी नहीं दे रहा है।

632.77 एकड़ भूमि में स्थापित है वाराणसी एयरपोर्ट
वाराणसी एयरपोर्ट के स्थापना को लेकर कोई निश्चित तारीख नहीं पता है हालांकि यह बताया जाता है कि ब्रिटिश काल में वाराणसी में हवाई पट्टी बनी हुई थी। उस समय लगान वसूलने के लिए आने वाले अंग्रेजी अफसरों के छोटे एयरक्राफ्ट यहां उतरते थे। उसके बाद 1953 में वाराणसी एयरपोर्ट पर पुराने टर्मिनल का निर्माण हुआ। उस समय इसे वाराणसी एयरपोर्ट के नाम से ही जाना जाता था। बाद में पूर्व प्रधानमंत्री स्व. लाल बहादुर शास्त्री के नाम पर इसका नाम लाल बहादुर शास्त्री अंतर्राष्ट्रीय एयरपोर्ट कर दिया गया। पुराने टर्मिनल भवन में एक समय में केवल 200 यात्रियों का आवागमन हो सकता था ऐसे में 800 यात्रियों की क्षमता वाले नए टर्मिनल भवन का निर्माण वर्ष 2010 में कराया गया। वर्तमान में 632.77 एकड़ भूमि में रनवे, टर्मिनल, एयरपोर्ट कालोनी सहित अन्य विभागों के कार्यालय हैं। वहीं 141.23 एकड़ भूमि पर ग्रामीणों का कब्जा है।

टनल से गुजरेगा नेशनल हाईवे
वाराणसी एयरपोर्ट पर रनवे की लंबाई बढ़ाए जाने के चलते हाईवे को टनल से गुजारा जाएगा। एयरपोर्ट के पूर्वी तरफ रेलवे लाइन होने के चलते उधर रनवे का विस्तार नहीं किया जा सकता है ऐसे में पश्चिमी तरफ ही रनवे बढ़ाया जाएगा। पश्चिम तरफ एयरपोर्ट से सटकर नेशनल हाइवे 56 गया हुआ है। ऐसे में रनवे की लंबाई बढ़ाए जाने पर हाईवे को टनल(सुरंग) से गुजारा जाएगा। ऊपर विमानों की लैंडिंग हुई और टनल में से वाहनों का आवागमन होगा।












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