Mission 2024: सुभासपा के गठबंधन ने बदला पूर्वांचल का चुनावी समीकरण, जानें क्या कह रहे हैं सियासी जानकार?
Mission 2024: सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी और एनडीए के बीच गठबंधन के बाद पूर्वांचल का चुनावी समीकरण भी बदल गया है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इससे जहां भाजपा को फायदा होगा वहीं सुभासपा को भी काफी लाभ मिलेगा।
Mission 2024: सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर के भाजपा से गठबंधन करने के बाद लोकसभा चुनाव 2024 में अब पूर्वांचल का चुनावी समीकरण बदल गया है। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि गठबंधन से जहां भाजपा को पूर्वांचल में ताकत मिलेगी, वहीं सुभासपा के लिए यह गठबंधन संजीवनी साबित होगा।
वहीं, रविवार को वाराणसी पहुंचे डिप्टी सीएम बृजेश पाठक ने कहा कि सुभासपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर अब एनडीए के साथ हैं। उनके आने से एनडीए का कुनबा और मजबूत हो गया है। उन्होंने यह भी कहा कि लोकसभा चुनाव 2024 में पीएम मोदी के नेतृत्व में यूपी की 80 सीटों पर एनडीए ऐतिहासिक जीत दर्ज करेगी।

वाराणसी के पत्रकारों ने इस बारे में क्या कहा?
वाराणसी के रहने वाले वरिष्ठ पत्रकार गजेंद्र सिंह ने बताया कि वाराणसी समेत पूर्वांचल की कई सीटों पर पिछड़े वर्ग के वोटरों की संख्या अधिक है। 2014 में हुए लोकसभा चुनाव में जिस तरह भारतीय जनता पार्टी को जनता का समर्थन मिला था उस तरह 2019 में भी नहीं मिला।
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उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र वाराणसी का रोहनिया विधानसभा और सेवापुरी विधानसभा पटेल बाहुल्य माना जाता है। मौजूदा समय में अनुप्रिया पटेल की पार्टी का एनडीए के साथ गठबंधन है, ऐसे में काफी संख्या में पटेल वोटरों का झुकाव एनडीए की तरफ है। हालांकि बीते विधानसभा चुनाव में कृष्णा पटेल की तरफ भी पटेलों का झुकाव देखने को मिला था।
गजेंद्र सिंह बताते हैं कि राशन और अन्य योजनाओं का लाभ दलित वोटरों को भी मिल रहा है। फिर भी बहुजन समाज पार्टी के वोटरों को तोड़कर अपने पक्ष में कर पाना भाजपा के लिए मुश्किल है। यही हाल यादव वोटरों के साथ भी है। आज भी यादव वोटरों का एक बड़ा कुनबा समाजवादी पार्टी को छोड़कर किसी दूसरे राजनीतिक दल को पसंद नहीं करता।
पिछड़ों को साधने में जुटी है भाजपा
गजेंद्र सिंह ने कहा कि पूर्व में हुए चुनाव के आंकड़ों पर नजर डालने पर पता चलता है कि धीरे-धीरे पिछड़ी जातियों के वोटर भारतीय जनता पार्टी से दूरी बनाते नजर आ रहे हैं। ऐसे में पिछड़ी जातियों को अपने पक्ष में करने के लिए भारतीय जनता पार्टी पूरा प्रयास कर रही है।
इसी को कंट्रोल करने के लिए भारतीय जनता पार्टी पिछड़ी जाति के नेताओं को अपने साथ लाने का प्रयास कर रही है। उन्होंने यह भी कहा कि हाल ही में दारा सिंह चौहान ने भी इस्तीफा दिया। अब चर्चा है कि दारा सिंह चौहान भी भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो सकते हैं। दारा सिंह चौहान के भाजपा में शामिल होने के बाद चौहान वोटरों का झुकाव भी भाजपा की तरफ होगा।
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विपक्ष से दो कदम आगे चल रही है बीजेपी
राजनीतिक जानकार और कई समाचार पत्रों में संपादक रह चुके शिवपुर निवासी वरिष्ठ पत्रकार विनय मौर्य बताते हैं कि जिस तरीके से विपक्षी पार्टियों की बैठक पटना में हुई थी। उससे स्पष्ट है कि यूपी में इस बार नीतीश कुमार चुनाव प्रचार कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार यदि यूपी में उतरते हैं तो इसका नुकसान बीजेपी को होगा।
ऐसे में भारतीय जनता पार्टी को पहले से ही इस बात का अंदाजा है कि उनका कोर वोट बैंक उनके साथ है, लेकिन चुनाव जीतने के लिए उन्हें पिछड़ी जाति और अनुसूचित जाति के वोटरों को भी अपने साथ लाना पड़ेगा। यही कारण है कि भारतीय जनता पार्टी जातिगत राजनीति करने वाली पार्टियों को अपने साथ जोड़ रही है।
जनता के बीच में न उतरना विपक्ष की बड़ी कमजोरी
वाराणसी जिले के सेवापुरी विधानसभा अंतर्गत रामेश्वर इलाके के रहने वाले वरिष्ठ पत्रकार कन्हैयालाल पथिक से बात किया गया तो उन्होंने कहा कि भले ही भारतीय जनता पार्टी को घेरने के लिए विपक्षी पार्टियां एकजुट हो रही हैं लेकिन अभी भी जनता के बीच न उतर पाना उनकी सबसे बड़ी कमजोरी है, खासतौर पर यूपी और पूर्वांचल में। इसी कमजोरी का फायदा भारतीय जनता पार्टी उठा रही है।
उन्होंने यह भी कहा कि आज भी राजभर जातियों के वोटरों के बीच ओमप्रकाश राजभर का क्रेज कम नहीं हुआ है। इसके पीछे सबसे बड़ा कारण है कि राजभर भले ही भारतीय जनता पार्टी के साथ गठबंधन कर सत्ता में रहे हों या फिर समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन कर चुनाव लड़े हों, लेकिन हमेशा अपने वोटरों के बीच ओपी राजभर को पाया गया है।
उन्होंने यह भी कहा कि राजभर के एनडीए में शामिल होने के बाद पूर्वांचल का चुनावी समीकरण काफी हद तक बदल गया है। पूर्वांचल के कई सीटों पर इसका असर भी देखने को मिलेगा। कन्हैयालाल पथिक ने यह भी कहा कि इस गठबंधन से जहां भारतीय जनता पार्टी को पूर्वांचल में मजबूती मिलेगी वहीं काफी समय सत्ता सुख से दूर रहे सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष को भी संजीवनी मिल गई है।
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