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55 बच्चों को शिक्षित कर रहा 'खुला आसमान', काशी के रविदास घाट पर है यह अनोखा स्‍कूल

वाराणसी के रविदास घाट पर गरीब और वंचित बच्‍चों को अस्‍सी घाट की रहने वाली रोली सिंह द्वारा खुला आसमान के बैनर तले दी जाती है निशुल्‍क शिक्षा. khula aasmaan at ravidas ghat is teaching the poor children of varanasi

वाराणसी, 05 अगस्‍त : वाराणसी में गंगा घाट किनारे अलग-अलग तरह के लोग देखने को मिलते हैं। लेकिन रविदास घाट का नजारा कुछ और ही है। यहां प्रतिदिन सायं 3 बजे से 7 बजे तक गरीब, शोषित, वंचित और समाज के सबसे निचले तबके में रहने वाले लोगों के बच्चों को शिक्षित किया जाता है। ऐसे बच्चों को शिक्षित करने का बीड़ा अस्सी घाट पर रहने वाली रोली सिंह ने उठाया है। रोली बताती है कि पिछले 2 साल से रविदास घाट पर उनकी संस्था द्वारा बच्चों को मुफ्त में शिक्षा दी जाती है। वर्तमान समय में 55 बच्चे उनके संस्था से जुड़े हुए हैं।

कक्षा 10 के बच्चों को दी जाती है शिक्षा

कक्षा 10 के बच्चों को दी जाती है शिक्षा

'खुला आसमान' संस्था चलाने वाली रोली सिंह ने बताया कि दो साल पहले उन्होंने घाट किनारे बच्चों को शिक्षा देना शुरू किया था। इस दौरान तमाम कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। हालांकि समय बदलता गया और लोग जुड़ते गए। इस तरह आज उनके संस्था के माध्यम से 55 बच्चों को शिक्षा दी जा रही है। रविदास घाट पर प्रतिदिन संचालित होने वाले इस क्लास रूम में एलकेजी से लेकर 10वीं कक्षा तक के बच्चों को शिक्षित किया जाता है। यहां बच्चों को पढ़ाई के साथ ही कराटे व अन्य खेलों की भी ट्रेनिंग दी जाती है।

जीवन संघर्षों से भरा रहा

जीवन संघर्षों से भरा रहा

रोली सिंह बताती हैं कि पढ़ाई के दौरान ही समाज सेवा करने का उन्होंने मन बना लिया था। यही कारण था कि उस समय उन्‍होंने घाट पर रहने वाले भिखारियों को रोजगार दिलवाने का फैसला किया। कई भिखारियों को रोली सिंह ने दुकानों पर रखवाया और आज भी वहां काम करके अपना परिवार चलाते हैं। रोली बताती हैं 2016 में शादी होने के बाद उनका जीवन एक कमरे में बंद हो गया। खुले आसमान का सपना मन में सजाए रोली सिंह दो साल पहले ससुराल छोड़कर मायके में चली आईं। उसके बाद से ही उनके द्वारा खुले आसमान की नींव रखी गई।

पिता बैंक से जुडे़ हैं तो मां हैं हाउसवाइफ

पिता बैंक से जुडे़ हैं तो मां हैं हाउसवाइफ

रोली सिंह ने बताया कि मूल रुप से वे गाजीपुर जिले की रहने वाली हैं लेकिन वाराणसी में नौकरी लग जाने के चलते उनके पिता वाराणसी रहने लगे। ऐसे में बचपन से ही रोली वाराणसी के अस्‍सी में रहती हैं। उनके पिता को ऑपरेटिव बैंक से जुड़े हुए हैं जबकि उनकी मां हाउसवाइफ हैं। रोली द्वारा किए जा रहे सामाजिक कार्यों को लेकर उनके माता-पिता भी उनका काफी सहयोग करते हैं। जबकि रोली के भाई-बहन अभी पढ़ाई कर रहे हैं।

बीएचयू और विद्यापीठ के छात्र आते हैं पढ़ाने

बीएचयू और विद्यापीठ के छात्र आते हैं पढ़ाने

रविदास घाट पर 'खुला आसमान' संस्था संचालित करने पर शुरुआती दौर में रोली सिंह द्वारा ही बच्चों को शिक्षित किया जाता था बाद में बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी और महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के छात्र भी अपना सहयोग देने लगे। रोली बताती है कि शिक्षा ही एक ऐसा माध्यम है जो इन बच्चों को गरीबी से मुक्ति दिला सकता है। रोली बताती हैं कि भविष्य में वे महिलाओं का एक समूह तैयार करके महिलाओं को भी खुले आसमान में लाने का प्रयास करेंगी।

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