IRRI Varanasi: डीएसआर को सफल बनाने में मील का पत्थर बनी इरी की मशीन, एक घंटे में एक एकड़ की निराई संभव
IRRI Varanasi: पूर्वी उत्तर प्रदेश के किसानों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। अंतरराष्ट्रीय धान अनुसंधान संस्थान (IRRI) ने धान की सीधी बुवाई तकनीक को और प्रभावशाली बनाने के लिए ट्रैक्टर-चालित ड्राई व वेट लैंड वीडर का निर्माण किया है। इसका सफल परीक्षण सोमवार को जनपद के पनियारा गांव में किया गया।
धान की सीधी बिजाई (DSR) को अपनाने वाले किसानों को सबसे अधिक समस्या खरपतवार से होती है। समय पर और सटीक निराई न होने से उपज पर सीधा असर पड़ता है। इस नई मशीन के माध्यम से वैज्ञानिकों ने इसी चुनौती का समाधान पेश किया है, जो लागत भी कम करती है और फसल को नुकसान भी नहीं पहुंचाती।

इस यंत्र को किसी भी सामान्य ट्रैक्टर में नैरो व्हील्स लगाकर संचालित किया जा सकता है। इन पतले पहियों से खेत में लगे पौधों को कोई नुकसान नहीं होता और पंक्तियों के बीच से सटीक निराई संभव हो जाती है। मशीन की रफ्तार भी अच्छी है-एक घंटे में लगभग एक एकड़ की निराई हो सकती है।
डीएसआर में गेमचेंजर साबित हो सकता है यह यंत्र
खरपतवार की अधिकता डीएसआर पद्धति की सबसे बड़ी बाधा रही है। वैज्ञानिकों का कहना है कि बुवाई के 25 से 30 दिन बाद यदि इस मशीन से निराई की जाए, तो खेत में खरपतवार का पूरी तरह नियंत्रण किया जा सकता है। यह तरीका रासायनिक खरपतवार नाशकों पर निर्भरता भी कम करता है।
कम नमी वाले खेतों में यह यंत्र और भी अधिक प्रभावी साबित हो रहा है। इसका हल्का वजन मशीन को खेत की मिट्टी की भौतिक संरचना खराब किए बिना चलने योग्य बनाता है। साथ ही यह श्रम की भारी बचत करता है, जिससे मजदूरों की कमी की समस्या भी काफी हद तक दूर हो जाती है।
खेतों में हुई मशीन की पहली सफल टेस्टिंग
पनियारा गांव में आयोजित प्रदर्शन के दौरान वैज्ञानिकों ने किसानों के डीएसआर खेतों में यह यंत्र चलाकर उसकी कार्यक्षमता को दिखाया। खेतों में मौजूद किसानों ने मशीन को चलते देखा और इसकी विशेषताओं के बारे में विस्तार से जानकारी प्राप्त की। प्रदर्शन को लेकर किसानों में खासा उत्साह देखा गया।
इस मौके पर इरी के प्रमुख वैज्ञानिक डॉ. आर.के. मलिक, डॉ. राबे यहाया, डॉ. सूर्यकांत, डॉ. अजय, विपिन कुमार और डॉ. दिलवर सिंह परिहार सहित संस्थान की तकनीकी टीम मौजूद रही। प्रगतिशील किसान लल्लन दूबे और ओमप्रकाश दूबे के खेतों में इस तकनीक का वास्तविक प्रदर्शन किया गया।
खर्च में कटौती और उपज में बढ़ोतरी की उम्मीद
डॉ. मलिक ने बताया कि इस यंत्र की सहायता से किसान अपनी उत्पादन लागत में उल्लेखनीय कमी ला सकते हैं। खरपतवार नियंत्रण पर होने वाला भारी खर्च इस तकनीक से कम हो सकता है, जिससे किसान को बेहतर मुनाफा मिलने की संभावना बनती है। मशीन से श्रमिकों की जरूरत भी घटती है।
डॉ. राबे यहाया ने बताया कि यांत्रिक निराई सही समय पर हो जाए तो रासायनिक दवाओं की आवश्यकता लगभग समाप्त हो जाती है। इससे पर्यावरण को भी लाभ होता है और खेतों में जैविक संतुलन बना रहता है। उन्होंने यह भी कहा कि यह मशीन टिकाऊ खेती को बढ़ावा देने में सहायक सिद्ध होगी।
खरीफ 2025 सीजन को ध्यान में रखते हुए इरी ने पूर्वी उत्तर प्रदेश के आठ जिलों में धान की सीधी बुवाई के 500 एकड़ क्षेत्र में समूह-प्रदर्शन की योजना बनाई है। वैज्ञानिकों का उद्देश्य है कि यह तकनीक ज्यादा से ज्यादा किसानों तक पहुंचे और खेतों में प्रभावशाली ढंग से अपनाई जा सके।
संस्थान ने स्पष्ट किया कि यह वीडर डीएसआर तकनीक को और भी व्यावहारिक और लाभकारी बनाएगा। मौसम की अनिश्चितता और महंगे इनपुट्स के इस दौर में किसानों को ऐसी तकनीकों की सख्त जरूरत है जो उनकी मेहनत को आसान बनाएं और मुनाफा सुनिश्चित करें।












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