महज दो हफ्ते के मासूम की अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट देख डॉक्टर भी हैरान रह गए, BHU में तीन घंटे तक चला ऑपरेशन
सर सुंदरलाल अस्पताल, बीएचयू, वाराणसी के डॉक्टरों ने एक मासूम बच्चे का ऑपरेशन कर उसके पेट से 3 भ्रूण निकाले।

वाराणसी के BHU स्थित सर सुंदरलाल अस्पताल के डॉक्टरों ने सोमवार को दो सप्ताह के मासूम बच्चे का ऑपरेशन किया। बच्चे के पेट में 3 भ्रूण मिले, जिससे पित्त नली और आंत दबी हुई थी और बच्चा की हालत खराब होते जा रही थी।
चिकित्सकों द्वारा बताया गया कि सोमवार को करीब 3 घंटे तक ऑपरेशन चला और बच्चे के पेट से तीन भ्रूण को निकाला गया। बताया जा रहा है कि ऑपरेशन करने के बाद अब बच्चा सही है और उसके परिवार वाले भी काफी खुश हैं।
दरअसल, मऊ जनपद के एक इलाके की रहने वाले दंपति अपने मासूम बच्चे को लेकर बीएचयू स्थित सर सुंदरलाल चिकित्सालय में पहुंचे थे। मासूम बच्चे की उम्र महज 10 दिन थी और वह काफी बीमार था।
उसके बाद मासूम बच्चे का अल्ट्रासाउंड कराया गया तो अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट देखकर चिकित्सक भी हैरान रह गए। बच्चे के पेट में तीन भ्रूण मौजूद थे और भ्रूण के चलते ही मूल पित्त वाहिनी दबी हुई थी।
इसके अलावा भ्रूण से मासूम बच्चे की आंतें भी दबी हुई थी। पित्त वाहिनी और आंतें दबे होने के कारण मासूम बच्चा पीलिया रोग से ग्रसित था। उसके बाद चिकित्सकों की टीम द्वारा मासूम बच्चे का सिटी स्कैन कराया गया।
सीटी स्कैन कराने के बाद सीटी स्कैन रिपोर्ट देखकर चिकित्सकों द्वारा मासूम बच्चे का ऑपरेशन करने का फैसला किया गया। सोमवार को मासूम बच्चे का ऑपरेशन सर सुंदरलाल अस्पताल में किया गया।
करीब 3 घंटे चले इस ऑपरेशन में डॉक्टर रुचिरा के साथ ही अन्य चिकित्सक भी शामिल रहे। ऑपरेशन करने के बाद मासूम बच्चे के पेट से भ्रूण को बाहर निकाला गया। ऑपरेशन सफल होने के बाद मासूम बच्चे को बाल शल्य विभाग में रखा गया है।
चिकित्सकों का कहना है कि मासूम बच्चा अब खतरे से बाहर है, हालांकि चिकित्सकों की टीम द्वारा उसकी निगरानी की जा रही है। मासूम बच्चे का सफल ऑपरेशन होने से मासूम बच्चे के माता-पिता भी काफी खुश हैं।
यह भी बताया गया कि इस ऑपरेशन को करने के लिए लाखों रुपए खर्च करने पड़ते हैं हालांकि बीएचयू के सर सुंदर चिकित्सालय में यह ऑपरेशन पूरी तरह निशुल्क किया गया और दंपति से किसी प्रकार का शुल्क नहीं लिया गया।
इस बारे में डॉक्टरों ने बताया कि ऐसे मामले बहुत कम पाए जाते हैं। 5 लाख बच्चों में मात्र एक बच्चे के अंदर ही इस तरह की बीमारी पाई जाती है। ऐसी स्थिति में भ्रूण को बाहर निकालने के लिए ऑपरेशन करना आवश्यक होता है।












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