केदारनाथ उपचुनाव क्यों बना भाजपा कांग्रेस के लिए प्रतिष्ठा का सवाल,जानिए वो 5 प्रमुख फैक्टर तय करेंगे हार जीत
Kedarnath by-election: केदारनाथ उपचुनाव भाजपा और कांग्रेस दोनों के लिए प्रतिष्ठा का सवाल बन गया है। भाजपा ने केदारनाथ सीट जीतने के लिए पूरा जोर लगा दिया है तो वहीं कांग्रेस भी एकजुट होकर केदारघाटी में भाजपा भगाओ के नारे के साथ जीत का दम भर रही है।
कांग्रेस बदरीनाथ और मंगलौर के बाद अब केदारनाथ सीट जीतकर भाजपा सरकार पर मनोवैज्ञानिक दबाव बनाने की कोशिश में है तो भाजपा उपचुनाव में जीत दर्ज कर अपना दबदबा कायम रखते हुए धामी सरकार को स्थिर रखने की चुनौती का सामना कर पाएगी।

माना जा रहा है कि 23 नवंबर को केदारनाथ उपचुनाव के परिणाम प्रदेश की सियासत का भविष्य भी तय करेगी। आइए जानने की कोशिश करते हैं कि केदारनाथ सीट पर उपचुनाव की जीत और हार को तय करने के लिए क्या 5 प्रमुख फैक्टर हैं।
केदारनाथ मंदिर का मुद्दा
दिल्ली में केदारनाथ मंदिर निर्माण का काम भले ही स्थगित कर दिया गया हो लेकिन उपचुनाव में ये मुद्दा सबसे ज्वलंत मुद्दा बना हुआ है। कांग्रेस इस मुद्दे को छोड़ना नहीं चाहती है। कांग्रेस इस मुद्दे के सहारे अपनी नैया पार लगाना चाहती है। इस मुद्दे का असर भाजपा को परेशान भी कर रहा है। यही वजह है कि सीएम पुष्कर सिंह धामी को बाबा केदार की सौगंध खाकर इस बहस को खत्म करने की कोशिश की गई। इतना ही नहीं प्रत्याशी आशा नौटियाल तो सीएम की मौजूदगी में रो पड़ी। चुनाव में आंसू का रोल ऐसे समय में इमोशनल कार्ड माना जाता है खासकर जब दिवंगत विधायक की मृत्यु के बाद हो रहे उपचुनाव में जब सियासी दलों को सहानुभूति बटोरनी हो। ऐसे में केदारनाथ मंदिर का मुद्दा वोट की चोट पर कितना असर डालता है ये 23 तारीख को तय होगा।
अंकिता भंडारी और महिला सुरक्षा
कांग्रेस ने इस चुनाव में भी अंकिता भंडारी और महिला सुरक्षा को अहम मुद्दा बनाया हुआ है। कांग्रेस का आरोप है कि भाजपा एक बेटी को न्याय नहीं दिला पाई है साथ ही महिला सुरक्षा पर सरकार को घेर रही है। हालांकि विधानसभा और लोकसभा चुनाव में इस मुद्दे का ज्यादा असर वोट पर नजर नहीं आया। लेकिन क्या केदारनाथ उपचुनाव में अंकिता का मुद्दा असर करेगा, ये भी महत्वपूर्ण हो जाता है। कांग्रेस ने अंकिता की हत्या को मुद्दा इसलिए बनाया हुआ है, क्योंकि भाजपा की दावेदार आशा नौटियाल एक महिला होने के साथ ही भाजपा की महिला मोर्चा की अध्यक्ष भी हैं। ऐसे में कांग्रेस इस मुद्दे को फिर से जमकर उठा रही है।
केदारघाटी में आपदा और सुविधाएं
भाजपा और कांग्रेस उपचुनाव में केदारघाटी में आपदा और विकास को चुनावी मुद्दा बनाए हुए है। कांग्रेस का आरोप है कि भाजपा सरकार ने केदारघाटी में आपदा के समय में सही मेनेजमेंट के साथ काम नहीं किया और यात्रा व्यवस्था पूरी तरह से चौपट रही तो भाजपा और सीएम धामी केदारघाटी में आई आपदा के दौरान रेस्क्यू कार्य और विकास की योजनाओं को गिना रही है। सीएम धामी का कहना है कि वे आपदा के दौरान खुद मोर्चा संभाल चुके हैं और बहुत कम समय में यात्रा को पटरी पर लाने काम भी किया। इसके साथ ही रोजगार, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे मुद्दों पर भी दोनों दल आमने सामने हैं।
कांग्रेस की एकजुटता केदारनाथ उपचुनाव में कांग्रेस के सभी बड़े नेता केदारघाटी में डेरा डाले हुए हैं। पूर्व सीएम हरीश रावत से लेकर प्रदेश अध्यक्ष करन माहरा, गणेश गोदियाल,प्रीतम सिंह, हरक सिंह जैसे दिग्गज केदारनाथ विधानसभा के गांव गांव जाकर प्रत्याशी मनोज रावत के लिए जमकर प्रचार कर रहे हैं। इसके साथ ही कांग्रेस के कुमांउ के नेता भी एकजुट होकर इस चुनाव को लड़ रहा है। इस चुनाव में कांग्रेसी एकजुटता नजर आ रही है। जो कि कांग्रेस के लिए अच्छा संकेत है।
सरकार,सांसद, संगठन और सारे दावेदार
भाजपा ने केदारनाथ उपचुनाव में सरकार के मंत्री,सांसद, संगठन के बड़े चेहरे और टिकट के दावेदार समेत सारी फौज केदारघाटी में उतारी हुई है। भाजपा ने धामी सरकार के मंत्रियों को चुनाव के ऐलान से पहले ही केदारघाटी में तैनात कर दिया था। इसके साथ ही संगठन के बड़े चेहरे और रणनीतिकारों को भेज दिया था। जिससे उपचुनाव में किसी तरह की कोई कमी न रह जाए। चुनाव के ऐलान के बाद सांसद भी पहुंचे और अब टिकट न मिलने से नाराज बताए जा रहे चेहरों को एक मंच पर लाकर खड़ा कर दिया। है। दिवंगत विधायक शैलारानी रावत की बेटी ऐश्वर्या के घर पहले भाजपा प्रत्याशी आशा नौटियाल ने डिनर कर संदेश देने की कोशिश की इसके बाद ऐश्वर्या और कुलदीप दूसरे दावेदारों के साथ मंच साझा किया। इन सभी फैक्टर को साथ लेकर भाजपा इस उपचुनाव को जीतने के लिए खास रणनीति पर फोकस कर रही है।












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