Uttarkashi Cloudburst: धराली से पहले इन जगहों पर बादल फटने से मची थी भारी तबाही, देखें बर्बादी की टाइमलाइन
Uttarkashi Cloudburst: उत्तरकाशी के गांव धराली में मंगलवार दोपहर बादल फटने की वजह से भारी तबाही हुई है। धराली गांव में लगातार बारिश हो रही है जिसकी वजह से रेस्क्यू में भी काफी दिक्कतें आ रही हैं। इसके अलावा, हर्षाली और सुखी टॉप में भी बादल फटने की वजह से जल प्रलय का मंजर है। गंगोत्री धाम और मुखवा के पास स्थित धराली गांव में नाला उफान पर आ गया और नाले का पानी घरों में पहुंच गया। अब तक इस हादसे में 4 लोगों की मौत हुई है और 50 से ज्यादा लोगों के लापता होने की खबर है। सेना और एनडीआरएफ की टीम रेस्क्यू में जुटी हुई है।
धराली और आसपास के इलाकों में लगातार बारिश हो रही है। लगातार बारिश की वजह से बादल फटने की आशंका भी बनी हुई है। उत्तराखंड में पिछले 2 दशक में बादल फटने और बाढ़ की कई घटनाएं हुई हैं। इसकी एक वजह प्रकृति का दोहन और पारिस्थितिकी असंतुलन भी है। जानें हाल के सालों में प्रदेश में कब-कब बादल फटने की वजह से तबाही हुई है।

Uttarkashi Cloudburst: उत्तरकाशी का पूरा इलाका संवेदनशील
उत्तरकाशी इलाके की बात करें, तो यह बेहद संवेदनशील इलाका है। पहाड़ी भूभाग होने और लगातार वर्षा की वजह से इन इलाकों में भूस्खलन का खतरा बना रहता है। पिछले कुछ सालों में जंगलों की अंधाधुंध कटाई ने भी इस इलाके के भौगोलिक और पारिस्थितिकी संतुलन को प्रभावित किया है। इस वजह से प्राकृतिक आपदाएं बढ़ी हैं।
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⦁ इसी साल 9 जुलाई को उत्तराखंड के चमोली जिले में बादल फटने की वजह से जबरदस्त तबाही हुई थी। इस सैलाब में कई घर बह गए थे और कुछ गौशालाओं को भी नुकसान पहुंचा था। एक पहाड़ी नाले में सैलाब आ जाने की वजह से पूरा गांव जलमग्न नजर आ रहा था।
⦁ 31 जुलाई 2024 को टिहरी के जखन्याली में बादल फटा था। इस प्राकृतिक आपदा में एक ही गांव के 3 लोग मारे गए थे। मानसून के मौसम में ऊपरी हिस्सों में रहने वाले गांवों में जलप्रलय की घटनाएं आम हैं। उत्तराखंड में बादल फटने की ये घटनाएं मानसून के मौसम में ही होती हैं।
⦁ इसी साल 19-20 जुलाई को पिथौरागढ़ में कई जगहों पर बादल फटने से भारी तबाही हुई थी। इस आपदा में 11 लोगों की मौत हो गई थी, जबकि कई लोग उस आफत में लापता हो गए थे। कई गांव भी बारिश में जमींदोज हो गए और पालतू जानवरों का भी नुकसान हुआ था।
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⦁ 16-17 जून 2013 को केदारनाथ में आई प्राकृतिक आपदा के जख्म आज भी इलाके के लोगों के जेहन में जिंदा है। इस बाढ़ में 5000 से ज्यादा लोगों की मौत हुई थी और बड़ी संख्या में लोगों के लापता होने की भी बात कही जाती है।
⦁ केदारनाथ के इस हादसे में बादल फटने की वजह से भारी बाढ़ आई थी और दावा किया जाता है कि इसमें हजारों लोग बह गए, जिनकी लाशें भी बरामद नहीं की जा सकी।
⦁ सितंबर 2012 में उत्तरकाशी में बादल फटने की घटना में 45 लोगों की मौत हुई थी। इस आपदा में 40 लोग लापता हो गए थे, लेकिन उनमें से सिर्फ 22 लोगों की ही लाशें रेस्क्यू ऑपरेशन में बरामद की जा सकीं।
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⦁ साल 1998 में कुमाऊं की काली घाटी में बादल फटने की वजह से भारी तबाही मच गई थी। इस घटना में करीब 250 लोगों की मौत हुई थी। इस दौरान कैलाश मानसरोवर की यात्रा करने वाले 60 श्रद्धालुओं की भी जान चली गई थी।












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