कम खर्चे में पहाड़ों में घूमना, घर का खाना,पहाड़ी संस्कृति की झलक, युवाओं और यात्रियों के लिए खास है होम स्टे

पहाड़ों में होम स्टे से रोजगार को ​मिल रहा बढ़ावा

देहरादून, 28 जून। उत्तराखंड के पहाड़ों में होमस्टे का क्रेज स्थानीय युवाओं और यात्रियों को खासा आकर्षित कर रहा है। पहाड़ों में घूमने फिरने के लिए आ रहे यात्री होमस्टे को ही वरीयता दे रहे हैं। जिन जगहों पर होटल की सुविधाएं हैं। वहां पर भी यात्री होमस्टे को ही वरीयता दे रहे हैं। उत्तरकाशी, टिहरी,रुद्रप्रयाग, चमोली, पिथौरागढ़ समेत कई पहाड़ी जिलों में पर्यटन के लिहाज से होम स्टे से रोजगार को बढ़ावा मिल रहा है। जो कि ​टूरिस्ट भी खासा पसंद कर रहे हैं।

पर्यटन को बढ़ावा और मिल रहा रोजगार

पर्यटन को बढ़ावा और मिल रहा रोजगार

पर्यटन को बढ़ावा देने और प्रकृति की गोद में रुकने का सुकून साथ ही घर जैसा माहौल, खाना, पीने के उद्देश्य से होमस्टे शुरू किए गए हैं। पर्यटन विभाग की साइट पर 4 हजार से ज्यादा होमस्टे रजिस्टर्ड हैं। इन होमस्टे की खासियत ये है कि यहां स्टे करने के लिए होटल से बहुत कम रेट पर रुक सकते हैं। साथ ही घर का खाना परोसा जाता है। पहाड़ों में बने होम स्टे पर पहाड़ी व्यंजन परोसे जाते हैं। जो कि घर का सादा खाना प्रोवाइड कराते हैं। जहां 500 रुपए से 2 हजार रुपए तक एक रात का स्टे का खर्चा आ जाता है। पहाड़ों में कई जगहों पर होमस्टे में पहाड़ी शैली को भी प्रदर्शित किया गया है। जिससे यात्री पहाड़ी शैली और पहाड़ की प्राकृतिक सुंदरता, वेश भूषा, बोली, संस्कृति को भी नजदीकी से देख सकते हैं।

युवाओं को रोजगार, यात्रियों को घर जैसी सुविधा

युवाओं को रोजगार, यात्रियों को घर जैसी सुविधा

चारधाम यात्रा में आने वाले यात्री भी इन होम स्टे को लेकर ज्यादा उत्सुक नजर आ रहे हैं। साथ ही पहाड़ी मार्गों पर जिन जगहों पर होटल कम ही मिलते हैं ऐसे लोकेशन पर भी होम स्टे कारोबार का अच्छा रिस्पांस मिल रहा है। ट्रैकिंग के लिए फेमस रैथल गांव के पास दयारा बुग्याल है। जहां साल भर टूरिस्ट आते हैं। यहां पर बीते सालों में युवाओं ने सबसे ज्यादा होम स्टे का कारोबार शुरु किया है। रैथल गांव में दर्जनों होमस्टे संचालित हो रहे हैं। होमस्टे संचालक सुमित रतूड़ी ने बताया कि यात्रियों को ये योजना काफी पसंद आ रही ​है। साथ ही युवाओं को भी घर बैठे रोजगार मिल जाता है। उन्होंने बताया कि विंटर में भी टूरिस्ट दयारा घूमने आते हैं। इसी तरह हर्षिल वैली और धराली में भी प्रकृति की गोद में बसे सुंदर गांवों मेंं होम स्टे को अच्छा रिस्पांस मिल रहा है।

क्या है होम स्टे योजना

क्या है होम स्टे योजना

होम स्टे योजना को लेकर सरकार भी युवाओं को प्रोत्साहित कर रही है। इसके लिए ऋण की व्यवस्था की गई है। कोविड के कारण पर्यटन व्यवसायियों को काफी नुकसान हुआ है। ऐसे मेंं सरकार की ये योजना स्थानीय युवाओं को खासा लाभ पहुंचा रही है। उत्तराखंड सरकार ने पंडित दीन दयाल गृह आवास (होम स्टे) योजना लांच की है। इस योजना के माध्यम से लोग उत्तराखंड में आने वालें पर्यटकों को लोग अपने घर में ही ठहरा सकते हैं। इस योजना में आवेदन करने वाले लोगों की सरकार आर्थिक सहायता दे रही है। जिससे वह अपने घर का इस्तेमाल पर्यटकों को ठहराने के लिए कर सकें। होम स्टे योजना का लाभ लेने के लिए पंडित दीन दयाल होम स्टे योजना के साथ साथ वीर चंद्र सिंह गढ़वाली पर्यटन स्वरोजगार योजना के आवेदन ऑनलाइन लिए जाते हैं। होम स्टे विकसित करने के लिए पर्वतीय क्षेत्रों में कुल लागत का 33 प्रतिशत या अधिकतम 10 लाख रूपए सरकार सब्सिडी देती है। जबकि मैदानी क्षेत्रों में सरकार कुल लागत का 25 प्रतिशत या 7 लाख रूपए तक की सब्सिडी दे रही है।

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