'फिर धामी की नहीं, रावतों की धूम होती', हरीश रावत ने त्रिवेंद्र के बयान पर कसा तंज, जानिए इसके सियासी मायने

पूर्व सीएम हरीश रावत ने त्रिवेंद्र रावत के बयान पर कसा तंज

उत्तराखंड की सियासत में हर बार चौंकाने वाले पूर्व सीएम हरीश रावत ने अपनी एक फेसबुक पोस्ट के जरिए पूर्व सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत पर कटाक्ष करने के साथ ही बड़ा बयान दिया है। हरीश रावत ने यूकेएसएसएससी प्रकरण पर पूर्व सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत के बयान पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। जिसमें त्रिवेंद्र सिंह रावत ने यूकेएसएसएससी बनाने के पीछे की मंशा को ही गलत करार दिया है। इस बयान पर पूर्व सीएम हरीश रावत ने त्रिवेंद्र को खरी-खरी भी सुनाई है इतना ही नहीं साफ कहा कि अगर पहले सीएम रहते फैसला ले लेते तो राज्य में धामी की नहीं रावतों की धूम रहती। इस बयान के अब सियासी मायने तलाशे जा रहे हैं।

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तब इतना गुस्सा दिखाया होता तो फिर धामी की धूम नहीं होती, रावतों की धूम होती

हरीश रावत ने पूर्व सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत के उस बयान पर अपनी प्रतिक्रिया सोशल मीडिया के जरिए शेयर की है। हरीश रावत ने लिखा है कि यारा बड़ी देर कर दी समझ आते.आते। 2017 में जब हमने जांच शुरू की थी, जब आपके मंत्री ने विधानसभा के पटल पर स्वीकार किया था कि गड़बड़ियां पाई गई है, जांच रिपोर्ट शासन को मिली है‌। यदि तब इतना गुस्सा दिखाया होता तो फिर धामी की धूम नहीं होती, रावतों की धूम होती। हरीश रावत ने लिखा है कि दरवाजे की चौखट पर सर टकराए तो घर ही गिरा दो। विधानसभा में भर्तियों में धांधलियां हुई तो विधानसभा भवन ही गिरा दो। संस्थाएं खड़ी की हैं, यदि संस्थाओं का दुरुपयोग हुआ है तो उसको रोकिए, दृढ़ कदम उठाइए, संस्थाएं तोड़ने से काम नहीं चलेगा। यदि हमने मेडिकल और उच्च शिक्षा का वॉक इन भर्ती बोर्ड नहीं बनाए होते तो आज डॉक्टर्स और उच्च शिक्षा में टीचर्स की भयंकर कमी होती। यदि गुस्सा दिखाना ही है तो अपनी पार्टी के लोगों को दिखाइए न, ये जितने घोटालेबाज अब तक प्रकाश में आए हैं इनका कोई न कोई संबंध भाजपा से है।

पहले भी सियासी मायने तलाशे जा चुके

बता दें कि हरीश रावत और त्रिवेंद्र सिंह रावत की मुलाकात को लेकर पहले भी सियासी मायने तलाशे जा चुके हैं। जब हरीश रावत अचानक त्रिवेंद्र सिंह रावत से मिलने पहुंचे थे। हरीश रावत पहले भी त्रिवेंद्र के फैसलों को लेकर अपनी राय और सलाह सार्वजनिक कर चुके हैं। ऐसे में अब त्रिवेंद्र रावत को लेकर हरीश रावत का इस तरह बयानबाजी करना एक बड़ी राजनीतिक कदम की ओर इशारे भी कर रहे हैं, इतना ही नहीं धामी की धूम की जगह रावतों की धूम शब्द का इस्तेमाल करना भी सियासत का ही दांव माना जा रहा है।

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