Kishtwar में आतंकवादियों के साथ मुठभेड़ में शहीद हुए उत्तराखंड के गजेंद्र सिंह, जानिए परिवार में कौन-कौन
Kishtwar उत्तराखंड के लाल गजेंद्र सिंह गढि़या जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ में आतंकवादियों के साथ हुई मुठभेड़ में शहीद हो गए। गजेंद्र सिंह टू-पैरा कमांडो में तैनात थे। वह किश्तवाड़ में आतंकियों की तलाश में चलाए जा रहे संयुक्त अभियान ऑपरेशन त्राशी का हिस्सा थे।
प्राप्त जानकारी के अनुसार रविवार को जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ जनपद के सिंहपोरा क्षेत्र में आतंकवादियों के साथ मुठभेड़ के दौरान हवलदार गजेंद्र सिंह वीरगति को प्राप्त हुए। कपकोट के बीथी निवासी गजेंद्र सिंह का पार्थिव शरीर आज कपकोट पहुंचेगा।

शहीद की सूचना होने की जानकारी मिलते ही जवान केे परिजनों में कोहराम मचा हुआ है। वह अपने पीछे पिता धन सिंह गढि़या, माता चंद्रा देवी गढि़या, पत्नी लीला गढि़या और दो बच्चे राहुल गढि़या और धीरज गढि़या को छोड़ गए हैं। उनका छोटा भाई किशोर गढि़या है। गजेंद्र ने प्राथमिक शिक्षा गांव के विद्यालय से प्राप्त की थी। छह से इंटर तक की पढ़ाई उन्होंने राजकीय इंटर कॉलेज कपकोट से हासिल की। स्नातक पहले वर्ष के दौरान 2004 में वह सेना में भर्ती हो गए थे।
प्राप्त जानकारी के अनुसार गजेंद्र सिंह गढि़या (43) टू-पैरा कमांडो में तैनात थे। रविवार को वह किश्तवाड़ में आतंकियों की तलाश में चलाए जा रहे संयुक्त अभियान ऑपरेशन त्राशी का हिस्सा थे। छात्रू क्षेत्र के सुदूर-सिंहपोरा में सर्च ऑपरेशन के दौरान आतंकियों ने सुरक्षा बलों पर ग्रेनेड से हमला कर दिया। इसी हमले में हवलदार गजेंद्र बलिदान हो गए। परिजनों से मिली जानकारी के अनुसार जवान का पार्थिव शरीर हेलीकॉप्टर के माध्यम से आज केदारेश्वर मैदान में लाया जाएगा।
सरयू-खीरगंगा नदी के संगम पर सैन्य सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा। बलिदान हुए हवलदार गजेंद्र के बच्चे देहरादून में रहते हैं। उनका एक पुत्र छह जबकि दूसरा कक्षा चार में पढ़ता है। उनकी खबर मिलने के बाद पत्नी बच्चों समेत गांव लौट आईं हैं। परिजनों के अनुसार, घटना की जानकारी मिलने के बाद उनका स्वास्थ्य खराब हो गया था। उन्हें हेलीकॉप्टर से पहुंचाया गया।
सैनिक कल्याण मंत्री गणेश जोशी ने जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ जिले में आतंकियों से लोहा लेते हुए जनपद बागेश्वर निवासी हवलदार गजेंद्र सिंह गढ़िया के शहीद होने पर गहरा शोक व्यक्त किया है। गणेश जोशी ने कहा कि हवलदार गजेंद्र सिंह ने राष्ट्र की रक्षा करते हुए सर्वोच्च बलिदान दिया है, जिसे देश कभी नहीं भूलेगा।












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