भर्ती घोटाले को लेकर उत्तराखंड के पूर्व सीएम हरीश रावत ने तोड़ा मौन व्रत, जानिए क्या कहा

हरीश रावत ने नियुक्तियों का ब्यौरा सार्वजनिक करने की मांग की

देहरादून, 19 सितंबर। उत्तराखंड के पूर्व सीएम हरीश रावत ने भर्ती घोटाले को लेकर रखे मौन व्रत तोड़ दिया है। उन्होंने कहा था कि भर्तियों को लेकर 2 माह तक कोई टिप्पणी नहीं करेंगे। हरीश रावत ने सभी संस्थाओं में नियुक्तियों का ब्यौरा सार्वजनिक करने की मांग की है। हरीश रावत ने कहा कि नियुक्तियां यदि अस्थाई आधार पर भी हुई हैं या नियुक्तियां किसी आधार पर भी हुई हों, उस सबका ब्यौरा साझा होना चाहिए।

Uttarakhand Former CM Harish Rawat breaks silence over recruitment scam, know what he said

नियुक्तियां किसी आधार पर भी हुई हों, उस सबका ब्यौरा साझा होना चाहिए

पूर्व सीएम हरीश रावत ने सोशल मीडिया के जरिए कहा कि उन्होंने कहा था कि भर्तियों को लेकर 2 माह तक कोई टिप्पणी नहीं करेंगे। मुख्यमंत्री और विधानसभा अध्यक्ष के विवेक पर भरोसा जताया था। उन्होंने कहा कि ऐसी लिस्टें आ रही हैं, कितनी सच हैं, कितनी गलत हैं, मैं नहीं जानता। लेकिन समझ में नहीं आ रहा है कि यह सब कैसे हुआ है। हरदा आगे लिखते हैं कि संस्थाएं हमने खड़ी की हैं। चाहे कोई भी विश्वविद्यालय हो। उनमें यदि नियुक्तियां हुई हैं तो चिंताजनक है। संस्थाएं नष्ट हो जाएंगी। उन्होंने कहा कि उन संस्थाओं के प्रमुखों से कहना चाहता हूं कि ईमानदारी से अपनी संस्थाओं में हुई नियुक्तियों का ब्यौरा सार्वजनिक करें। केवल कह देने भर से नहीं होगा। नियुक्तियां यदि अस्थाई आधार पर भी हुई हैं या नियुक्तियां किसी आधार पर भी हुई हों, उस सबका ब्यौरा साझा होना चाहिए। मैं व्रत नहीं तोड़ता, यदि मेरे मन पर आघात नहीं लगता। क्योंकि यह संस्थाएं कांग्रेस के कार्यकाल में खड़ी हुई हैं, हम इन संस्थाओं पर गर्व करना चाहते हैं। जब संस्थाएं टूटती व बिखरती हैं तो उसका कितना नुकसान समाज व राज्य को होता है। इसका आभास हमको अधीनस्थ सेवा चयन आयोग में हुई गड़बड़ों से हुआ है।

हमारे जमीनों पर रिजॉर्ट बन रहे हैं, हम चौकीदार बन रहे हैं

कुछ दिन पहले सोशल मीडिया में वायरल हुई सूचियों को लेकर हरदा पहले सोशल मीडिया में बयान दे चुके हैं, उन्होंने 20 में से दो सूची फेसबुक पर शेयर करते हुए कहा कि पिछले पांच छह साल में ऐसी सैकड़ों नियुक्तियां हुई हैं जो नियुक्तियां नहीं हो सकती हैं। उत्तराखंड के लोगों का हक मारकर के प्रभावशाली लोगों ने अपने प्रभाव का इस्तेमाल करके अपने निकटस्थ व परिवार के लोगों की नियुक्तियां की हैं। उसी तरीके से किस प्रकार से ठेके दिलवाए गए हैं, जिसमें पीडब्ल्यूडी, इरीगेशन,यूपीसीएल और यदि विभागों के अंदर साज.सज्जा सामान खरीद आदि के ठेके हैं, वह सारी लिस्टें यदि संज्ञान में आ जाएं तो किस तरीके से पिछले 6 सालों के अंदर उत्तराखंड लूटा है या लूटवाया गया है, उसकी एक तस्वीर आपके सामने आ जाएगी और मैं उम्मीद कर रहा हूं कि कुछ और खोजी लोग और गहराई तक जाकर सत्य को उजागर करेंगे। हरदा ने आरोप लगाया कि निर्माण वाले विभागों में एनुअल टर्नओवर के नाम पर हमारे लोग ठेकेदार नहीं, किटकनदार बनकर रह गए हैं। हमारे जमीनों पर रिजॉर्ट बन रहे हैं, हम चौकीदार बन रहे हैं। सरकारी विभागों में पद खाली हो रहे हैं, अस्थाई नियुक्तियों के नाम पर गैर हकदार लोगों को नियुक्तियां दे दी जा रही हैं।

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