कभी-कभी दर्द बयां करना भी पार्टी के लिए फायदेमंद: हरीश रावत
देहरादून, 25 दिसंबर: पंजाब की कलह को खत्म करने में अहम भूमिका निभाने वाले कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत में हाल ही आलाकमान से अपनी नाराजगी जाहिर की थी। उन्होंने ट्वीट करते हुए पार्टी से अलग होने का इशारा कर दिया, जिसके बाद चुनाव की दहलीज पर खड़े उत्तराखंड की कांग्रेस में भूचाल आ गया था, लेकिन अब सब ठीक है। क्योंकि हरीश रावत के सुर बदल गए हैं शुक्रवार को राहुल गांधी से उनकी मुलाकात के बाद रावत के बागी तेवर ठंडे पड़ गए हैं।

वहीं न्यूज एजेंसी एएनआई से बात करते हुए हरीश रावत ने कहा कि आने वाले चुनाव जीतने के लिए कुछ सुधार जरूरी है। कभी-कभी दर्द व्यक्त करना भी पार्टी के लिए फायदेमंद होता है। उन्होंने बताया कि जैसे BCCI है वैसे ही AICC मालिक है। जो पार्टी के प्रभारी हैं वह कोच हैं, लेकिन कप्तान का भी अपना स्थान है। इन तीनों के बीच एक विश्वास और समझ का रिश्ता होना चाहिए। मैंने जो भी कहा वह जीतने के लिए कहा। कभी पीड़ा व्यक्त करना भी पार्टी के लिए लाभदायक होता है।
पूर्व सीएम हरीश रावत ने कहा कि कदम-कदम मिलाए जा कांग्रेस के गीत गाए जा, ये तो मैं उस समय भी कर रहा था। बस में इस गीत के साथ मैंने जरा सा ढोल बजा दिया। उन्होंने कहा कि कुछ चीज ऐसी है कि जिसमें बदलाव इलेक्शन जीतने के लिए जरूरी है। ऐसे में मैं जो कहा, वो पार्टी के हित के लिए कहा है।
दरअसल, हरीश रावत के ट्वीट के बाद कांग्रेस पार्टी तुरंत एक्शन में आ गई और राहुल गांधी से मुलाकात के बाद रावत क बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई, जिसके तहत कांग्रेस आलाकमान ने बड़ा फैसला लेते हुए हरीश रावत को उत्तराखंड प्रचार कमेटी का प्रमुख बनाया है। बता दें कि इलेक्शन कैंपेन कमेटी का चेयरमैन ही चुनावी प्रचार को भी लीड करेगा।












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