हल्द्वानी में इंदिरा की विरासत को आगे बढ़ाने और नैनीताल, बाजपुर में पिता पुत्र के सामने नई पारी की चुनौती

हल्द्वानी, नैनीताल और बाजपुर सीट प्रदेश की हॉट सीट

देहरादून, 11 फरवरी। हल्द्वानी, नैनीताल और बाजपुर सीट प्रदेश की हॉट सीट बनी हुई हैं। हल्द्वानी में दिवंगत इंदिरा ह्रदयेश के पुत्र सुमित पहली बार चुनाव में उतरकर अपनी मां की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं। जबकि बाजपुर में यशपाल आर्य और नैनीताल में संजीव आर्य के सामने भाजपा से कांग्रेस में जाने का निर्णय सही ठहराने की चुनौती है। ऐसे में इन तीनों सीटों पर सबकी निगाहें लगी हुई हैं।

uttarakhand assembly election 2022 haldwani nainital bajpur vidhansabha seat

हल्द्वानी में भाजपा इतिहास रचने को बेताब
उत्तराखंड की हल्द्वानी सीट पर कांग्रेस की दिवंगत नेता इंदिरा ह्रदयेश की विरासत को आगे बढ़ाने के लिए उनके पुत्र सुमित ह्रदयेश मैदान में है। सुमित ह्रदयेश अपनी मां की फोटो को साथ में लेकर ही लोगों से मतदान की अपील कर रहे हैं। ऐसे में ये चुनाव हल्द्वानी और ह्रदयेश परिवार के लिए खास हो गया है। भाजपा ने डॉ. जोगेंद्र पाल सिंह रौतेला पर भरोसा जताया है। भाजपा ने हल्द्वानी के रण में दूसरी मेयर जोगेंद्र रौतेला को मैदान में उतारा है। पूर्व में पार्षद होना और मेयर पद पर लगातार दो बार विजयी होना, पिछले विधानसभा चुनाव में नेता प्रतिपक्ष डॉ. इंदिरा हृदयेश को कड़ी टक्कर देना, सहज व्यक्तित्व जैसी बातें उनके पक्ष में गईं। हल्द्वानी सीट पर 3 बार 2002, 2007, 2017 में इंदिरा ह्रदयेश विधायक रह चुकी हैं। हालांकि 2007 में बीजेपी के बंशीधर भगत ने इंदिरा ह्रदयेश का हरा दिया था। ऐसे में इस बार पहली बार भाजपा और कांग्रेस में सीधी टक्कर नजर आ रही है।

नैनीताल में चेहरे पुराने, पार्टी बदली
नैनीताल विधानसभा सीट पर एक बार फिर यशपाल आर्य के बेटे संजीव आर्य मैदान में है। हालांकि इस बार संजीव आर्य कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं। उनका मुकाबला सरिता आर्य से हैं, जो भाजपा की उम्मीदवार हैं। नैनीताल सीट पर एक लाख दस हजार मतदाता हैं। इसमें से करीब 30 हजार अनुसूचित जाति तथा करीब पांच हजार अल्पसंख्यक मतदाता हैं। नैनीताल सीट पर हर बार नए चेहरे को जनता मौका देती आ रही है। 2002 में उत्तराखंड क्रांति दल के नारायण सिंह जंतवाल विधायक बने। 2007 में भाजपा के खड़क सिंह बोहरा, 2012 में कांग्रेस की सरिता आर्य और 2017 में भाजपा के संजीव आर्य चुनाव जीतकर विधायक बनें। इस बार कांग्रेस के टिकट पर संजीव आर्य और भाजपा के टिकट पर सरिता आर्य चुनावी मैदान में हैं। जो कि 2017 में भी आमने सामने आ चुके हैं। हालांकि तब सरिता कांग्रेस और संजीव भाजपा से चुनाव लड़ रहे थे। इस बार दोनों के दल बदल चुके हैं।

बाजपुर में यशपाल के सामने त्रिकोणीय मुकाबला
किसान बाहुल्य वाली सीट बाजपुर आरक्षित सीट पर एक बार फिर यशपाल आर्य चुनावी मैदान में हैं। हालांकि इस बार यशपाल आर्य कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं। बाजपुर विधानसभा सीट अनुसूचित जाति के उम्मीदवारों के लिए आरक्षित सीट है। 2002 में परिसीमन के बाद काशीपुर से हटाकर बाजपुर विधानसभा कर दी गई है। पहली बार बाजपुर से अरविंद पांडे विधायक बने थे। जो कि वर्तमान में शिक्षा मंत्री और गदरपुर सीट से विधायक हैं। इस सीट से दूसरी बार भी अरविंद पांडे विधायक चुने गए। 2012 में इस सीट पर कांग्रेस का कब्जा हो गया जब यशपाल आर्य कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़े और विधायक बने। 2017 में दोबारा यशपाल आर्य ही विधायक बने लेकिन भाजपा के टिकट पर। एक बार फिर यशपाल आर्य बाजपुर सीट पर हैट्रिक मारने की कोशिश में है। हालांकि इस बार वे फिर से कांग्रेस के टिकट पर चुनावी मैदान में हैं। इस बार के चुनाव में बाजपुर सीट पर त्रिकोणीय मुकाबला नजर आ रहा है। भाजपा ने राजेश कुमार को कांग्रेस से यशपाल आर्य के सामने चुनावी मैदान में उतारा है। जबकि कांग्रेस से बगावत कर आप में जाने वाली सुनीता टम्टा बाजवा चुनाव को त्रिकोणीय बना रही हैं। सुनीता टम्टा बाजवा का भी इस सीट पर बड़ा दबदबा माना जाता है, जो​ किसानों की अच्छी खासी वोटबैंक पर सेंधमारी कर सकती है।

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+