उत्तराखंड: 1 लाख 63 हजार से अधिक महिलाएं बनीं लखपति दीदी, CM धामी ने बताया महिलाएं कैसे बन रही आत्मनिर्भर
उत्तराखंड में 1 लाख 63 हजार से अधिक महिलाएं 'लखपति दीदी' बनीं है। महिला स्वयं सहायता समूहों द्वारा बनाए गए उत्पादों की प्रोसेसिंग एवं मार्केटिंग हेतु 49 ग्रोथ सेंटरों की स्थापना की गई है। इन उत्पादों के प्रभावी विपणन के लिए 13 जनपदों में 33 नैनो पैकेजिंग यूनिट्स, 17 सरस सेंटर, 3 राज्य स्तरीय विपणन केंद्र तथा 8 बेकरी यूनिट्स का भी संचालन किया जा रहा है।
केंद्र सरकार की वन स्टेशन, वन प्रोडक्ट योजना के अंतर्गत देहरादून और हरिद्वार रेलवे स्टेशनों पर महिला स्वयं सहायता समूहों के उत्पादों की बिक्री के लिए विशेष केंद्र स्थापित किए गए हैं। राज्य सरकार तीन वर्षों में 15 हज़ार उद्यमियों को इन्क्यूबेशन सहयोग देगी। ये जानकारी सीएम पुष्कर सिंह धामी ने दी है।

उन्होंने बताया कि राज्य में 68 हज़ार स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से लगभग 5 लाख महिलाएं संगठित होकर अपना व्यवसाय कर रही हैं। 2023 में शुरू की गई मुख्यमंत्री सशक्त बहना उत्सव योजना के माध्यम से बहनों ने विभिन्न आयोजनों में 27 हज़ार से अधिक स्टॉल लगाकर 7 करोड़ रुपये से अधिक के उत्पादों की बिक्री की है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मुख्यमंत्री सशक्त बहना उत्सव योजना के अन्तर्गत सराहनीय कार्य करने वाले महिला स्वयं सहायता समूहों को सम्मानित किया और उनसे संवाद भी किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने मुख्यमंत्री उद्यमशाला योजना का शुभंकर एवं लोगो लॉन्च किया तथा हाउस ऑफ हिमालयाज के नये उत्पाद एवं वेबसाइट का लोकार्पण किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार मातृशक्ति के कल्याण एवं सशक्तिकरण के लिए निरंतर कार्य कर रहे हैं। जब एक महिला आर्थिक रूप से सशक्त होती है, तो वह पूरे समाज को सशक्त बनाने का कार्य करती है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार भी मातृशक्ति के कल्याण के लिए निरंतर कार्य कर रही है। शिक्षा और स्वास्थ्य से लेकर उद्यमिता और नौकरियों तक में प्रदेश की महिलाओं की अधिक से अधिक भागीदारी सुनिश्चित करने का प्रयास किया गया है।
ग्रामीण आजीविका मिशन के माध्यम से प्रदेश की ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने का कार्य किया जा रहा है। सशक्त बहना उत्सव योजना और मुख्यमंत्री महिला स्वयं सहायता समूह सशक्तिकरण योजना के माध्यम से मातृशक्ति को नए अवसर प्रदान किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री उद्यमशाला योजना के अन्तर्गत आगामी तीन वर्षों में 15 हज़ार से अधिक उद्यमियों, स्वयं सहायता समूहों और लखपति दीदियों को इन्क्यूबेशन सुविधा प्रदान की जाएगी।
अल्मोड़ा की सीमा कुमारी ने कहा कि राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं का लाभ लेकर वे पिछले 5 वर्षों में 18 लाख रुपये की आमदनी कर चुकी हैं। बागेश्वर की दया दानू ने कहा कि उनके साथ 400 महिलाएं स्वरोजगार से जुड़ी हैं और एक वर्ष में सबने मिलकर एक करोड़ रुपये का लाभ अर्जित किया है।
चम्पावत की हेमा उपाध्याय ने कहा कि वे एग्रो टूरिज्म पर कार्य कर रही हैं। पॉली हाउस और होमस्टे के माध्यम से उन्हें हर साल 4 लाख रुपये की आय प्राप्त हो रही है। कोरोना के दौरान उन्होंने अपने पति के साथ रिवर्स पलायन किया था।
चमोली की रेखा नेगी ने कहा कि स्टॉल के माध्यम से उन्हें स्थानीय उत्पादों पर अच्छी आय प्राप्त हो रही है। देहरादून की किरण राणा ने कहा कि उन्हें मशरूम उत्पादन से काफी फायदा हुआ है और उनके साथ 34 महिलाएं कार्य कर रही हैं।
हरिद्वार की छवि ने बताया कि उन्होंने रेस्टोरेंट के लिए 10 लाख रुपये का लोन लिया था, जिस पर उन्हें 6 लाख रुपये की सब्सिडी मिली। नैनीताल की किरण जोशी ने बताया कि उनके द्वारा बनाए गए रेशम उत्पादों से उन्होंने पिछले 9 माह में 8 लाख रुपये का व्यवसाय किया है।
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