उत्तराखंड में अनोखा आंदोलन अपनों के खिलाफ क्यों ड्यूटी करने को मजबूर हैं पुलिसकर्मी, जानिए क्या है मामला

4600 ग्रेड पे की मांग पर पुलिसकर्मियों के परजिनोंं का आंदोलन जारी

देहरादून, 4 अक्टूबर। उत्तराखंड में एक अनोखा आंदोलन हो रहा है। उत्तराखंड पुलिस कर्मियों के ग्रेड पे बढ़ाने की मांग पर पुलिसकर्मियों के परिजन सड़क पर उतर चुके हैं। ऐसे में परिजनों को आंदोलन से रोकने के लिए पुलिसकर्मियों को अपनी ड्यूटी भी करनी पड़ रही है। 4600 ग्रेड पे की मांग को लेकर उत्तराखंड पुलिस के सिपाहियों के परिजनों ने पहले गांधी पार्क पर धरना दिया, बाद में सीएम आवास कूच किया। बाद में डीजीपी और सीएम के आश्‍वासन पर ही आंदोलन को स्‍थगित किया।

डीजीपी और सीएम के आश्वासन पर माने

डीजीपी और सीएम के आश्वासन पर माने

उत्तराखंड में लंबे समय से पुलिसकर्मियों के परिजन 4600 ग्रेड पे की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। रविवार को पुलिसकर्मियों के परिजन पहले गांधी पार्क पर इकट्ठा हुए हैं। परिजनों ने 4600 ग्रेड पे आज दो अभी दो के नारे लगाए। इसके बाद मुख्यमंत्री आवास कूच किया। दोपहर बाद सीएम आवास से पहले हाथीबड़कला पहुंचने पर पुलिस ने उन्हें रोका ।पुलिस परिजनों ने वहां पर मुख्यमंत्री को बुलाने की मांग उठाई । एसएसपी से लेकर मुख्यमंत्री के पीए भी आंदोलनकारियों को समझाने पहुंचे। लेकिन वे नहीं कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल से मुलाकात और आश्वासन के बाद सभी आंदोलनकारियों ने अपना प्रदर्शन जारी रखा। आंदोलनकारियों ने डीजीपी अशोक कुमार के मौके पर आने और सीएम के आचार संहिता से पहले मामला सुलझाने के आश्वासन के बाद ही धरना स्थगित किया गया। यह पूरा घटनाक्रम 10 से 11 घंटे तक चला। इस दौरान पुलिसकर्मियों के परिजन,
उत्तराखंड अधिकारी कार्मिक शिक्षक महासंघ और उत्तराखंड क्रांति दल का विरोध प्रदर्शन भी जारी रहा।

उपसमिति की बैठक में ​सिफारिश का दावा

उपसमिति की बैठक में ​सिफारिश का दावा

बीते मार्च से पुलिसकर्मियों की 4600 ग्रेड पे की मांग को लेकर ​आंदोलन चल रहा है। जिसको लेकर कई संगठन और संस्थाओं ने भी इस आंदोलन को समर्थन दिया। पुलिसकर्मियों के परिजनों ने एक बार पहले भी गांधी पार्क में बड़ा आंदोलन किया। इस दौरान राज्य सरकार ने आश्वासन भी दिया। राज्य सरकार ने कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल की अध्यक्षता में एक उपसमिति भी गठित की, जिसकी बैठक में राज्य पर पड़ने वाले आर्थिक बोझ पर भी चर्चा हो चुकी है। सूत्रों की मानें तो उपसमिति की बैठक में इस मांग का समर्थन करते हुए सिफारिश भी की गई है। पुलिस सिपाहियों को 4600 ग्रेड पे के मामले में सरकार जल्द ही फैसला ले सकती है। मुख्यमंत्री ने पिछले दिनों इस कार्यक्रम के दौरान पुलिस मुख्यालय में इसके संकेत दिए थे। उन्होंने कहा था कि सिपाहियों के इस बड़े मुद्दे पर विचार-विमर्श किया जा रहा है।हालांकि अभी मुख्यमंत्री को समिति की रिपोर्ट नहीं मिली है।

ये है विवाद की वजह

ये है विवाद की वजह

पुलिस महकमे में पहले 10 वर्ष, 16 वर्ष और 26 वर्ष की सेवा पर पदोन्नति का प्रविधान था। पदोन्नति न होने की सूरत में इन्हें उस पद का ग्रेड वेतन दिया जाता था। छठे वेतनमान के बाद अब 10 वर्ष, 20 वर्ष और 30 वर्ष में पदोन्नति देने का प्रविधान किया गया है। पुलिस कर्मियों का विरोध इस बात पर है कि अब अगले पद पर पदोन्नति न होने की स्थिति में उन्हें ग्रेड वेतन अगले पद का नहीं मिलेगा। ग्रेड वेतन के स्लैब का अगला ग्रेड वेतन उन्हें दिया जाएगा, जो बेहद कम है। पुलिस के जवानों का पहला ग्रेड वेतन 2400 का है। पदोन्नति न होने की सूरत में उन्हें अगला ग्रेड वेतन 2800 रुपये का मिलेगा, जो पहले 4600 रुपये मिल रहा था।

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