Success Story देहरादून की रेखा ने खेती से कारोबार तक, स्वरोजगार में पेश की मिसाल, आत्मनिर्भरता की बनीं पहचान
Success Story उत्तराखंड की राजधानी देहरादून के विकासखंड रायपुर अंतर्गत ग्राम पंचायत मालदेवता की रेखा चौहान ने यह साबित कर दिया है कि यदि हौसला, कौशल और सही मार्गदर्शन मिले तो महिलाएं किसी भी क्षेत्र में पीछे नहीं रहतीं।
खेती के साथ आधुनिक युग के अवसरों को अपनाकर रेखा चौहान आज न केवल आत्मनिर्भर बनी हैं, बल्कि अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत भी बन गई हैं। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा संचालित विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं से जुड़कर रेखा चौहान ने अपने जीवन को नई दिशा दी।

उन्होंने खेती से अपने पारंपरिक जुड़ाव को बनाए रखते हुए राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) की योजनाओं का लाभ उठाया और "प्रज्ञा ब्यूटी पार्लर, कॉस्मेटिक एवं गिफ्ट शॉप" की शुरुआत की। रेखा चौहान की यह पहल केवल स्वरोजगार तक सीमित नहीं रही। उन्होंने अपने साथ गांव की एक अन्य महिला को भी रोजगार प्रदान किया है, जिससे वे अब जॉब सीकर से जॉब गिवर की भूमिका में आ चुकी हैं।
महिला उद्यमिता और रोजगार सृजन का सशक्त उदाहरण
उनका यह कदम ग्रामीण क्षेत्र में महिला उद्यमिता और रोजगार सृजन का सशक्त उदाहरण है। रेखा का कहना है कि सरकारी योजनाओं, स्वयं सहायता समूहों और प्रशिक्षण कार्यक्रमों ने उन्हें आत्मविश्वास और आर्थिक मजबूती दी। आज वे अपने परिवार की आय में योगदान देने के साथ-साथ अन्य महिलाओं को भी आगे बढ़ने के लिए प्रेरित कर रही हैं।
सहायता समूह के माध्यम से 2024-25 में एक लाख का बैंक ऋण
राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन की ओर से रेखा को ब्यूटी पार्लर व कॉस्मेटिक की दुकान के लिए प्रगति स्वयं सहायता समूह के माध्यम से 2024-25 में प्रत्येक वर्ष एक लाख का बैंक ऋण प्राप्त किया। वर्ष 2025 में रेखा को कम्युनिटी इन्वेस्टमेंट फंड (सीआईएफ) से 50 हज़ार की सहायता मिली।
दुकान से प्रतिमाह 25 हज़ार की आय, महिला को भी जॉब भी दी
इससे रेखा ने अपने सपने को हकीकत में बदला है। आज रेखा ब्यूटी पार्लर कॉस्मेटिक की दुकान से प्रतिमाह 20-25 हज़ार की आय कमा रही है और त्यौहारों के सीजन में 25-30 हजार प्रतिमाह कमा लेती है। उन्होंने कॉस्मेटिक की दुकान में पार्ट टाइम के लिए एक महिला को भी जॉब भी दी है।
लखपति दीदी की दौड़ में भी अग्रसर
जिला मिशन प्रबंधक सोनम गुप्ता ने बताया बताया की रेखा चौहान हमारे प्रगति स्वयं सहायता समूह की महिला है। जिन्होंने पिछले वर्ष से ही कॉस्मेटिक और गिफ्ट शॉप की दुकान का संचालन शुरू किया है। उन्होंने बताया कि रेखा खेती के साथ कॉस्मेटिक की दुकान से 25 से 30 रुपए की आय अर्जित कर अपने आप को सशक्त बनाया है। साथ ही लखपति दीदी की दौड़ में भी अग्रसर है।
राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन
जिसे अब दीनदयाल अंत्योदय योजना- राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के नाम से जाना जाता है। ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा शुरू की गई एक गरीबी उन्मूलन योजना है, जिसका उद्देश्य ग्रामीण गरीबों, खासकर महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से संगठित करके उन्हें स्थायी आजीविका के अवसर प्रदान करना, वित्तीय सेवाओं तक पहुँच देना और उनके जीवन स्तर में सुधार करना है, जिससे वे गरीबी से बाहर निकल सकें।
- यह स्वयं सहायता समूह - मिशन का मुख्य आधार 10-20 ग्रामीण महिलाओं का एक स्व-प्रबंधित समूह बनाना है, जो बचत और ऋण गतिविधियों में शामिल होते हैं।
- यह एक केंद्रीय प्रायोजित योजना है, जिसे केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर फंड करती हैं।
- राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (SRLM) और जिला मिशन प्रबंधन इकाइयाँ (DMMU) इसे लागू करती हैं।
- उत्तराखंड में स्वरोजगार को बढ़ावा देने के लिए मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना (MSY) और मुख्यमंत्री सौर स्वरोजगार योजना (MSSY) प्रमुख योजनाएँ हैं।
- युवाओं, प्रवासियों और कारीगरों को उद्योग, सेवा, व्यवसाय, कृषि, बागवानी, पशुपालन आदि के लिए बैंक ऋण और सब्सिडी (अनुदान) प्रदान करती हैं।
आवेदन प्रक्रिया-
इन योजनाओं के लिए उत्तराखंड सरकार का पोर्टल और राष्ट्रीय एकल खिड़की प्रणाली (NSWS) (NSWS) के माध्यम से आवेदन किया जा सकता है।
जिला उद्योग केंद्र (DIC) और संबंधित विभागों से जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।












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