उत्तराखंड में 2016 का इतिहास दोहराने की तैयारी, लेकिन फंस सकता है इस बार ये पेंच
कांग्रेस में बगावत के संकेत, दलबदल कानून का डर
देहरादून, 13 अप्रैल। उत्तराखंड कांग्रेस में बदलाव के बाद से नाराज विधायकों के बगावती तेवर थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। जिससे एक बार फिर कांग्रेस में बगावत के संकेत मिल रहे हैं। हालांकि दूसरा खेमा इसे प्रेशर पॉलिटिक्स मानकर चल रहा है। लेकिन अंदरखाने कुछ नाराज विधायकों के भाजपा से संपर्क में होने की खबरें भी आ रही हैं। ऐसे में एक बार फिर 2016 में हुए बगावत की याद कांग्रेस को आने लगी है। लेकिन इस बार नाराज विधायकों को अपनी विधायकी बचाने के लिए दलबदल कानून का भी पेंच फंसता हुआ नजर आ रहा है। जिसके लिए अगर कांग्रेसी विधायकों में टूट होती है तो दो तिहाई विधायक एकजुट होने जरुरी हैं। उत्तराखंड में कांग्रेस के 19 विधायक जीतकर आए हैं। इस तरह से 13 विधायक टूटने पर ही विधायकी बची रहेगी।

कांग्रेस के 10 विधायकों की नाराजगी की खबरें
कांग्रेस में प्रदेश अध्यक्ष करन माहरा, नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य और उपनेता प्रतिपक्ष भुवन कापड़ी के ताजपोशी के बाद से बगावत बढ़ती जा रही है। सबसे पहले खुलकर नाराजगी नेता प्रतिपक्ष रहे प्रीतम सिंह की सामने आई। प्रीतम सिंह ने खुलकर प्रदेश प्रभारी और राष्ट्रीय संगठन महामंत्री के खिलाफ मोर्चा खोला हुआ है। जिससे प्रीतम के कांग्रेस छोड़ने की खबरें सबसे ज्यादा वायरल हो रही हैं। प्रीतम का प्रकरण थमा ही नहीं तब तक कांग्रेस के 10 विधायकों की नाराजगी की खबरें सामने आ चुकी है। इनमें हरीश धामी, मनोज तिवारी, मदन सिंह बिष्ट, राजेंद्र भंडारी, ममता राकेश, विक्रम सिंह नेगी, मयूख महर, खुशाल सिंह अधिकारी विधायकों के नाम प्रमुखता से लिए जा रहे हैं। इतना ही नहीं इन विधायकों की देहरादून में बैठक करने की भी खबर है। लेकिन इस बार विधायक जो भी कदम उठाएंगे उसमें इस बात का ध्यान दिया जाएगा कि कम से कम विधायकी पर असर न पड़े। इसके लिए अधिक से अधिक विधायकों का समर्थन जुटाने की कोशिश की जा रही है। हालांकि अधिकतर जानकार इसे कांग्रेसी विधायकों की प्रेशर पॉलिटिक्स बता रहे हैं। जिसमें नेता प्रतिपक्ष रहे प्रीतम सिंह का नाम सबसे पहले लिया जा रहा है। अगर हाईकमान नेता प्रतिपक्ष पर फेरबदल कर ले तो इस ये विरोध के सुर यहीं रुक सकते हैं। उत्तराखंड के वरिष्ठ पत्रकार जय सिंह रावत भी इसे कांग्रेसी विधायकों का प्रेशर पॉलिटिक्स करार दे रहे हैं। उनका कहना है कि नाराज विधायकों का भाजपा में क्या भविष्य है। ये जानना पहले जरुरी है साथ ही अगर इन विधायकों को दोबारा चुनाव लड़ना पड़े तो क्या चुनाव जीतेंगे। ऐसे में ये सब आसान नहीं है।
क्या था 2016 का प्रकरण
जो प्रकरण कांग्रेस में इन दिनों चल रहा है ऐसा ही 2016 में हुआ था जब हरीश रावत सरकार से नाराज होकर कांग्रेस के 9 विधायकों ने सरकार से बगावत कर दी थी। उस समय विजय बहुगुणा, हरक सिंह रावत, सुबोध उनियाल, उमेश शर्मा, शैलारानी रावत, शैलेंद्र मोहन सिंघल, प्रदीप बत्रा, कुंवर प्रणव चैंपियन, अमृता रावत शामिल थी। इस पूरे प्रकरण में हरक सिह सूत्रधार रहे थे। तब इन सभी विधायकों को अपनी विधायकी से हाथ धोना पड़ा था। सतपाल महाराज इस प्रकरण से पहले ही भाजपा ज्वाइन कर चुके थे। बाद में 2017 में हुए विधानसभा चुनाव में हरक सिंह,सुबोध उनियाल, उमेश शर्मा, प्रदीप बत्रा, कुंवर प्रणव चैंपियन ही चुनाव जीतकर आए।












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