पीएम मोदी की पिथौरागढ़ यात्रा, जानिए लोकसभा चुनाव से पहले एक साथ कितने मिशन होंगे पूरे
PM narendra Modi visit to Pithoragarh प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अक्टूबर में उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले की यात्रा पर आ रहे हैं। जिसको लेकर तैयारियां शुरू हो गई है। ऐसे में पीएम के पिथौरागढ़ दौरे के सियासी मायने भी टटोले जाने लगे हैं। पीएम मोदी के पिथौरागढ़ दौरे को लोकसभा चुनाव से जोड़ा जा रहा है।

इससे पहले पीएम केदारनाथ व बद्रीनाथ धाम के दौरे पर उत्तराखंड आ चुके हैं। लेकिन इस बार पिथौरागढ़ दौरे को काफी अहम माना जा रहा है। यहां से पीएम एक विजिट से कई निशाने लगाने जा रहे हैं। अभी तक जो जानकारी मिली है उस हिसाब से पीएम 11 अक्तूबर को नारायण आश्रम में विश्राम करेंगे। 12 अक्तूबर को वह चीन सीमा पर स्थित व्यास घाटी के ज्योलिकांग पहुंच आदि कैलाश के दर्शन करेंगे।
इसके साथ ही वह स्थानीय ग्रामीणों से वार्ता भी करेंगे। उसी दिन वह पिथौरागढ़ में जनसभा को भी संबोधित कर सकते हैं। इस बीच पीएम का वाइब्रेंट विलेज गूंजी के लोगों से मुलाकात कर सकते हैं। जो कि पर्यटन के लिहाज से सबसे अहम योजना है।
पीएम बनने के बाद से मोदी का उत्तराखंड दौरा हर बार खास रहता है। चुनाव से पहले भी पीएम उत्तराखंड में आध्यात्म और साधना करने जरुर आते हैं। इससे पहले केदारनाथ में पीएम ध्यान गुफा में समय बिता चुके हैं। इस बार पीएम मोदी धारचूला के नारायण आश्रम में ध्यान के साथ रात्रि प्रवास कर सकते हैं। ये आश्रम ध्यान, योग और साधना के लिए काफी प्रसिद्ध है। खास बात ये है कि इसे गुजराती ट्रस्ट चलाते हैं।
इसके अलावा पीएम मोदी के आश्रम में रूकने के बाद इसके पर्यटन से ओर अधिक जुड़ने की उम्मीद है। जिसे स्थानीय लोग भी पीएम के आने का इंतजार कर रहे हैं। इसके साथ ही पीएम ज्योलिकांग पहुंचकर आदि कैलाश के दर्शन भी कर सकते हैं। चीन सीमा पर सर्वाधिक ऊंचाई वाली गुंजी-ज्योलिंगकोंग सड़क का 40 किमी हिस्सा डामरीकृत सरकार की ओर से हाल ही में किया गया है। जिससे आदि कैलाश तक सड़क मार्ग से पहुंचना यात्रियों के लिए आसान हो गया है। जो कि सरकार की एक और बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।
साढ़े दस हजार फीट से लेकर साढ़े चौदह हजार फीट से अधिक की ऊंचाई पर स्थित गुंजी-ज्योलिंगकोंग सड़क चीन सीमा के समानांतर है। यह पूरी सड़क उच्च हिमालय में है। पीएम यहां पहुंचकर देश के साथ चीन और विश्व को एक बड़ा संदेश देने की कोशिश करेंगे। पीएम के प्रस्तावित दौरे को देखकर ही इस पर तेजी से काम हुआ है। सीमा पर सामरिक दृष्टि से भी यह बेहद महत्वपूर्ण सड़क है। केंद्र सरकार की सीमांत गांवों में वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम का धरातल पर क्या असर हुआ है और इससे स्थानीय लोगों को क्या फायदा हुआ है इसके लिए पीएम खुद गूंजी गांव के लोगों से मिल सकते हैं।
वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम से उत्तराखंड राज्य के सीमावर्ती इलाकों को विकास से जोड़ने की एक उम्मीद जगी है। उत्तराखंड राज्य की 675 किलोमीटर की सीमा पड़ोसी देश चीन और नेपाल से जुड़ी है। लेकिन सीमांत गांवों तक विकास न पहुंचना सरकार के लिए सबसे बड़ी चुनौती रहा है। केंद्र सरकार के वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम के तहत पिथौरागढ़ के गुंजी गांव को शामिल किया गया है। जो कि चीन सीमा के नजदीक बसा है। इस लिहाज से पीएम का पिथौरागढ़ के गूंजी गांव के लोगों से मिलना पर्यटन की योजनाओं के लिहाज से भी खास माना जा रहा है।
कुल मिलाकर पीएम मोदी की पिथौरागढ़ यात्रा एक तरफ आध्यात्म और योग,साधना की खोज है तो वहीं सीमा पर सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण कार्य का अवलोकन और वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम से पर्यटन और विकास कार्यों को भी बारीकी से निरीक्षण करने के लिहाज से अहम माना जा रहा है। जिससे पिथौरागढ़ पहुंचकर पीएम लोकसभा चुनाव के लिए भी एक मजबूत नींव खड़ी कर कर सकते हैं।












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