पंचायत क्या किसी भी चुनाव में नहीं करेंगे वोट, मुखबा गांव-गंगोत्री के तीर्थ पुरोहितों ने क्यों उठाया ये कदम
Panchayat chunav: मां गंगा का शीतकालीन प्रवास मुखबा गांव, पर्यटन के साथ ही चीन बॉर्डर से सटा होने की वजह से सेना के लिए भी काफी अहम है। मुखबा गांव का अपना एक पौराणिक और धार्मिक महत्व है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी मुखबा गांव आकर इसकी सुंदरता और महत्व को स्वीकारा।
शीतकाल यात्रा को बढ़ावा देने के लिए पीएम मोदी ने यहां आकर मां गंगा के दर्शन किए। पीएम मोदी के आने से पहले प्रशासन की ओर से पूरे गांव का कायाकल्प भी किया गया। जिसके बाद से ग्रामीणों ने पीएम मोदी का धन्यवाद भी किया।

इस बीच अब पंचायत चुनाव का कार्यक्रम जारी हुआ लेकिन मुखबा गांव में एक भी व्यक्ति ने नामांकन नहीं कराया। सभी उम्मीदवारों ने एक मत में चुनाव बहिष्कार का ऐलान किया। इसके लिए ग्रामीणों ने एक संघर्ष समिति का भी गठन किया। मुखबा गांव के सेमवाल परिवार ही गंगोत्री धाम के तीर्थ पुरोहित हैं। ऐसे में तीर्थ पुरोहितों ने गंगोत्री धाम में मां गंगा की शपथ लेते हुए एक बड़ा निर्णय लिया।
तीर्थ पुरोहितों ने ऐलान किया कि मुखबा-जांगला मोटर मार्ग का जब तक निर्माण नहीं हो जाता, कोई भी तीर्थ पुरोहित, मुखबा गांव के ग्रामीण किसी भी चुनाव में मतदान नहीं करेंगे। सभी ने एक सुर में कहा कि रोड नहीं तो वोट नहीं। इसके साथ ही
मुखबा निवासी और तीर्थ पुरोहित सुभाष सेमवाल ने आज जानकारी देते हुए बताया कि जिलाधिकारी और वन विभाग के अधिकारियों ने प्रस्तावित सड़क और गांव का आज जायजा लिया है। जिनको ग्रामीणों ने बता दिया है कि ये विरोध आगामी विधानसभा चुनाव 2027 और लोकसभा 2029 तक जारी रहेगा अगर सड़क का निर्माण नहीं होता है।
उन्होंने बताया कि वह कई दशकों से मुखबा -जांगला मोटर मार्ग के निर्माण की मांग कर रहे हैं, लेकिन आज भी उनकी तक उनकी मांग पूरी नही हो पाई है। उनका कहना है कि सड़क का निर्माण चारधाम यात्रा के दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण है। साथ ही मार्ग के बनने से गांव के लोगों को भी फायदा होगा। उन्होंने कहा कि सड़क निर्माण की पैरवी पूर्व में सीडीएस स्व. बिपिन रावत ने भी की थी। शीतकाल में गंगोत्री हाईवे पर अधिक बर्फ रहती है। इसलिए सेना की आवाजाही के लिए इस मोटर मार्ग का निर्माण भी आवश्यक है।
तीर्थ पुरोहित डॉ सत्येंद्र सेमवाल ने बताया कि मां गंगा की उत्सव डोली इसी पैदल मार्ग से गुजरती है। जिससे काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। सड़क बन जाने से मां गंगा की उत्सव डोली को धूमधाम से बड़े स्तर पर आयोजन के साथ लाया और ले जाया जा सकता है। छह किमी. लंबे इस मार्ग के निर्माण के लिए कई बार ग्रामीण विरोध दर्ज करा चुके हैं।
बता दें कि हर्षिल-मुखबा-जांगला मोटर मार्ग स्वीकृति के 41 साल बाद भी अधर में लटका हुआ है। किसी तरह 37 साल बाद मुखबा तक तो सड़क पहुंच गई, लेकिन इससे आगे जांगला तक की सड़क ईको सेंसिटिव जोन के पेच में फंस कर रह गई है। वर्ष 1978-79 में हर्षिल से जांगला तक 7.75 किमी सड़क शासन ने स्वीकृत की थी। वर्ष 2015-16 में मुखबा तक ही बन पाई।












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