जोशीमठ के बाद अब मसूरी से आई डराने वाली खबर, मुख्य सड़क धंसने और कई घरों-दुकानों में दरारों से दहशत
पहाड़ों की रानी और मुख्य पर्यटक स्थल मसूरी के लंढौर में मुख्य सड़क धंसने और कई घरों दुकानों में दरारों से दहशत हो गई है। धंसाव क्षेत्र में सभी तरह के निर्माण कार्यों पर रोक लगा दी है।

उत्तराखंड के जोशीमठ में भू धंसाव की समस्या सामने आने के बाद से प्रदेश के कई दूसरे इलाकों में दरारें और धंसाव की खबरें आने लगी हैं। इस बीच पहाड़ों की रानी और मुख्य पर्यटक स्थल मसूरी के लंढौर में मुख्य सड़क धंसने और कई घरों दुकानों में दरारों से दहशत हो गई है। मसूरी विधायक और कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी ने प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर धंसाव क्षेत्र में सभी तरह के निर्माण कार्यों पर रोक लगा दी है। इसके साथ ही भू वैज्ञानिक बुलाने और ट्रीटमेंट के लिए कार्ययोजना तैयार करने को कहा गया है।
सड़क में दिन प्रतिदिन धंसाव हो रहा, बाजार के कई घरों दुकानों में दरारें
काबीना मंत्री और मसूरी विधायक गणेश जोशी ने मसूरी स्थित लंढौर बाजार में भू-धसाव को देखते हुए सड़क का मौके पर जाकर स्थलीय निरीक्षण किया। मौका मुआयना के दौरान स्थानीय निवासियों द्वारा मंत्री जोशी को अवगत कराया कि मसूरी स्थित लंढौर बाजार में भू-धसाव के कारण सड़क में दिन प्रतिदिन धंसाव हो रहा है और लंढौर बाजार के कई घरों दुकानों में दरारें पड़ रही है। जिसे क्षेत्र वासियों में चिंता बनी हुई है। मंत्री जोशी ने मौके पर मौजूद अधिकारियों को क्षेत्र के परीक्षण के निर्देश दिए। ओर इस मामले में उच्च अधिकारियों और मुख्यमंत्री से वार्ता करने की बात कही। मंत्री जोशी ने कहा मसूरी के लंढौर बाजार में किन कारणों से यह घटित हो रहा है।भविष्य के लिए खतरा ना हो उसकी रोकथाम और कैसे इसे रोका जाए इसके लिए भू-वैज्ञानिक को बुलाकर इसका परीक्षण किया जा रहा है । उन्होंने कहा आगे अभी भू- वैज्ञानिकों की टेक्निकल रिपोर्ट देने के बाद ही उस आधार पर कार्रवाई की जायेगी।
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30 साल से लंढौर क्षेत्र में सड़क धंस रही
मसूरी में लंढौर चौक से कोहिनूर बिल्डिंग तक करीब 100 मीटर सड़क का हिस्सा पिछले 30 साल से धंस रहा है, जिसको लेकर शासन-प्रशासन के स्तर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि करीब 30 साल से लंढौर क्षेत्र में सड़क धंस रही है। हर बार यहां सीसी सड़क निर्माण कराया जाता है। लेकिन इसके कारणों के बारे में किसी तरह की गंभीरता नहीं दिखाई गई है। इसके उलट लंढौर बाजार के साउथ रोड क्षेत्र में लगातार नए भवन बनाए जा रहे हैं। जिससे इस समस्या के बढ़ने की आशंका है। लंढौर बाजार क्षेत्र के में अधिकांश पुराने बहुमंजिला भवन हैं। जिनके कई मालिक हैं, जिस कारण इनकी मरम्मत नहीं हो पा रही है। यहां के पुराने भवन व दुकानें नजूल की भूमि पर बने हैं, जो अभी तक फ्रीहोल्ड नहीं हो पाई है, जिस कारण इन जीर्णशीर्ण भवनों की मरम्मत नहीं हो पा रही है। साथ ही यहां पानी की निकासी की भी कोई ठोस व्यवस्था नहीं है, जिससे वर्षा का पानी पुराने भवनों की नींव में समा जाता है। जिससे भवनों की नींव और सड़क कमजोर हो रही है। सरकार ने मसूरी के साढे़ 350 से अधिक भवनों को गिरासू घोषित किया है, लेकिन अभी तक इनके ट्रीटमेंट या पुर्निर्माण की कोई पहल नहीं की है। जबकि मसूरी भूकंपीय सेंसिटिव जोन में आता है।












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