लोकसभा चुनाव से पहले धामी सरकार के एक और मास्टरस्ट्रोक की तैयारी, 7 साल से अटका है मामला
उत्तराखंड में धामी सरकार लोकसभा चुनाव से पहले एक और मास्टरस्ट्रोक की तैयारी में है। लोकायुक्त को लेकर धामी सरकार तेजी से कदम बढ़ाने जा रही है।
उत्तराखंड में धामी सरकार लोकसभा चुनाव से पहले एक और मास्टरस्ट्रोक की तैयारी में है। लोकायुक्त को लेकर धामी सरकार तेजी से कदम बढ़ाने जा रही है, जो कि भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस की नीति के तहत सरकार का बड़ा निर्णय हो सकता है। माना जा रहा है कि अंदरखाने इसके लिए तैयारी शुरू हो गई है।

नैनीताल उच्च न्यायालय ने उत्तराखंड सरकार को तीन महीने में लोकायुक्त की नियुक्ति करने के आदेश दिए हैं। ऐसे में धामी सरकार इसकी नियुक्ति को लोकसभा चुनाव से पहले कर सकती है। इसके लिए सबसे पहले मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय चयन समिति बनेगी जो लोकायुक्त की तलाश के लिए सर्च कमेटी का गठन करेगी।
दावा है कि सीएम की अध्यक्षता में लोकायुक्त व सदस्यों के चयन के लिए एक समिति बनाई जा रही है।
समिति में विधानसभा अध्यक्ष, नेता प्रतिपक्ष, उत्तराखंड हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश या उनके नाम देने पर हाईकोर्ट का कोई न्यायाधीश और राज्यपाल द्वारा दिए गए किसी विख्यात विधिवेत्ता को सदस्य बनाया जाना है। सबसे पहले चयन समिति का गठन होगा। इसके बाद समिति व्यक्तियों के नामों के पैनल तैयार करने के लिए एक सर्च कमेटी बनाएगी। चयन समिति बनने के बाद से 45 दिन के भीतर सर्च कमेटी का गठन हो जाना चाहिए।
सर्च कमेटी तीन गुना नामों की सिफारिश कर चयन समिति को भेजेगी। इस पूरी प्रक्रिया को दो से तीन महिनों में पूरा कर लिया जाएगा। ऐसे में हाईकोर्ट के आदेश का पालन होने के साथ ही इसका सरकार को लोकसभा चुनावा में भी फायदा हो सकता है। सीएम धामी सख्त एक्शन और कड़े कदम उठाने में सबसे आगे रहे हैं। नकल विरोधी कानून से लेकर धर्मांतरण और यूसीसी सभी मामलों में धामी पिछले मुख्यमंत्रियों से काफी आगे निकल गए हैं। ऐसे में माना जा रहा है कि धामी लोकसभा चुनाव से पहले एक बार फिर मास्टरस्ट्रोक मारने की तैयारी में है।
उत्तराखंड में पहली निर्वाचित कांग्रेस की सरकार में ही 2002 में लोकायुक्त का गठन हो गया था। पांच साल तक 2008 तक राज्य के पहले लोकायुक्त की जिम्मेदारी जस्टिस एचएसए रजा ने संभाली। उनके रिटायरमेंट के बाद जस्टिस एमएम घिल्डियाल राज्य के दूसरे लोकायुक्त बने। उनका कार्यकाल वर्ष 2013 तक रहा। भाजपा के पूर्व सीएम बीसी खंडूरी ने सशक्त लोकायुक्त बनाने का वादा किया और प्रक्रिया में तेजी लाई लेकिन इस बीच वे चुनाव हार गए।
कांग्रेस की ओर से विजय बहुगुणा और हरीश रावत सीएम रहे, हालांकि इस दौरान कोशिश हुई लेकिन अब तक इसका कोई फायदा नजर नहीं आया। पिछले करीब सात साल से नए लोकायुक्त की नियुक्ति नहीं हुई है। 2017 में मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के कार्यकाल में लोकायुक्त की नियुक्ति को लेकर विधानसभा में बिल पेश भी किया गया लेकिन इसे प्रवर समिति को भेज दिया। प्रवर समिति भी लोकायुक्त पर अपनी रिपोर्ट सौंप चुकी है।












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