Lok Sabha Elections 2024: उत्तराखंड में कांग्रेस भाजपा से चुनावी रणनीति में पिछड़ी, ये है वजह
पीएम मोदी के पिथौरागढ़ दौरे के बाद अब उत्तराखंड में भाजपा पूरी तरह से चुनावी मोड में आ गई है। एक तरफ भाजपा प्रदेश में लंबे समय से चुनावी माहौल बनाने में जुटी है। वहीं उत्तराखंड कांग्रेस की तरफ से किसी तरह की कोई पहल अब तक नजर नहीं आई है। उत्तराखंड में कांग्रेस के बड़े चेहरे दूसरे राज्यों में विधानसभा चुनाव में व्यस्त नजर आ रहे हैं।

उत्तराखंड में कांग्रेस के अध्यक्ष करन माहरा के अलावा पूर्व सीएम हरीश रावत, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह, गणेश गोदियाल, हरक सिंह जैसे बड़े नाम है। जिनके कंधों पर 2024 का चुनावी समर है। लेकिन जिस तरह करन माहरा को छोड़कर कोई भी बड़ा चेहरा फिलहाल प्रदेश में सक्रिय नहीं है। उससे लगता है कि आने वाले दिनों में कांग्रेस के लिए ये चुनाव आसान नहीं होगा।
अब बात सीनियर नेताओं की जो कि आजकल कहां और किस भूमिका में नजर आ रहे हैं। पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत हरिद्वार सीट पर सक्रिय नजर आ रहे हैं। साथ ही वे इसी सीट से चुनाव लड़ने की इच्छा जता चुके हैं। ऐसे में साफ है कि हरीश रावत के लिए हरिद्वार से बाहर आना आसान नहीं लग रहा। वरिष्ठ नेता प्रीतम सिंह छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव में वरिष्ठ पर्यवेक्षक की जिम्मेदारी संभाल रहे है। ऐसे में प्रीतम
17 नवंबर तक छत्तीसगढ़ में व्यस्त रहेंगे। चार अन्य राज्यों मिजोरम, मध्य प्रदेश, राजस्थान और तेलंगाना के चुनाव में भी प्रीतम प्रचार प्रसार करेंगे। पूर्व पीसीसी अध्यक्ष गणेश गोदियाल एआईसीसी की राष्ट्रीय कार्यसमिति में है। इसके अलावा राजस्थान में चुनाव स्क्रीनिंग कमेटी में बतौर सदस्य उन्हें शामिल किया गया है। वो भी पांच राज्यों में सक्रिय रहने वाले हैं। हरक सिंह रावत राजस्थान में पार्टी के प्रचार प्रसार में जुटे हैं।
उत्तराखंड कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष करन माहरा और नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य के कंधों पर ही पूरे प्रदेश की जिम्मेदारी नजर आ रही है। भाजपा की बात करें तो पीएम मोदी से पहले गृह मंत्री अमित शाह, यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ प्रदेश में चुनावी माहौल को हवा दे चुके हैं। जिससे भाजपा के कार्यकर्ता और संगठन के पदाधिकारियों में नया जोश नजर आ रहा है।
जबकि प्रभारी और पार्टी संगठन से जुड़े कई बड़े नेता उत्तराखंड में बैठकें लेने के साथ फीडबैक भी ले चुके हैं। उधर कांग्रेस के प्रभारी देवेंद्र यादव और अन्य सीनियर नेता लंबे समय से प्रदेश में किसी बैठक या कार्यक्रम में नजर नहीं आए हैं।












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