जानिए कौन हैं भाजपा नेता अजेंद्र अजय, सोशल मीडिया पोस्ट से मचा हड़कंप, संन्यास के विकल्प की क्या बताई वजह
Ajendra Ajay उत्तराखंड में भाजपा के वरिष्ठ नेता और बदरी-केदार मंदिर समिति (बीकेटीसी) के पूर्व अध्यक्ष अजेंद्र अजय की सोशल मीडिया पोस्ट से सियासी हलचल तेज हो गई है। अजेंद्र अजय का कहना है कि उत्तराखंड में वर्तमान में जिस प्रकार का राजनीतिक परिदृश्य देखने को मिल रहा है, उससे राजनीति के प्रति मोहभंग सा होता जा रहा है।
उन्होंने कहा कि ऐसी परिस्थितियों में राजनीतिक जीवन से संन्यास लेने के अतिरिक्त कोई अन्य विकल्प नहीं दिखाई पड़ता है। अजेंद्र अजय की इस पोस्ट से प्रदेश की सियासत में हड़कंप मचा हुआ है। बता दें कि अजेंद्र अजय कई बार प्रदेश के मुद्दों पर बेबाक राय रखते हैं।

अजेंद्र अजय केदारनाथ सोना विवाद को लेकर भी सुर्खियों में आ चुके हैं। यह विवाद केदारनाथ मंदिर के गर्भगृह में सोने की परत चढ़ाने से जुड़ा है। शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने आरोप लगाया कि केदारनाथ मंदिर के गर्भगृह से 228 किलोग्राम सोना गायब हो गया है। पहले यह आरोप भी लगा था कि सोने की जगह तांबा (पीतल) लगाया गया है।
तब बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है। अजेंद्र अजय ने कहा था कि यह कार्य दानदाताओं (donors) द्वारा कराया गया था और सोना मौजूद है। इसके बाद जांच में इन आरोपों को सिरे से खारिज किया गया।
अंकिता भंडारी प्रकरण में भी अजेंद्र अजय ने सीबीआई जांच की मांग की थी, जिसके बाद से उनके पार्टी की लाइन से बाहर जाकर अपनी बात रखने को लेकर विवाद खडा हो चुका है। तब सोशल मीडिया में उनको पार्टी से बाहर करने की खबरें भी सामने आ चुकी है। हालांकि इसके बाद अजेंद्र अजय ने भाजपा के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन से भी मुलाकात की थी। जिसके बाद से इन सभी मसलों पर विराम लग गया। लेकिन अब अजेंद्र अजय की नई पोस्ट से हलचल तेज है।
उन्होंने लिखा कि-
उत्तराखंड में वर्तमान में जिस प्रकार का राजनीतिक परिदृश्य देखने को मिल रहा है, उससे राजनीति के प्रति मोहभंग सा होता जा रहा है। मोदी जी ने कहा था कि "तीसरा दशक उत्तराखंड का होगा।"
हम जैसे कार्यकर्ताओं और देवभूमि की जनता ने कभी कल्पना भी नहीं की थी। छात्र जीवन से राष्ट्रवाद और सनातन के प्रति अगाध आस्था, विश्वास और समर्पण के कारण कई बार कई आरोप भी झेले। इन आरोपों से कभी व्यथित नहीं हुआ। व्यथित होने की परिस्थितियां तब उत्पन्न हो रही हैं, जब हम विपरीत कार्यों के साथ दिखाई पड़ रहे हैं और उनके प्रति हमारा मौन समर्थन प्रकट हो रहा है। ऐसी परिस्थितियों में राजनीतिक जीवन से संन्यास लेने के अतिरिक्त कोई अन्य विकल्प नहीं दिखाई पड़ता है।
-
Nitish Kumar निर्विरोध JDU के अध्यक्ष चुने गए, फिर मिली पार्टी की कमान, कब मिला था पहली बार ये पद? -
धामी सरकार के 4 साल: सीएम ने गिनाईं उपलब्धियां, 3.76 लाख करोड़ निवेश, 30 हजार नौकरी, देहरादून का होगा कायाकल्प -
धामी सरकार के चार साल पूरे होने पर पीएम मोदी ने बधाई संदेश में कही बड़ी बातें, जानिए क्या -
Badshah Love Story: ‘टटीरी’ वाले रैपर बादशाह की दूसरी दुल्हन Isha Rikhi कौन हैं? कैसे परवान चढ़ा दूसरा इश्क? -
West Bengal Election 2026: बंगाल के 50% विधायक पर क्रिमिनल केस, 152 MLA करोड़पति, किस पार्टी का क्या रिकॉर्ड? -
VIDEO: BJP नेता माधवी लता ने एयरपोर्ट पर क्या किया जो मच गया बवाल! एयरपोर्ट अथॉरिटी से कार्रवाई की मांग -
Kerala EC-BJP Seal Row: केरल में ECI के डॉक्यूमेंट पर बीजेपी की मुहर, विवाद के बाद चुनाव आयोग ने दी सफाई -
Assam Chunav से पहले भाजपा को तगड़ा झटका, मौजूदा मंत्री कांग्रेस में हुईं शामिल, कौन है ये महिला नेता? -
Iran Vs America War: अमेरिका ने किया सरेंडर! अचानक ईरान से युद्ध खत्म करने का किया ऐलान और फिर पलटे ट्रंप -
Silver Rate Today: चांदी में हाहाकार! 13,606 रुपये की भारी गिरावट, 100 ग्राम से 1 किलो की कीमत जान लीजिए -
Gold Rate Today: ईरान जंग के बीच धराशायी हुआ सोना! 13,000 सस्ता, 18K और 22k गोल्ड की ये है कीमत -
Ravindra Kaushik Wife: भारत का वो जासूस, जिसने PAK सेना के अफसर की बेटी से लड़ाया इश्क, Viral फोटो का सच क्या?












Click it and Unblock the Notifications