जानिए क्या है नवाजुद्दीन सिद्दीकी की फिल्म ‘रौतू का राज’ का असली सच,उत्तराखंड के पनीर विलेज का क्या है कनेक्शन
नवाजुद्दीन सिद्दीकी की फिल्म 'रौतू का राज' 28 जून को Zee5 पर रिलीज हो चुकी है। थ्रिलर बेस्ड मूवी की पूरी शूटिंग उत्तराखंड के छोटे गांव रौतू की बेली में हुई है।
उत्तराखंड के छोटे से गांव रौतू की बेली को पनीर विलेज कहा जाता है। पूरी शूटिंग इसी गांव के आसपास पहाड़ों में की गई है। फिल्म के कुछ हिस्से मसूरी में भी शूट किए गए हैं।

'रौतू का राज' की कहानी एक स्कूल की वार्डन की मौत पर आधारित है। जिसे स्कूल प्रबंधन सामान्य मौत बताता है। लेकिन नवाजुद्दीन सिद्दीकी जो पुलिस इंस्पेक्टर की भूमिका में है, वे इस मौत को हत्या मानकर छानबीन शुरू करते हैं और सबूत इकट्टा कर मौत का खुलासा करते हैं। हालांकि मूवी का ऐंड पार्ट काफी दिलचस्प है।
मूवी कई जगह दर्शकों में रोमांच और कुछ नया पन लाने की कोशिश करती नजर आ रही है। इसके साथ ही पहाड़ों की खूबसूरती ने मूवी में चार चांद लगा दिए हैं। जिस तरह की मूवी की स्क्रिप्ट है, उसी तरह की लोकेशन इस गांव के आसपास मौजूद हैं। जो कि दर्शकों को 2 घंटे तक बांधे रखती है। इसके साथ ही फिल्म के किरदार भी गढ़वाली और स्थानीय लोगों की तरह ही जीवित हुए हैं।
आइए अब जानते हैं रौतू की बेली गांव के बारे में जिस जगह के नाम पर मूवी का नाम रखा गया है। जानते हैं इस गांव का असली राज क्या है। मसूरी से करीब 20 किमी की दूरी पर मौजूद है रौतू की बेली गांव। जिसे अब लोग पनीर विलेज के नाम से जानते हैं।
यहां से लोग पनीर खरीदकार दूर दराज इलाकों तक ले जाते हैं। 250 परिवारों वाले इस गांव में पनीर का प्रोडक्शन इतना अधिक है कि गांव का नाम ही पनीर विलेज पड़ गया। यहां निर्मित पनीर की डिमांड टिहरी, उत्तरकाशी, देहरादून, मसूरी से लेकर दिल्ली तक रहती है।
बताया जाता है कि सबसे पहले 1980 में यहां के एक ग्रामीण ने पनीर बनाना शुरू किया और मौजूदा दौर में यहां हर घर में पनीर बनता है। खास बात ये है कि रौतू की बेली से लेकर भवान गांव तक अब लोग पनीर का उत्पादन करने लगे हैं। जो कि आर्थिकी का एक बेहतर संसाधन बन गया है।












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