जानिए कैसा होगा उत्तराखंड में धामी सरकार का भू-कानून, हिमाचल की तर्ज पर या होंगे ये बदलाव
यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू करने के बाद धामी सरकार प्रदेश में सख्त भू कानून को लागू करने की तैयारी में है। इसके लिए सीएम धामी ने अगले बजट सत्र में भू कानून को लेकर विधेयक लाने की बात की है। जिसके बाद आम जनों में इस बात को लेकर उत्सकुता बढ़ गई है कि आखिर उत्तराखंड का भू कानून कैसा होगा।
सीएम धामी ने जिस तरह के संकेत दिए हैं, उससे साफ है कि सरकार हिमाचल की तर्ज पर सख्त भू कानून लाने जा रही है। सीएम धामी ने साफ किया कि जरुरत पड़ी तो सरकार पिछली सरकार के लिए गए फैसलों को बदल सकती है।

जिससे जमीनों के गलत तरीके से खरीद फरोख्त पर रोक लग सके। भाजपा की पूर्व त्रिवेंद्र रावत सरकार में लिए गए फैसले के बाद से आम जन हिमाचल की तर्ज पर सख्त भू कानून लाने की मांग कर रहे हैं। उत्तराखंड में जमीन खरीद को लेकर एनडी सरकार ने पाबंदी लगाने की शुरुआत की थी। इसके बाद खंडूड़ी सरकार ने इस पर सख्ती की थी।
एनडी तिवारी सरकार ने की शुरुआत
वर्ष 2003 में एनडी तिवारी की सरकार ने उत्तर प्रदेश जमींदारी उन्मूलन और भूमि व्यवस्था सुधार अधिनियम, 1950 (अनुकूलन एवं उपांतरण आदेश 2001) अधिनियम की धारा-154 में संशोधन कर बाहरी व्यक्ति के लिए आवासीय उपयोग के लिए 500 वर्गमीटर भूमि खरीदने को ही अनुमति देने का प्रतिबंध लगाया। साथ ही कृषि भूमि की खरीद पर सशर्त प्रतिबंध लगा दिया था।
किए थे कड़े प्रावधान
12.5 एकड़ तक कृषि भूमि खरीदने की अनुमति देने का अधिकार जिलाधिकारी को दिया गया था। चिकित्सा, स्वास्थ्य, औद्योगिक उपयोग के लिए भूमि खरीदने के लिए सरकार से अनुमति लेना अनिवार्य किया गया था।
खंडूरी सरकार ने की ओर सख्ती
बीसी खंडूड़ी की सरकार ने वर्ष 2007 में भू-कानून में संशोधन कर उसे कुछ और सख्त बना दिया। खंडूड़ी सरकार ने आवासीय मकसद से 500 वर्गमीटर भूमि खरीद की अनुमति को घटाकर 250 वर्गमीटर कर दिया। इसके बाद 2017-18 में त्रिवेंद्र सरकार ने कानून में संशोधन कर, उद्योग स्थापित करने के उद्देश्य से पहाड़ में जमीन खरीदने की अधिकतम सीमा और किसान होने की बाध्यता खत्म कर दी थी। साथ ही, कृषि भूमि का भू-उपयोग बदलना आसान कर दिया था।
धामी ने बनाई कमेटी
पहले पर्वतीय फिर मैदानी क्षेत्र भी इसमें शामिल किए गए थे। भू-कानून की मांग तेज हुई तो वर्ष 2022 में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पूर्व मुख्य सचिव सुभाष कुमार की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया था, जिसने पांच सितंबर 2022 को अपनी रिपोर्ट सौंप दी थी।
सशक्त भू-काननू को लेकर 23 संस्तुतियां
समिति ने सशक्त भू-काननू को लेकर 23 संस्तुतियां दीं थीं। सरकार ने समिति की रिपोर्ट और संस्तुतियों के अध्ययन के लिए उच्च स्तरीय प्रवर समिति का गठन भी किया हुआ है। धामी सरकार ने कृषि और उद्यानिकी के लिए भूमि खरीद की अनुमति देने से पहले खरीदार और विक्रेता का सत्यापन करने के निर्देश भी दिए हुए हैं।
कैसा है हिमाचल का भू कानून
उत्तराखंड में पिछले कुछ वर्षों से लगातार हिमाचल प्रदेश जैसा सख्त भू-कानून बनाने की मांग हो रही है। हिमाचल में जमीन खरीद का टेनेंसी एक्ट लागू है। इस एक्ट की धारा-118 के तहत कोई भी गैर हिमाचली व्यक्ति हिमाचल में जमीन नहीं खरीद सकता है। अगर आप गैर हिमाचली हैं तो हिमाचल में जमीन खरीदने के लिए आप राज्य सरकार की इजाजत के बाद यहां गैर कृषि भूमि खरीद सकते हैं।












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