तेंदुए से बचने के लिए नदी में कूदा, इस तरह घने जंगल में खूंखार जानवरों के बीच कटी दो रातें
हरिद्वार, 22 नवंबर: 'मैन वर्सेज वाइल्ड' के एपिसोड देखकर हम-आप रोमांचित हो उठते हैं। लेकिन, सोचिए अगर किसी शख्स के साथ सच में ऐसा हो जाए और उसके साथ टीवी क्रू भी ना हो तो उसपर क्या गुजरेगी। ऋषिकेश में काम करने वाले एक शख्स के साथ ऐसा ही हुआ है। उसे दो रातें घने जंगलों में भूखे-प्यासे पेड़ पर गुजारनी पड़ी हैं, जहां उसके आसपास मीलों दूर तक इंसान का नामो-निशान नहीं था। लेकिन, दाद देने लायक बात है कि वह शख्स हिम्मत नहीं हारा और तबतक जीने का हौसला कम नहीं पड़ने दिया, जबतक कि उसके पास उसे बचाने गई रेस्क्यू टीम पहुंच नहीं गई। यह सच्ची घटना है, जिसकी खौफनाक यादों से उबर पाना शायद ही उसके लिए कभी संभव होगा। लेकिन, राहत की बात है कि उसे खरोंच तक नहीं आई है।

'मैन वर्सेज वाइल्ड' की सच्ची घटना
'मैन वर्सेज वाइल्ड' के पॉपुलर टीवी शो जैसी घटना ऋषिकेश में रहने वाले एक शख्स के साथ गुजरी है। उस शख्स ने घने जंगल में खूंखार जानवरों के बीच दो रातें कैसे काटी हैं, यह तो वही जानता है। लेकिन, यह एक ऐसी घटना है, जो किसी के भी होश ठिकाने ला सकता है। लेकिन, अच्छी बात ये है कि जिंदगी जीने की ख्वाहिश ने उस इंसान का हौसला इतना बुलंद रखा कि वह भूखे-प्यासे रहकर भी तमाम मुसीबतों से बचकर जंगल से सुरक्षित बाहर निकल आया है। दरअसल, ऋषिकेश में बैलून बेचने वाले अनुराग सिंह नाम का एक इंसान यूपी में अपने घर बिजनौर की ओर जा रहा था। 30 साल का वह शख्स जब गुरुवार को राजाजी टाइगर रिजर्व के चिल्ला इलाके में पहुंचा तो वहां शाम के समय में गंगा और जंगल की खूबसूरती की जुगलबंदी देखकर ठहर गया। उसने फौरने अपना मोबाइल फोन निकाला और उस प्राकृतिक सौंदर्य के बीच सेल्फी लेने का मोह नहीं छोड़ पाया। लेकिन, ठीक इसी दौरान उसके साथ जो हुआ, उसके बाद वह काफी संघर्ष के बाद किसी तरह से मौत के मुंह से निकल पाया है।

नदी में बहकर घने जंगल में पहुंच गया
दरअसल, जब वह अपनी बाइक खड़ी कर मोबाइल से नदी को बैकग्राउंड में रखकर सेल्फी ले रहा था, तभी अचानक झाड़ियों से एक तेंदुआ निकला और उसपर झपट पड़ा। अनुराग ने कुछ नहीं सोचा और जान बचाने के लिए नदी में कूद गया। नदी के तेज बहाव में उसका बचना मुश्किल था। लेकिन, तभी संयोग से उसके हाथ एक लकड़ी का टुकड़ा आया और वह उससे चिपक गया। उसी के सहारे वह जंगल के उस इलाके में पहुंच गया, जहां चारों तरफ पानी भरा था। बहुत बड़ा संयोग ये भी रहा कि उसके पास जो बैग था वह वॉटरप्रूफ था और उसके अंदर माचिस भी रखी थी।

दो रातें पेड़ पर काटी
अनुराग को रेस्क्यू करने वाली पुलिस टीम के एक अधिकारी प्रदीप रावत ने टीओआई को बताया है कि वॉटरप्रूफ बैग की वजह से माचिस गीली नहीं हुई थी। पानी में भींगने की वजह से वह ठिठुर रहा था। उसने खुद को गर्म रखने के लिए अलाव जलाया और जंगली जानवरों से बचने के लिए पेड़ पर चढ़ गया। पहली रात किसी तरह पेड़ पर गुजारने के बाद, दूसरे दिन सुबह वह इंसानी बस्ती की तलाश में निकल पड़ा। रावत के मुताबिक, 'उसने हमें बताया कि वह पूरे दिन जंगल में चलता रहा, लेकिन उसे बाहर निकलने का कोई रास्ता नहीं मिला। लाचार होकर उसने दूसरी रात भी जंगल में काटी, अलाव जलाया और पेड़ पर चढ़कर सो गया।' रावत हरिद्वार में सप्तऋिष चौकी के इंचार्ज हैं।

तीसरे दिन हरिद्वार में गंगा की दूसरी छोड़ पहुंचा था
अगले दिन सुबह यानी शनिवार को उस व्यक्ति ने फिर से जंगल में भटकना शुरू किया और आखिरकार किसी तरह से हरिद्वार के शादानी घाट की दूसरी छोड़ तक पहुंचने में सफल हो गया। लेकिन, वह फिर भी आबादी से बहुत दूर था। उसने फिर से खुद को गरम रखने के लिए अलाव जलाया और यह उम्मीद बनाए रखी कि धुआं देखकर कोई न कोई उसे बचाने के लिए जरूर आएगा। वह भाग्यशाली था कि जंगल से निकल रहे धुएं पर पुलिस वालों की नजर पड़ गई। रावत के मुताबिक, 'हम राफ्ट से उस इलाके में पहुंचे जहां से धुआं आ रहा था और देखा कि वह बड़ी ही बेताबी से हाथ हिला रहा था और खुद को बचाने के लिए के लिए कह रहा था।'

मुसीबत झेली लेकिन खरोंच तक नहीं आया
पुलिस वाले ने बताया कि 'जब जल पुलिस उसके पास पहुंची तो वह कांप रहा था और भूखा था। हमने कपड़े बदलने में उसकी मदद की और खाने के लिए दिया।' वह दहशत से पूरी तरह से हिल चुका था, लेकिन वैसे वह सुरक्षित था और उसे कोई नुकसान नहीं हुआ था। फिर उसे उसके घर बिजनौर भेज दिया गया। उसकी जीने की ललक काम कर गई थी और उसने हौसला बनाए रखा तभी अपने जीवन के इतने बड़े संकट को अकेले झेल गया। (तस्वीरें- सांकेतिक)












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