जमरानी बांध परियोजना: यूपी और उत्तराखंड के बीच होगा एमओयू, इस तरह दोनों राज्यों के लिए है फायदे का सौदा
जमरानी बांध परियोजना को केंद्रीय कैबिनेट की आर्थिक मामलों की कमेटी ने अपनी मंजूरी दे दी है। जिससे अब परियोजना के बनने का रास्ता साफ हो गया है। इस परियोजना से उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश दोनों राज्यों को लाभ मिलेगा। परियोजना के बन जाने से उत्तर प्रदेश के कई जिलों को भी पेयजल और सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध होगा। जिससे 10 प्रतिशत में पांच प्रतिशत राशि के लिए यूपी के साथ एमओयू किया जाएगा।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि इस बांध परियोजना के निर्माण से हल्द्वानी व आसपास के क्षेत्र में पेयजल एवं सिंचाई की समस्या का हल होगा और विद्युत उत्पादन भी होगा। उत्तराखण्ड के नैनीताल में काठगोदाम से 10 किमी अपस्ट्रीम में गौला नदी पर जमरानी बांध (150.60 मी0 ऊंचाई) का निर्माण प्रस्तावित है।
परियोजना से लगभग 1,50,000 हेक्टेयर कृषि योग्य क्षेत्र सिंचाई सुविधा से लाभान्वित होगा, साथ ही हल्द्वानी शहर को वार्षिक 42 एमसीएम पेयजल उपलब्ध कराए जाने और 63 मिलियन यूनिट जल विद्युत उत्पादन का प्रावधान है। वर्ष 1975 से वित्त पोषण के अभाव में परियोजना का निर्माण प्रारम्भ नहीं हो सका था।
प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (वृहद एवं मध्यम ) के अन्तर्गत जमरानी बांध परियोजना के वित्त पोषण के लिए निवेश स्वीकृति और जल शक्ति मंत्रालय की स्क्रीनिंग कमेटी द्वारा स्वीकृति प्रदान की गई। भारत सरकार द्वारा 1730.20 करोड़ की स्वीकृति दी गई है। पीएमकेएसवाई में 90 प्रतिशत ( केन्द्रांश), उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश का संयुक्त रूप से 05-05 प्रतिशत ( राज्यांश) के अन्तर्गत प्रदान किया जाना प्रस्तावित है।
जमरानी बांध परियोजना से प्रभावित 351.55 हेक्टेयर वन भूमि सिंचाई विभाग को हस्तांतरित करने के लिए वन भूमि (स्टेज-2 ) अंतिम स्वीकृति पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा माह जनवरी 2023 में प्रदान कर दी गयी है।
इससे प्रस्तावित बांध निर्माण की राह और आसान होगी तथा परियोजना प्रभावित परिवारों के विस्थापन के लिए प्राग फार्म की प्रस्तावित 300.5 एकड़ भूमि का प्रस्ताव दिनांक 18 मई 2023 को उत्तराखंड सरकार की कैबिनेट में पारित किया जा चुका है। प्रस्तावित भूमि को शीघ्र ही सिंचाई विभाग को हस्तांतरित किये जाने के लिए भी कार्यवाही गतिमान है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि लखवाड़ प्रोजेक्ट से भी उत्तराखंड के साथ ही हिमाचल, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, हरियाणा को पानी का लाभ मिलेगा। सभी राज्यों के मुख्यमंत्री इसकी अंतिम मंजूरी दे चुके हैं। लखवाड़ परियोजना के तहत उत्तराखंड देहरादून जिले के लोहारी गांव के पास यमुना नदी पर 204 मीटर ऊंचा कंक्रीट का बांध बनेगा।
बांध की जल संग्रहण क्षमता 330.66 एमसीएम होगी। इससे 33,780 हेक्टेयर भूमि की सिंचाई होगी। इसके साथ ही इससे यमुना बेसिन क्षेत्र वाले छह राज्यों में घरेलू तथा औद्योगिक इस्तेमाल और पीने के लिए 78.83 एमसीएम पानी उपलब्ध होगा। प्रोजेक्ट के तहत संग्रहित जल का बंटवारा यमुना के बेसिन क्षेत्र वाले छह राज्यों के बीच 12 मई 1994 को किये गये समझौते के अनुरूप होगा। इस प्रोजेक्ट से पैदा होने वाली बिजली पर सिर्फ उत्तराखंड का हक होगा।
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