Women's Day: यहां महिलाएं आत्मनिर्भर बनने के लिए बना रही खास चटनी,स्वाद ऐसा कि पीएम मोदी भी कर चुके तारीफ
आज अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस है। महिलाएं आज अपने दम पर अपनी अलग पहचान बना रही है। खासकर उद्यमी बनकर महिलाएं पुरूष के साथ कंधे से कंधा मिलाकर विशिष्ट पहचान बना रही हैं। पहाड़ में महिलाओं की जिदंगी आसान नहीं होती। रोजमर्रा की कठिन परिस्थितियों में कुछ हटके और ऐसा करना की देश दुनिया आपको जाने। ऐसा ही कुछ कमाल कर रही हैं, उत्तरकाशी की सुनीता रौतेला और उनकी टीम।

सुनौता रौतेला अपनी टीम के साथ सेब से निर्मित जेम, चटनी और जूस बना रही हैं। खास बात ये है कि इनके उत्पाद की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी तारीफ की और स्वतंत्रता दिवस पर दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम में विशेष मेहमान के तौर पर आमंत्रित किया।
उत्तराखंड के दूरस्थ हर्षिल, झाला क्षेत्र में उपला टकनौर किसान उत्पादक संगठन बना है। जो कि स्वरोजगार पर काम कर रहा है। इस संगठन में 132 लोग जुड़े हैं, खास बात ये है कि इस संगठन में करीब 100 महिलाएं जुड़ी हैं। जो कि एक साल से इससे जुड़कर अपना काम कर रही हैं।
इससे जुड़ी महिलाएं सेब की चटनी, जेम बनाती हैं। साथ ही आमिल स्थानीय उत्पाद से जूस बना रही हैं। महिलाओं ने सबसे पहले चटनी बनाकर पीएम नरेंद्र मोदी को भेजी। जो कि पीएम मोदी को काफी पसंद आया। जिस पर एक माह बाद इस समूह को पीएम मोदी की तरफ से एक प्रशंसनीय पत्र भी भेजा गया। पीएम मोदी ने महिलाओं की इस पहल की तारीफ की।
जिसके बाद इस बार स्वतंत्रता दिवस पर विशेष अतिथि के तौर पर आमंत्रित किया। सुनीता ने बताया कि वे अपने पति के साथ इस कार्यक्रम में शामिल हुई। काफी गर्व का विषय रहा, हालांकि वे कहती है कि इसमें सिर्फ उनकी ही भागीदारी नहीं है पूरे स्वयंसेवी महिलाओं की। जो अपने घर, खेती का काम भी करती हैं और स्वरोजगार के साथ आत्मनिर्भर भी बन रही हैं।
सुनीता रौतेला ने बताया कि इस क्षेत्र में सेब का अच्छा खासा उत्पादन होता है। लेकिन कई बार सेब खराब या सड़ने लगता है। ऐसे में इस छोटे से उद्योग के जरिए महिलाएं खास तरीके से जेम, चटनी बनाकर लोगों को इसका स्वाद चखा रही हैं।
इस सीजन में उन्होंने 4 से 5 लाख का उत्पाद तैयार किया। जो कि इस बार वे बढ़ाकर मुनाफा कम से कम एक लाख का टारगेट करना चाहती हैं। उनकी टीम में सुनीता रौतेला, दीपा रौतेला, उर्वशी रौतेला, प्रभा राणा समेत कई महिलाएं जुड़ी हैं। महिलाएं दिन भर अपनी खेतीबाड़ी और सेब के बगीचों में समय बिताती हैं। इसमें से समय निकालकर वे अपने आत्मनिर्भर वाले काम को समय देती हैं।












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