उत्तराखंड में आप, बसपा को छोड़कर 70 सीटों पर पहले ही बाहर हुए दूसरे दल, यूकेडी को भी नहीं मिले 70 प्रत्याशी
आप और बसपा ने उतारे सभी सीटों पर प्रत्याशी
देहरादून, 29 जनवरी। उत्तराखंड के 22 साल के इतिहास में अब तक भाजपा, कांग्रेस ने ही सत्ता संभाली है। लेकिन 2002 से लेकर 2012 तक के चुनावों में तीसरे विकल्प और निर्दलीयों ने सरकार बनाने और चलाने में अहम भूमिका रही है। सिर्फ 2017 में भाजपा ने प्रचंड बहुमत की सरकार बनाई। इस बार 2022 के विधानसभा चुनाव में भी भाजपा, कांग्रेस में सीधी टक्कर नजर आ रही है। हालांकि आम आदमी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी ने सभी 70 सीटों पर प्रत्याशी तो उतारे हैं। लेकिन दोनों ही दल सरकार बनाने में किंगमेकर की भूमिका में रहेंगे या नहीं इसके लिए 10 मार्च तक का इंतजार करना पड़ेगा। जब रिजल्ट सबके सामने आएंगे। क्षेत्रीय दल उत्तराखंड क्रांति दल को तो 70 सीटों पर प्रत्याशी तक नहीं मिले हैं। जबकि समाजवादी पार्टी ने 30 सीटों पर प्रत्याशियों को मैदान में उतारा है।
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उत्तराखंड के विधानसभा चुनाव में पहली बार तीसरे विकल्प के तौर पर चुनावी मैदान में उतरी आम आदमी पार्टी प्रचार-प्रसार से लेकर हर मोर्चे पर भाजपा, कांग्रेस को टक्कर देने की कोशिश में जुटे हैं। इतना ही नहीं मुख्यमंत्री का चेहरा भी आप ने ही सबसे पहले कर्नल अजय कोठियाल के रुप में उत्तराखंड में जनता के सामने रखा है। हालांकि मीडिया सर्वे रिपोर्ट में आप को उत्तराखंड में ज्यादा सीटें मिलने की उम्मीद नहीं दिख रही हैं। ये बात अलग है कि आप ने सभी 70 सीटों पर प्रत्याशियों को मैदान में उतारा है। आप को तराई में कुछ सीटें मिलने की संभावना जताई जा रही है। इसके अलावा 2002 से 2012 तक उत्तराखंड की सियासत में बेहतर प्रदर्शन करने वाली बहुजन समाज पार्टी ने भी उत्तराखंड की 70 विधानसभा सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारे हैं। ये बात अलग है कि डिजीटल प्रचार-प्रसार में बसपा कहीं भी नजर नहीं आ रही है। लेकिन बहुजन समाज पार्टी के उत्तराखंड प्रदेश प्रभारी डॉ मेघराज ज़ोरवरे ने 70 विधानसभा सीटों में से 25 सीटों पर बहुजन समाज पार्टी के प्रत्याशी की जीत का दावा किया है और इस बार सरकार बनाने में बसपा की अहम भूमिका की बात कही है। बसपा को उम्मीद है कि उधम सिंह नगर, नैनीताल, हरिद्वार और देहरादून जिले में बहुजन समाज पार्टी लोगों को आश्चर्यचकित करेगी। सबसे हैरान करने वाली बात ये है कि उत्तराखंड की एक मात्र क्षेत्रीय दल उत्तराखंड क्रांति दल ने सिर्फ 51 सीटों पर उम्मीदवार उतारे हैं। 17 सीटों पर यूकेडी ने दूसरे दलों के प्रत्याशियों को समर्थन देने की बात की है।
बसपा और यूकेडी रही हैं किंगमेकर
उत्तराखंड में 2002 से 2012 तक तीसरे दल ने किंगमेकर की भूमिका निभाई है। जिसमें बसपा और यूकेडी दोनों ही शामिल रही हैं। उत्तराखंड में पहला चुनाव 2002 में हुआ। तब भाजपा, कांग्रेस और बसपा में त्रिकोणीय मुकाबला हुआ। कांग्रेस 36, भारतीय जनता पार्टी ने 19 सीटों पर जीत दर्ज की, बहुजन समाज पार्टी 7 सीट जीती। 2007 के विधानसभा चुनाव में बसपा ने और भी बड़ी पार्टी के रूप में सामने आई। इस चुनावों में बसपा के 8 विधायक जीते। 2012 के विधानसभा चुनाव में बसपा 3 विधायकों पर सिमट गई, लेकिन इस बार बसपा ने किंग मेकर की भूमिका निभाई और कांग्रेस के साथ गठबंधन कर सरकार में शामिल हुई। 2017 में बसपा का उत्तराखंड से सूपड़ा साफ हो गया। क्षेत्रीय दल उत्तराखंड क्रांति दल का भी हर चुनाव में प्रदर्शन गिरता रहा। 2002 के विधानसभा चुनाव में यूकेडी के चार विधायक जीतकर विधानसभा पहुंचे। 2007 के चुनाव में 3 यूकेडी के 3 विधायक ही जीतकर आए। जबकि 2012 में एक और 2017 में कोई विधायक चुनाव जीतकर नहीं आया। इस बार सभी को बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद है।












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