Kedarnath मंदिर और सीट भाजपा के लिए कैसे बन रही डबल चुनौती, जानिए क्या है पूरा मसला
केदारनाथ भाजपा के लिए दोहरी चुनौती बन गई है। एक तरफ दिल्ली में केदारनाथ मंदिर बनने का विरोध हो रहा है।
दूसरी तरफ केदारनाथ सीट खाली होने से भी भाजपा के लिए दोबारा सीट को जीतने की चुनौती भी पार्टी के सामने है। ऐसे में धामी सरकार के लिए केदारनाथ इस समय दोहरी चुनौती बनी हुई है।

दिल्ली में बन रहे केदारनाथ मंदिर को लेकर केदारनाथ धाम से लेकर पूरे देश में सनातन धर्म को मानने वाले इसके विरोध में आ गए हैं। तीर्थ पुरोहितों, पंडा समाज और हिंदू सनातनियों ने दिल्ली में बनाए जा रहे केदारनाथ मंदिर का जमकर विरोध शुरू किया है। इसका विरोध इस रुप में इसलिए ज्यादा हो रहा है, क्योंकि मंदिर के शिलान्यास कार्यक्रम में सीएम पुष्कर सिंह धामी मौजूद रहे।
अब कांग्रेसियों को भी बैठे बिठाए बड़ा मुद्दा मिल गया है। कांग्रेस ने इस मुद्दे पर धामी सरकार को घेरना शुरू कर दिया है। साथ ही इसके विरोध मे जल्द ही यात्रा निकालने का ऐलान किया है। शंकराचार्य से लेकर हिंदू सनातनी भी दिल्ली में प्रतीकात्मक मंदिर बनाने के विरोध में आ गए हैं।
सबका एक सुर में कहना है कि शिव का वास सिर्फ हिमालय में हो सकता है। कहीं ओर नहीं। हालांकि चौतरफा विरोध के बाद सीएम धामी ने इस मुद्दे पर साफ करते हुए कहा कि केदारनाथ जहां है वहीं है। दूसरा कोई धाम नहीं हो सकता है। इसमें किसी भी तरह की आशंका नहीं होना चाहिए। धामी ने इस मुद्दे को खत्म करने की अपील की है।
इस बीच केदारनाथ की विधानसभा सीट भी खाली हो गई है। जहां से शैलारानी रावत विधायक थी। शैलारानी रावत के निधन के बाद सीट खाली हो गई। इससे पूर्व बदरीनाथ सीट खाली हुई तो कांग्रेस ने जीत ली। जिसके बाद अयोध्या की हार को बदरीनाथ से जोड़ा गया।
कांग्रेस का दावा है कि अयोध्या और बदरीनाथ झांकी है, केदारनाथ अभी बाकी है। यानि कांग्रेस को पूरा भरोसा है कि वे केदारनाथ उपचुनाव भी जीतेंगे। उधर भाजपा ने भी कार्यसमिति की बैठक में केदारनाथ जीतने का संकल्प लिया है। अब देखना दिलचस्प होगा कि भाजपा इस समय केदारनाथ की दोनों चुनौतियों से कैसे पार पाती है।












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