केदारनाथ उपचुनाव में हार के बाद सेमीफाइनल से कैसे हुई बाहर हुई कांग्रेस,जानिए अब आगे क्या
केदारनाथ उपचुनाव में मिली जीत के बाद भाजपा अब निकाय चुनावों में जुट गई है। भाजपा इस जीत को एक चुनौती के रुप में देख रही है। भाजपा के शीर्ष नेताओं ने अपने कार्यकर्ताओं को नए जोश के साथ चुनावी मैदान में उतरने को कहा है।
हालांकि इससे पूर्व भाजपा ने मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस को पहले ही मैदान से बाहर बता दिया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी केदारनाथ उपचुनाव की जीत के बाद दिए संबोधन में इस बात का जिक्र किया कि कांग्रेस सेमीफाइनल में ही बाहर हो गई है तो फाइनल में कहां से पहुंचेगी।

दरअसल केदारनाथ उपचुनाव को कांग्रेस ने जनता के बीच जाकर यह प्रचार किया कि केदारनाथ उपचुनाव आगामी विधानसभा 2027 का सेमीफाइनल है। कांग्रेस को ये विश्वास था कि वह केदारनाथ उपचुनाव जीतकर सेमीफाइनल जीत जाएंगे और भाजपा पर मनोवैज्ञानिक दबाव बनाने में कामयाब होंगे। लेकिन भाजपा ने सेमीफाइनल में इस तरह की बैटिंग और फील्डिंग की कि कांग्रेस मुकाबले से बाहर हो गई।
केदारनाथ उपचुनाव में जिस तरह के परिणाम आए हैं, वह कांग्रेस के लिए आने वाले चुनावों के लिए सबक भी है। निर्दलीय त्रिभुवन चौहान ने भी कांग्रेस को कई राउंड में पछाड़कर ये सोचने को मजबूर कर दिया कि आखिर कांग्रेस की रणनीति में कहां कमजोर पड़ गई। ऐसे में निकाय चुनावों में कम से कम कांग्रेस को नई सोच की आवश्यकता पड़ेगी।
भाजपा के कांग्रेस को सेमीफाइनल में बाहर होने के बयान का कांग्रेस ने भी जबाव दिया है। पूर्व सीएम हरीश रावत का कहना है कि भाजपा के दोस्तो, हम आपसे चुनाव में हारे हैं। मगर अभी मैदान से बाहर नहीं हुये हैं, हम मैदान में हैं। हम, आपका मुकाबला करेंगे और इन्हीं नगर निकायों के चुनावों में करेंगे। जल्दी इसकी तिथि की घोषणा करो, हम मुकाबले के लिए कमर कस कर के तैयार हैं। अब देखना दिलचस्प होगा कि केदारनाथ उपचुनाव के सेमीफाइनल में बाहर हुई कांग्रेस क्या कमबैक कर पाएगी।












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