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उत्तराखंड की होली: भगवान से रंग खेलने की शुरूआत, होलाष्टक लगते ही शुरू त्योहार, जानिए कब मनेगी, ये है परंपरा

Holi of Uttarakhand उत्तराखंड में होली का त्योहार पूरे उमंग और जोश के साथ मनाया जाता है। पहाड़ों में होली पूरे एक महिनें तक मनाई जाती है। कुमाऊँ क्षेत्र में होली बहुत ही उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाई जाती है। यहां होली कई दिनों तक चलती है और होल्यार गांव गांव घर घर घूमकर होली के गीत गाते और झूमते हैं।

होल्यार ढोलक बजाते हैं और एक दूसरे को होली पर रंगों से प्रेम का संदेश देते हैं। कुमाऊँ की होली में बैठकी होली और खड़ी होली की खास परंपरा होती है। बैठकी होली में लोग बैठकर शास्त्रीय रागों में होली गीत गाते हैं, जबकि खड़ी होली में लोग खड़े होकर गोल घेरा बनाकर नाचते-गाते हैं।

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उत्तराखंड की होली की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहाँ रंग खेलने से पहले भगवान को याद किया जाता है। बागेश्वर में भी पहले भगवान बागनाथ को रंग चढ़ाया जाता है। इस तरह पहाड़ों की होली खास होती है। जो कि शालीनता, पवित्रता, संस्कृति और भाईचारे का प्रतीक है। कुमाऊँ की होली पूरे राज्य में ही नहीं, बल्कि देशभर में अपनी खास पहचान बनाए हुए है।

होली की शुरुआत आमलकी या रंगभरी एकादशी से

कुमाऊँ में होली की शुरुआत आमलकी या रंगभरी एकादशी से मानी जाती है। इस दिन सबसे भगवान को रंग चढ़ाया जाता है। मंदिरों में भगवान के वस्त्रों पर अबीर-गुलाल लगाया जाता है। मान्यता है कि जब तक भगवान रंग स्वीकार नहीं करते, तब तक लोग होली नहीं खेलते। 24 फरवरी से होलाष्टक लगते ही होली शुरू हो गई है।

होलाष्टक का अर्थ है 'होली से पहले के 8 दिन

होलाष्टक का अर्थ है 'होली से पहले के 8 दिन'। यह फाल्गुन शुक्ल अष्टमी से होलिका दहन (पूर्णिमा) तक का समय है, जिसे हिंदू धर्म में अशुभ माना जाता है। इस दौरान 24 फरवरी से 3 मार्च 2026 तक कोई भी शुभ कार्य वर्जित होता है, क्योंकि इस अवधि में ग्रहों की स्थिति संवेदनशील होती है।

4 मार्च को मुख्य होली धूलेंडी

पौराणिक मान्यता के अनुसार, इन 8 दिनों में हिरण्यकश्यप ने अपने पुत्र भक्त प्रह्लाद को कई प्रकार से कष्ट दिए थे। इस वजह से इन दिनों को "जले कटे" या अशुभ दिन माना जाता है। इन दिनों में भगवान विष्णु की आराधना, दान-पुण्य, और जप करना फलदायी माना जाता है। 27 फरवरी को रंगभरी एकादशी मनाई जाएगी। इस दिन सबसे पहले भगवान को रंग चढ़ाया जाएगा। कहीं 2 मार्च को तो कोई 3 मार्च को होलिका दहन का आयोजन कर रहे है। 4 मार्च को मुख्य होली धूलेंडी मनाई जाएगी। सरकारी कार्यालय तीन और चार मार्च को होली के पर्व पर बंद रहेंगे।

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