Holi: उत्तराखंड में यहां पहले भगवान शिव को लगाया जाता है रंग, फिर होती है होली की शुरूआत
बागेश्वर जिले में ग्रामीण अंचलों के साथ कांडा, कपकोट, काफलीगैर और दुग नाकुरी तहसील क्षेत्र के गांवों में भी होली गायन की शुरुआत हो गई है। इसी क्रम में बागनाथ मंदिर में चीर बंधन कार्यक्रम आयोजित हुआ।

कुमाऊंनी होली का अंदाज सबसे हटके हैं। महिनें भर तक कुमाऊं में होली के कई रंग बिखरते हुए नजर आ जाते हैं। खासकर खड़ी और बैठकी होली। कुमाऊंनी होली की अपनी खास संस्कृति और विरासत है। जिसको पीढ़िया आगे बढ़ाने का काम कर रही हैं। इसी तरह की अलग और खास संस्कृति का रंग बागेश्वर में भी देखने को मिल रहा है। बागेश्वर में चीरबंधन और रंग धारण करने के साथ खड़ी होली गायन की शुरुआत हो गई है।
गांवों में भी होली गायन की शुरुआत
बागेश्वर जिले में ग्रामीण अंचलों के साथ कांडा, कपकोट, काफलीगैर और दुग नाकुरी तहसील क्षेत्र के गांवों में भी होली गायन की शुरुआत हो गई है। इसी क्रम में बागनाथ मंदिर में चीर बंधन कार्यक्रम आयोजित हुआ। सभी लोग स्थानीय देवी देवाताओं को पहले रंग समर्पित करते हैं, उसके बाद होली गायन शुरू कर देते हैं। मंदिरों में होली के खालों में चीर बांधकर होल्यार खड़ी होली गायन करते हैं। छलड़ी तक होली गायन की धूम रहती है। इस दौरान भगवान शिव को अबीर-गुलाल अर्पित कर सबके जीवन में होली के रंगों की तरह खुशियां देने का आशीर्वाद मांगा। इसी के साथ आसपास भी होली गायन की शुरूआत हो गई।
होल्यारों ने होली के कपड़ों पर रंग धारण किया
बागनाथ मंदिर परिसर में होल्यारों ने चीरबंधन के बाद भगवान शिव को अबीर, गुलाल अर्पित कर होगी गायन किया। होल्यारों ने कैलै बांधी चीर हो रघुनंदन राजा.. और सिद्धि के दाता विघ्न विनाशन खेले होरी.. आदि होली गीतों का गायन किया। चीर बंधन से पूर्व होल्यारों ने होली के कपड़ों पर रंग धारण किया।
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एकमात्र प्राचीन शिव मंदिर है जो दक्षिण मुखी
बागनाथ मंदिर उत्तराखण्ड के बागेश्वर ज़िले के बागेश्वर तीर्थस्थान में स्थित एक प्राचीन शिव मंदिर है। यह उत्तर भारत में एकमात्र प्राचीन शिव मंदिर है जो दक्षिण मुखी है, जिसमें शिव शक्ति की जलहरी पूर्व दिशा को है। यहां शिव पार्वती एक साथ स्वयंभू रूप में जलहरी के मध्य विद्यमान हैं। यह बागेश्वर ज़िले का सबसे प्रसिद्ध मंदिर है और ज़िले का नाम भी इसी मंदिर के नाम पर पड़ा है। यह सरयू नदी और गोमती नदी एवं सरस्वती (अदृश्य नदी) के संगम पर बागेश्वर नगर में स्थित है।












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