Uttarakhand: Google Map imagery में हरित क्षेत्र में दिखी कमी, High court ने निर्माण गतिविधियों पर लगाई रोक
उत्तराखंड हाईकोर्ट ने गूगल मैप इमेजरी में हरित क्षेत्र में कमी दिखने पर जिलिंग एस्टेट में सभी तरह के निर्माण गतिविधियों पर 15 दिसंबर तक रोक लगा दी।
उत्तराखंड हाईकोर्ट ने गूगल मैप इमेजरी में हरित क्षेत्र में कमी दिखने पर छोटे से गांव जिलिंग एस्टेट में सभी तरह के निर्माण गतिविधियों पर 15 दिसंबर तक रोक लगा दी। चीफ जस्टिस विपिन सांघी और जस्टिस आर.सी. खुल्बे की खंडपीठ ने यह निर्देश दिया है। जिसमें कहा गया कि प्रथम दृष्टया हरित क्षेत्र में विशेष रूप से 36 हेक्टेयर एस्टेट के 8.5 हेक्टेयर में कमी को दर्शाता है। यह 8.5 हेक्टेयर क्षेत्र 40% या उससे अधिक की सीमा में वन आवरण का उच्च घनत्व प्रतीत होता है।

कोर्ट ने 2015, 2018 और 2022 की तस्वीरों की तुलना की
वर्ष 2020 में बीरेंद्र सिंह द्वारा दायर जनहित याचिका पर कोर्ट ने सुनवाई करते हुए जिलिंग एस्टेट गांव में चल रहे कामों पर रोक लगाई है। बता दें कि इस मामले में विशाल कंक्रीट निर्माण, विला, स्विमिंग पूल, सौर बिजली की बाड़ और निजी हेलीपैड की कल्पना करते हुए टाउनशिप बनाने के लिए रिज़ॉर्ट के खिलाफ नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल का रुख किया था, निर्माण कार्य से पारिस्थितिक तंत्र को नुकसान पहुंचाने और वन्यजीवों की मुक्त आवाजाही में बाधा उत्पन्न करने की बात की गई। इसके अलावा पर्यावरण मंजूरी नहीं होना है। इस मामले में अपना निर्णय सुनाते हुए कोर्ट ने कहा कि गुगल मैप पर चित्रों को देखकर निष्कर्ष स्पष्ट रूप से अंतिम नहीं हो सकता। लेकिन प्रथम दृष्टया मूल्यांकन के लिए हम निश्चित रूप से इन चित्रों पर ध्यान दे सकते हैं। ये चित्र बताते हैं कि घने वृक्षों के क्षेत्र में भी विकासात्मक गतिविधि की गई है। कोर्ट ने 2015, 2018 और 2022 की तस्वीरों की तुलना की। डीम्ड फॉरेस्ट के मुद्दे को हल करने के लिए कोर्ट ने पूरे जिलिंग एस्टेट के नए सिरे से निरीक्षण का आदेश दिया। कोर्ट ने रिटायर्ड आईएफएस डॉ. द्विजेंद्र कुमार शर्मा को कोर्ट कमिश्नर के रूप में स्थानीय भौतिक ऑन-द-स्पॉट जांच करने के लिए नियुक्त किया और उनसे दो सप्ताह में रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए कहा।












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