उत्तराखंड में सबकी चाहत नहीं बन पाए हरीश रावत, जानिए हरदा के नाम बन गया है एक अनोखा रिकॉर्ड

उत्तराखंड में कोई भी विधानसभा का मुख्य चुनाव नहीं जीत पाए हरदा

देहरादून, 12 मार्च। उत्तराखंड 2022 विधानसभा चुनाव में मुख्य मुकाबला कांग्रेस और भाजपा में ही नजर आया। कांग्रेस में इस दौरान पूरी राजनीति और रणनीति हरीश रावत के इर्द गिर्द ही घूमती रही। लेकिन सबकी चाहत हरीश रावत का नारा देने वाली कांग्रेस के हरीश रावत सबकी चाहत नहीं बन पाए। कांग्रेस तो हारी ही खुद हरीश रावत भी लालकुंआ से विधानसभा का चुनाव हार गए। इसके बाद हरीश रावत के राजनीतिक सफर में एक नया रिकॉर्ड दर्ज हो गया विधानसभा का चुनाव न जीतने का। हरीश रावत सिर्फ 2014 में धारचुला सीट से उपचुनाव लड़कर विधानसभा पहुंचे। इसके अलावा वे एक भी विधानसभा का मुख्य चुनाव नहीं जीत पाए हैं। 2017 में हरीश रावत ने हरिद्वार ग्रामीण और किच्छा दो सीट से चुनाव लड़े लेकिन दोनों ही हार गए। हरीश रावत ने प्रदेश से लेकर राष्ट्रीय स्तर पर कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों को संभाला है, और कई रिकॉर्ड भी बनाए। लेकिन अभी तक विधानसभा का चुनाव न जीतने का रिकॉर्ड भी हरदा ने ही बनाया है।

 Harish Rawat could not make everyones wish in Uttarakhand, know Hardas name has become a unique record

हरदा केन्द्र में कैबिनेट मंत्री, राज्य मंत्री और प्रदेश के मुख्यमंत्री तक का सफर

उत्तराखंड कांग्रेस में स्वर्गीय नारायण दत्त तिवारी के बाद हरीश रावत की सबसे बड़ा नाम हैं। 27 अप्रैल 1948 अल्मोड़ा जिले के छोटे से गांव मोहनरी में जन्में हरदा केन्द्र में कैबिनेट मंत्री, राज्य मंत्री और प्रदेश के मुख्यमंत्री तक का सफर पूरा कर चुके हैं। ​हरीश रावत ने अपनी राजनीति की शुरूआत ग्राम सभा से की। 1980 में हरदा पहली बार अल्मोड़ा लोकसभा क्षेत्र से भाजपा के बड़े नेता मुरली मनोहर जोशी को हराकर संसद पहुंचे। 1984 में फिर से हरदा ने बड़े अंतर से मुरली मनोहर जोशी को हराया। 1989 के लोकसभा चुनाव में हरदा ने उत्तराखंड क्रांति दल के काशी सिंह ऐरी को हराया और लगातार तीसरी बाद लोकसभा पहुंचे। 1991 में हरदा पहली बार चुनाव हारे। इसके बाद 1996, 1998 और 1999 के चुनाव में लगातार चार बार वे अल्मोड़ा सीट से हारते रहे। उत्तराखंड बनने के बाद हरीश रावत को उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी का अध्यक्ष बनाया गया। 2002 में उन्हें कांग्रेस ने उत्तराखंड कोटे से राज्यसभा सदस्य बनाया और 2008 तक वह राज्यसभा सदस्य रहे। 2009 के लोकसभा चुनाव में वे हरिद्वार सीट से चुनाव जीतकर चौथी बार लोकसभा पहुंचे। 2009 से 2011 तक केंद्र की यूपीए सरकार में श्रम और रोजगार राज्य मंत्री, 2011 से 2012 तक वह कृषि एवं खाद्य प्रसंस्करण उद्योग राज्य मंत्री और संसदीय कार्य राज्य मंत्री रहे। 2012 में हरीश रावत को कैबिनेट मंत्री बनाया गया और जल संसाधन विभाग की जिम्मेदारी दी गई। जनवरी 2014 तक वह इस पद पर रहे। सीएम बनने के बाद हरदा ने इस पद से इस्तीफा दे दिया।

2014 में उत्तराखंड के मुख्यमंत्री बने

फरवरी 2014 में हरदा उत्तराखंड के मुख्यमंत्री बने। जुलाई 2014 में उत्तराखंड की धारचुला सीट से उपचुनाव जीते। इसके बाद 2017 के उत्तराखंड विधानसभा चुनाव में हरीश रावत ने हरिद्वार ग्रामीण और किच्छा दो सीटों से विधानसभा चुनाव लड़ा, लेकिन वह दोनों सीटें हार गए। 2019 के लोकसभा चुनाव में हरदा नैनीताल-उधमसिंह नगर सीट से चुनाव लड़े और हार गए। इसके बाद 2022 में लालकुंआ से हरीश रावत विधानसभा का चुनाव हार गए। इस तरह हरीश रावत ने कई​ रिकॉर्ड बनाए भी है। हरीश रावत अब राजनीति में क्या कदम उठाते हैं। ये तो साफ नहीं है ​लेकिन लगातार हार से हरीश रावत के राजनीतिक निर्णय को लेकर सवाल जरुर उठने लगे हैं। लालकुंआ से हार के भी कारणों पर समीक्षा होने लगी है। जहां हरीश रावत एक जिला पंचायत सदस्य का चुनाव जीतने वाले प्रत्याशी से हार गए। भाजपा के प्रत्याशी मोहन बिष्ट ने हरीश रावत को हराया। जो कि लोकल और बाहरी समीकरणों की वजह से चुनाव जीते हैं।

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