उत्तराखंड: कोरोना महामारी में अनाथ हुए बच्चों के आंकड़े जुटाने में लगी राज्य सरकार, इस योजना से मिलेगा लाभ

देहरादून, मई 10। कोरोना महामारी की दूसरी लहर देवभूमि उत्तराखंड में भी विक्राल रूप धारण कर चुकी है। पिछले 24 घंटे के अंदर राज्य में 180 मरीज कोरोना की वजह से जान गंवा चुके हैं। प्रदेश में बढ़ रही मृत्युदर को देखते हुए राज्य सरकार ने एक अहम फैसला लिया है। दरअसल, तीरथ सिंह रावत सरकर ने उन अनाथ बच्चों के आंकड़े जुटाने के लिए अधिकारियों को निर्देश दिए हैं, जिनके माता-पिता का कोरोना से निधन हो गया है। राज्य सरकार उन आंकड़ों को जुटाकर ऐसे बच्चों को केंद्र सरकार की 'बाल संरक्षण सेवाएं' योजना के तहत उन्हें लाभान्वित करेगी।

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आपको बता दें कि उत्तराखंड में रोजाना कोरोना के 8 से 9 हजार मामले सामने आ रहे हैं। शहरों के साथ-साथ ग्रामीण इलाकों में भी अब कोरोना दस्तक दे चुका है। हालांकि, कोरोना संक्रमण की रोकथाम के लिए सरकार मुस्तैदी से जुटी है, मगर हालात बिगड़ते जा रहे हैं। इसे देखते हुए अब सख्त कदम भी उठाए जा रहे हैं। इन सबके बीच सरकार ने उन बच्चों की भी चिंता की है, जिनके माता-पिता को इस महामारी ने छीन लिया। अनाथ हुए ये बच्चे रिश्तेदारों के संरक्षण में रहेंगे या फिर फिर इन्हें गोद दिया जाना है अथवा इनके लिए कुछ और कदम उठाए जा सकते हैं, इसे लेकर सरकार सक्रिय हुई है। इसी कड़ी में अब जिलों से ऐसे बच्चों का आंकड़ा जुटाया जा रहा है।

सचिव महिला सशक्तीकरण एवं बाल विकास एचसी सेमवाल ने इस संबंध में अपर सचिव ग्राम्य विकास, सचिव पंचायती राज व स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण और पुलिस महानिदेशक को पत्र भेजा है। पत्र में कहा गया है कि कोरोना संक्रमण की चपेट में आकर जिन बच्चों के माता-पिता का निधन हो गया है, उन्हें संरक्षण और उचित देखभाल दिया जाना आवश्यक है। ऐसे बच्चों को केंद्रीय महिला एवं बाल कल्याण मंत्रालय की बाल संरक्षण सेवाएं योजना के तहत लाभान्वित किया जा सकता है।

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