पाकिस्तानी जायरीनों को वक्फ बोर्ड ने भेंट किया गीता, गंगाजल और रुद्राक्ष, जल्द भेजेंगे रिटर्न गिफ्ट का वीडियो

पाकिस्तानी से पिरान कलियर में साबिर पाक के 755 वे उर्स में आए जायरीनों को उत्तराखंड वक्फ बोर्ड की ओर से गीता, गंगाजल और रुद्राक्ष की माला भेंट की गई है। उत्तराखंड वक्फ बोर्ड ने इसके जरिए पाकिस्तान को भाई चारे का संदेश भेजने की बात की है। जो कि पाकिस्तान के मंदिर में हिंदू भाइयों को सौंपेंगे। दावा किया गया है कि जल्द ही इसका पाकिस्तान से वीडियो भी जारी किया जाएगा।

 Geeta, Gangajal and Rudraksh garlands were presented to Pakistani pilgrims, Uttarakhand Waqf Board gave the reason

उत्तराखंड वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष शादाब शम्स ने साबिर पाक के 755 वे उर्स में आए पाकिस्तान के 107 श्रद्धालुओं को रिटर्न गिफ्ट के रूप में पाकिस्तानी जायरीनों और ग्रुपलीडर अहसानुलहक को वाहक बनाकर पाकिस्तान के मंदिरों में मौजूद पुजारियों को सह सम्मान भेंट करने के लिए गंगा जल ,रुद्राक्ष की माला और श्रीमद्भागवत गीता व कलियर शरीफ दरगाह का प्रतिरूप भेंट किया।

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    पाकिस्तानी जायरीनों को भेंट की गई गीता, गंगाजल और रुद्राक्ष की माला

    पकिस्तानी जत्थे के लीडर अहसानउलहक ने कहा हम हिन्द का प्यार और सम्मान जिस विश्वास से हमे सौंपा गया है, हम उसी सम्मान से पाकिस्तान के पुजारियों के मंदिर पहुंच कर सह सम्मान पहुंचाने का कार्य पूरी ईमानदारी से करेंगे। उन्होंने ये वादा साबिर पाक के दरबार में वक्फ बोर्ड से किया है, साथ ही कहा कि इसका वीडियो बनवाकर पाकिस्तान से बहुत जल्द भेजेंगे जिससे एक दूसरे के प्रति सम्मान और विश्वास बढ़ सके।

    उन्होंने जायरीनों के बेहतर इंतजाम के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, वक्फ बोर्ड उत्तराखण्ड का शुक्रिया अदा किया। उत्तराखंड वक्फ बोर्ड अध्यक्ष शादाब शम्स ने कहा कि सनातन प्रेमियों की आध्यात्मिक राजधानी देवभूमि उत्तराखण्ड है। जिसकी धर्म नगरी हरिद्वार से पूरे भारत वासियों की ओर से यह संदेश भेजा जा रहा है कि हम अतिथि देवों भवः को मानने वाले हैं और पूरी दुनिया को अपना परिवार मानते हैं।

    इस लिए वसुधैव कुटुम्कम को चरितार्थ करने के लिए साथ ही विश्व शांति के लिए एक ईमानदार प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने आगे कहा कि वे प्रेम कि जिस भाषा मे चाहेंगे उन्हें जवाब दिया जाएगा। शादाब शम्स ने कहा कि पाकित्सान जायरीनों को तीन भाषाओं में भगवतगीता भेंट की गई है। उर्दू, संस्कृत और हिंदी। जिससे भाषा की परेशानी न हो। जिस भाषा में वे चाहें पढ़कर समझ सकते हैं।

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