कमला हैरिस के बहाने पूर्व सीएम हरीश रावत ने उत्तराखंड में छेड़ दी एक नई बहस,सीएम को लेकर कह दी बड़ी बात

अमेरिका में राष्ट्रपति के लिए अब सत्तारूढ़ डेमोक्रेटिक पार्टी में अब भारतीय मूल की उप राष्ट्रपति कमला हैरिस के नाम की चर्चा है।​ जिनको भारत से भी लगातार समर्थन मिल रहा है।

इस बीच उत्तराखंड के पूर्व सीएम और कांग्रेस के सीनियर नेता हरीश रावत ने भी कमला हैरिस का समर्थन किया है। इसके साथ ही हरीश रावत ने एक नया मुद्दा छेड़ दिया है।

Former CM Harish Rawat started new debate Uttarakhand pretext Kamala Harris said big thing about CM

हरीश रावत का कहना है कि मैं यह भी सपना देख रहा हूं कि उत्तराखंड राज्य की मुख्यमंत्री भी कोई बेटी बने। वह मेरी बेटी भी हो सकती या एक दलित की बेटी भी हो सकती है। उन्होंने कहा कि मैंने एक बार दलित बेटी को आने वाले समय के मुख्यमंत्री के रूप में देखा था। विधानसभा की कार्रवाई देखते-देखते एक दिन किसी और बेटी के लिए भी मेरे मन में यह ख्याल आया, समय आ गया है हमारी कुछ बेटियों को अपने आपको इस स्थान के लिए मानसिक रूप से तैयार करना चाहिए।

हरीश रावत की इस सोशल मीडिया पोस्ट ने भाजपा समेत कांग्रेस के अंदर भी नई बहस को ​जन्म दे दिया है। सब इस बात के सियासी मायने तलाश रहे हैं कि हरीश रावत सीएम के तौर पर किस चेहरे की पैरवी कर रहे हैं। भाजपा की बात करें तो स्पीकर रितु खंडूरी भूषण और दलित चेहरे के रुप में रेखा आर्य वर्तमान परिस्थितियों में बड़े चेहरे के रुप में हैं। इसके अलावा नैनीताल से विधायक सरिता आर्य भी हैं।

कांग्रेस की बात करें तो हरीश रावत ने सीधे तौर पर हरिद्वार ग्रामीण से विधायक अपनी बेटी अनुपमा रावत का जिक्र किया है। इसके साथ ही कांग्रेस की भगवानपुर से विधायक ममता राकेश भी इस लिस्ट में शामिल हो सकती हैं। इस तरह से हरीश रावत ने एक नई बहस छेड़ दी है।

हालांकि ​जानकारों का मानना है कि हरीश रावत की बात हमेशा किसी न किसी नई बहस को जन्म देती आ रही है। इस बार हरीश का इशारा किस और है। ये भी समझना आसान नहीं होगा। हरदा इस बात के जरिए भाजपा के अंदर भी वर्तमान परिस्थिति के हिसाब से किसी तरह नए विवाद को खड़ा करने की सियासी चाल भी चल सकते हैं। जिसका आने वाले दिनों में कुछ सियासी उठापटक के रुप में नजर आ जाए।

उत्तराखंड की बात करें तो 24 साल में 10 चेहरे सीएम के तौर पर मिल चुके हैं। इनमें नित्यानंद स्वामी, भगत सिंह कोश्यारी, नारायण दत्त तिवारी, बीसी खंडूरी, ​डॉ रमेश पोखरियाल निशंक, विजय बहुगुणा, ​हरीश रावत,त्रिवेंद्र सिंह रावत, तीरथ सिंह रावत और पुष्कर सिंह धामी शामिल हैं। अब तक किसी महिला को उत्तराखंड की सीएम की कुर्सी नहीं मिल पाई है।

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