ऋषिकेश के प्रसिद्ध मंदिर: यात्रा का प्रमुख पड़ाव, यहां भगवान शिव, राम सीता, लक्ष्मण को समर्पित हैं मंदिर
चारधाम यात्रा से लेकर सावन की कांवड़ यात्रा ऋषिकेश सबके लिए मुख्य पड़ाव है। ऋषिकेश में लक्ष्मण झूला, त्रिवेणी घाट, स्वर्ग आश्रम, नीलकंठ महादेव मंदिर समेत कई धार्मिक स्थल हैं।
चारधाम यात्रा से लेकर सावन की कांवड़ यात्रा ऋषिकेश सबके लिए मुख्य पड़ाव है। ऋषिकेश में लक्ष्मण झूला, त्रिवेणी घाट, स्वर्ग आश्रम, नीलकंठ महादेव मंदिर समेत कई धार्मिक स्थल हैं।

नीलकंठ महादेव मंदिर सावन का महिना भगवान शिव का महिना माना जाता है। ऐसे में शिव भक्त सबसे ज्यादा नीलकंठ महादेव मंदिर में दर्शन करना नहीं भूलते। जो कि भगवान शिव को समर्पित सबसे प्रतिष्ठित हिंदू स्थलों में से एक है। ये मंदिर स्वर्ग आश्रम से लगभग 7 किमी दूर है। ऐसा कहा जाता है कि यहीं पर भगवान शिव ने अमृत मंथन के बाद समुद्र मंथन से निकले विष को पिया था। इस विष की वजह से उनका गला नीला पड़ गया था और यही वजह है कि इस मंदिर का नाम नीलकंठ महादेव रखा गया। तीर्थयात्री इस मंदिर में गंगा जल चढ़ाते हैं।
त्र्यंबकेश्वर को तेरा मंजिल मंदिर के रूप में भी जाना जाता है। जो गंगा नदी के तट पर स्थित है। त्र्यंबकेश्वर मंदिर ऋषिकेश के सबसे प्रतिष्ठित मंदिरों में से एक है। जो लक्ष्मण झूला से दिखाई देता है। यहां शिव मंदिर के साथ ही अन्य देवी देवताओं के मंदिर हैं।
भारत मंदिर आदिगुरु शंकराचार्य द्वारा स्थापित, मंदिर में भगवान विष्णु को सालिग्राम के एक टुकड़े से उकेरा गया है। मंदिर की भीतरी छतरी में श्री यंत्र है। यह शक्ति पीठों में से एक है क्योंकि ऐसा माना जाता है कि जब भगवान शिव उनके शव के साथ पूरे ब्रह्मांड की यात्रा कर रहे थे, तो सती का एक अंग इस स्थान पर गिरा था।
भूतनाथ मंदिर ऋषिकेश में यह मंदिर तीन तरफ से घिरा हुआ है। यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित है। पौराणिक मान्यता है भगवान शिव की बारात इसी स्थान पर रुकी थी।
रघुनाथ मंदिर त्रिवेणी घाट पर स्थित इस मंदिर पर हर शाम गंगा आरती होती है। रघुनाथ मंदिर भगवान राम और देवी सीता को समर्पित है। इस मंदिर के पास ही एक पवित्र तालाब ऋषिकुंड भी है।
शत्रुघ्न मंदिर ऋषिकेश में इस मंदिर का निर्माण आदि शंकराचार्य ने ऋषिकेश की यात्रा के दौरान किया था। यह प्राचीन मंदिर राम झूला के पास स्थित है।
लक्ष्मण मंदिर माना जाता है कि लक्ष्मण और राम को यहां ज्ञान की प्राप्ति हुई थी। मान्यता है कि लक्ष्मण झूला का निर्माण राम और लक्ष्मण ने किया था। इस मंदिर में प्राचीन मूर्तियों और चित्रों का संगम देखने लायक है।












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