ऊर्जा प्रदेश में बिजली के करंट और पानी के बिल से अब पड़ेगी महंगाई की मार, जानिए क्या है मामला
बिजली और पानी का बिल हुआ महंगा, 1 अप्रैल से दिखेगा असर
देहरादून, 1 अप्रैल। नई सरकार के कामकाज संभालते ही प्रदेश में महंगाई का डबल डोज जनता को लगना शुरू हो गया है। आम आदमी की जरुरत बिजली और पानी दोनों महंगी हो गई है। सबसे पहले प्रदेश में उपभोक्ताओं को बिजली का करंट लग गया है। साथ ही पानी भी महंगा होने जा रहा है। उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग ने वित्तीय वर्ष 2022-23 के लिए विद्युत दरों का नया टैरिफ जारी कर दिया है। वहीं घरेलू पेयजल उपभोक्ताओं के लिए नौ से 11 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी तय है। वहीं, कमर्शियल उपभोक्ताओं को 15 फीसदी से अधिक भुगतान करना होगा।

नई विद्युत दरों का टैरिफ जारी
उत्तराखंड को ऊर्जा प्रदेश कहा जाता है। यहां विद्युत परियोजनाओं से बिजली का उत्पादन होता है। लेकिन इसका ज्यादा लाभ प्रदेश की जनता को होता हुआ नजर नहीं आ रहा है। नियामक आयोग के कार्यवाहक अध्यक्ष डीपी गैरोला और सदस्य तकनीकी एमके जैन ने नई विद्युत दरों का टैरिफ जारी किया। उन्होंने बताया कि इस साल 10.18 प्रतिशत बढ़ोतरी का प्रस्ताव आया था, लेकिन आयोग ने 2.68 प्रतिशत की बढ़ोतरी की है। प्रदेश के करीब चार लाख बीपीएल उपभोक्ताओं के लिए बिजली दरों में चार पैसा प्रति यूनिट की बढ़ोतरी की गई है। इसी प्रकार, 0-100 यूनिट वाले करीब 11.43 लाख उपभोक्ताओं के लिए बिजली दरों में 10 पैसा प्रति यूनिट की बढ़ोतरी की है। आयोग ने उद्योगों के लिए जहां बिजली दरों में बढ़ोतरी की है तो वहीं उन्हें वोल्टेज छूट, पीक आवर सरचार्ज, अविरल आपूर्ति सरचार्ज के मामले में राहत भी प्रदान की है। आयोग ने फिक्स चार्ज के मामले में उपभोक्ताओं को बड़ी राहत दी है। इसके तहत जहां पहले यूनिट के श्रेणीकरण के हिसाब से फिक्स चार्ज लगता था, वहीं अब कनेक्शन के लोड यानी किलोवाट के हिसाब से फिक्स चार्ज लगेगा।
घरेलू पेयजल उपभोक्ताओं के लिए 9 से 11 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी तय
बिजली के साथ ही पानी का बिल भी आम आदमी का बजट गड़बड़ा सकता है। एक अप्रैल से पानी भी महंगा होने जा रहा है। घरेलू पेयजल उपभोक्ताओं के लिए 9 से 11 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी तय है। वहीं, कमर्शियल उपभोक्ताओं को 15 फीसदी से अधिक भुगतान करना होगा। जल संस्थान एक अप्रैल से राज्य में पेयजल की नई दरें लागू करता है। शहरी क्षेत्रों में पानी के बिलों का निर्धारण हाउस टैक्स के आधार पर होता है। ग्रामीण क्षेत्रों में बिल पानी के नल के आधार पर तय किया जाता है। शहरों में 360 रुपये तक भवन कर पर ग्रेविटी की पेयजल योजनाओं से जुड़े उपभोक्ताओं का 160 रुपये महीना पानी का बिल आता है। ट्यूबवेल से जुड़े उपभोक्ताओं का 169 रुपये, पम्पिंग पेयजल योजना से जुड़े उपभोक्ताओं का 181 रुपये प्रति महीना बिल 2013 के तय रेट पर निर्धारित किया गया है। भवन कर 361 रुपये से 2000 रुपये के बीच होने पर ग्रेविटी योजना में 169.10 रुपये, ट्यूबवेल योजना पर 181.56 रुपये, पम्पिंग योजना पर 195.80 रुपये महीना बिल तय किया गया है। पानी के बिल में हर महीने 14 रुपये से लेकर 25 रुपये तक की बढ़ोत्तरी होगी। जल संस्थान तीन महीने में पानी के बिल जारी करता है। इस तरह एक बिल में 42 रुपये से लेकर 75 रुपये तक का इजाफा होगा।
आम आदमी की जेब पर भारी
महंगाई को लेकर पहले ही जनता त्रस्त है। सिलेंडर के दाम 1 हजार पार और पेट्रोल 100 के पार होने को लेकर कांग्रेस लगतार विरोध प्रदर्शन कर रही है। जिसको लेकर पहले ही जनता पर आर्थिक बोझ पड़ना शुरू हो गया है। अब बिजली और पानी का बिल भी आम आदमी की जेब पर भारी पड़ने वाला है।












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