Doon Lit Fest 2026: देहरादून में सजा साहित्य-सिनेमा का महाकुंभ, इम्तियाज अली समेत कई दिग्गज शामिल
Doon Lit Fest 2026: शिक्षा मंत्रालय के तत्वावधान में 'नेशनल बुक ट्रस्ट' (NBT) द्वारा आयोजित दून बुक फेस्टिवल 2026 इन दिनों देहरादून में चर्चा का केंद्र बना हुआ है। इस पुस्तक मेले के भीतर आयोजित 'दून लिट फेस्ट' ने विचारों के आदान-प्रदान के लिए एक सशक्त मंच प्रदान किया है।
साहित्य, सिनेमा, इतिहास, आध्यात्मिकता, रक्षा और अत्याधुनिक तकनीक जैसे विविध विषयों पर हो रही चर्चाओं ने पाठकों और विचारकों को मंत्रमुग्ध कर दिया है। पिछले कुछ दिनों में इस महोत्सव में कई ऐसी बातें सामने आईं, जिन्होंने दर्शकों को झकझोर दिया और प्रेरित किया।

शहीद भगत सिंह की खोई हुई पिस्तौल और स्वतंत्र नारी की कहानी
महोत्सव के पहले दिन खोजी पत्रकार जुपिंदर सिंह ने अपनी उस रोमांचक शोध यात्रा को साझा किया, जिसके कारण शहीद भगत सिंह की लंबे समय से खोई हुई पिस्तौल की खोज संभव हो सकी। उनके इस सत्र ने देशभक्ति और इतिहास में रुचि रखने वाले युवाओं में नया जोश भर दिया।
वहीं, प्रसिद्ध लेखिका और पटकथा लेखक अद्वैता काला ने अपने सत्र 'बिटवीन द लाइन्स एंड लेंस' में स्वतंत्र भारत की महिलाओं की बदलती अवधारणा पर चर्चा की। उन्होंने उपन्यास, फिल्म और टेलीविजन में काम करने के अपने अनुभवों को साझा करते हुए बताया कि कैसे पर्दे पर भारतीय नारी की छवि बदल रही है।
मोदी का मिशन, 1857 का विद्रोह और सत्य की खोज
दूसरे दिन वकील और लेखक बृजेश देसाई ने अपनी पुस्तक 'मोदीज मिशन' पर चर्चा करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शुरुआती जीवन, शिक्षा और उनके नेतृत्व की यात्रा पर प्रकाश डाला।
उपन्यासकार कुलप्रीत यादव ने 1857 के स्वतंत्रता संग्राम की उन अनकही कहानियों को दोहराया, जो इतिहास के पन्नों में कहीं दब गई थीं। उन्होंने विशेष रूप से राव तुला राम की वीरता को याद किया। वहीं, आध्यात्मिक गुरु आचार्य प्रशांत ने 'ट्रुथ विदाउट अपोलॉजी' सत्र में सत्य, मानवीय रिश्तों और एक सार्थक जीवन के अर्थ पर युवाओं के साथ गहरा संवाद किया।
इम्तियाज अली का सिनेमाई जादू और क्षेत्रीय गौरव
तीसरे दिन फिल्म निर्देशक इम्तियाज अली के सत्र में भारी भीड़ उमड़ी। उन्होंने सिनेमा और कहानी कहने की कला पर अपने विचार साझा किए। इम्तियाज ने अपनी फिल्म 'रॉकस्टार' की कश्मीर में शूटिंग के अनुभव और थिएटर दर्शकों की बदलती पसंद पर खुलकर बात की। महोत्सव में उत्तराखंड की क्षेत्रीय साहित्यिक परंपराओं पर भी विशेष जोर दिया गया।
कविता सत्र में रुचि बहुगुणा उनियाल, अर्चना झा और बुद्धिनाथ मिश्र ने उत्तराखंड की समृद्ध काव्य विरासत की झलक पेश की। कुमाऊंनी और गढ़वाली अनुवादों पर हुए सत्र में कमला पंत, चंद्रशेखर तिवारी और शशिभूषण बडोनी सहित कई वक्ताओं ने क्षेत्रीय भाषाओं के सांस्कृतिक महत्व और उनके सामने आने वाली चुनौतियों पर चर्चा की।
अंतरिक्ष की उड़ान और शौर्य की गाथा
महोत्सव का एक प्रमुख आकर्षण ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला रहे। भारतीय वायु सेना के फाइटर पायलट और अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला ने एनबीटी के निदेशक युवराज मलिक के साथ बातचीत में अंतरिक्ष यात्रा के अपने अनुभवों को छात्रों के साथ साझा किया। रक्षा और सुरक्षा के विषय पर लेफ्टिनेंट जनरल सतीश दुआ ने नीरज राजपूत के साथ बातचीत में नेतृत्व, निर्णय लेने की क्षमता और आधुनिक सुरक्षा चुनौतियों पर महत्वपूर्ण जानकारी दी।
आगामी सत्र में AI और इतिहास की नई परतों पर जोर
आगामी दिनों में भी कई दिलचस्प सत्र होने वाले हैं। इनमें सुभाष चंद्र बोस के जीवन से जुड़े रहस्य, 1946 के नौसेना विद्रोह और 'रीडिंग इंडिया' जैसे विषयों पर चर्चा होगी। समकालीन तकनीक पर जोर देते हुए नितिन सेठ का सत्र 'स्मार्टर मशीन्स, वाइजर ह्यूमन्स' आज के दौर में इंसानों और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बदलते रिश्तों को टटोलेगा। दून लिट फेस्ट ने एक ऐसा स्थान बना दिया है जहाँ इतिहास की समीक्षा हो रही है, विचारों को चुनौती दी जा रही है और ज्ञान को एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक पहुंचाया जा रहा है।












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