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छत्तीसगढ से डिजिटल हाउस अरेस्ट स्कैम का भंडाफोड़,अभियुक्त के खाते से पकड़ा करोड़ों का लेनदेन, ऐसे दिया अंजाम

उत्तराखंड की एसटीएफ ने डिजिटल हाउस अरेस्ट स्कैम का भंडाफोड़ करते हुये एक अभियुक्त को भिलाई (दुर्ग) छत्तीसगढ से गिरफ्तार किया है। जिसने हरिद्वार में एक प्राइवेट कम्पनी में कार्यरत पंजाब निवासी एक पीड़ित को डिजिटल हाउस अरेस्ट कर ठगी की थी। अभियुक्त के खाते से 1.27 करोड़ का संदिग्ध लेनदेन पाया गया है|

अभियुक्त एक गिरोह बनाकर काम करता है। जो कि लोगों को पुलिस केस और जेल जाने का डर दिखाकर पैसे लेकर मामला निपटाने का दावा करते हैं। इस बीच वे पीड़ित से लाखों रुपए ठग लेते हैं।

Digital house arrest scam busted Chhattisgarh transaction worth crores caught from accused account executed like this

एसटीएफ के एसएसपी नवनीत सिंह ने बताया कि हरिद्वार में कार्यरत मूल रुप से पंजाब निवासी एक पीड़ित द्वारा बताया कि उसके मोबाइल नंबर पर Fedex कोरियर से एक कॉल आयी कि आपका एक पार्सल है जो मुम्बई से ईरान के लिये भेजा गया था, पार्सल पर आपका नाम, मोबाइल नम्बर व ईमेल आईडी अंकित है और उस पार्सल में कुछ अवैध दस्तावेज हैं।

इसमें मुम्बई में मुकदमा दर्ज हो चुका है। इस तरह से ठगों ने पीड़ित को झांसे में लेकर डिजिटल अरेस्ट कर करीब 43 लाख रुपये की ठगी की। पीड़ित की शिकायत पर पुलिस ने जांच पड़ताल शुरू की। इसके बाद मुख्य अभियुक्त मोनू (काल्पनिक नाम) उम्र-31 वर्ष को जिला भिलाई (दुर्ग), छत्तीसगढ क्षेत्र से गिरफ्तार किया गया। अभियुक्त के खाते से 1.27 करोड़ का संदिग्ध लेनदेन पाया गया है|

डिजिटल हाउस अरेस्ट एक ऐसा तरीका है जिसमें जालसाज, लोगों को उनके घरों में ही फंसाकर उनसे धोखाधड़ी करते हैं। ये जालसाज फोन या वीडियो कॉल के जरिए डर पैदा करते हैं। साइबर अपराधियों द्वारा बेखबर लोगों को अपने जाल में फंसाते हैं।

जिसके लिए मुम्बई क्राईम ब्रान्च ऑफिसर के नाम से कॉल कर मनी लॉण्ड्रिंग, नारकोटिक्स आदि के केस में गिरफ्तार करने का भय दिखाकर व्हाट्सएप वाइस/वीडियो कॉल, स्काइप एप आदि के माध्यम से विवेचना में सहयोग के नाम पर अवैध रुप से डिजिटल हाउस अरेस्ट कर उनका सारा पैसा बताये गये खातों में ट्रांसफर करवाकर धोखाधडी को अंजाम दिया जाता है।

कभी-कभी वे झूठ बोलकर पीड़ित के रिश्तेदारों या दोस्तों को भी किसी अपराध या दुर्घटना में उनकी संलिप्तता के बारे में बताते हैं, जिससे पीड़ित घबरा जाए। इसके बाद ये जालसाज खुद को पुलिस या सरकारी अफसर बताते हुए कहते हैं कि अगर वे पैसे देंगे तो मामला बंद हो जाएगा। इतना ही नहीं, जालसाज तब तक उन्हें वीडियो कॉलिंग करते रहते हैं जब तक उनकी मांग पूरी नहीं हो जाती।

ये जालसाज कई तरह के हथकंडे अपनाते हैं। कभी-कभी तो वे नकली पुलिस स्टेशन या सरकारी दफ्तर का सेटअप बना लेते हैं और असली पुलिस की वर्दी जैसी दिखने वाली वर्दी पहन लेते हैं।

एसटीएफ की ओर से अपील जारी की गई कि इस तरह की घटना की शिकायत 1930 साइबरक्राइम हेल्पलाइन पर या http://www.cybercrime.gov.in पर भी दर्ज करा सकते हैं।

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