पीएम मोदी के रैली से पहले सीएम धामी ने मारा सिक्सर, 15 विधानसभा सीटों पर बदल सकता है पूरा गणित
देवस्थानम बोर्ड भंंग करने से भाजपा को मिल सकता है चुनाव में फायदा
देहरादून, 30 नवंबर। उत्तराखंड में मार्च 2022 से पहले नई सरकार का गठन हो जाएगा। ऐसे में चुनाव को लेकर भाजपा, कांग्रेस समेत सभी राजनीतिक दल अपने-अपने दावों को मजबूत करने में जुटी है। सत्ताधारी भाजपा भी दोबारा सत्ता पाने के लिए पूर्व में लिए गए निर्णयों को सुधारने में लगी है। ऐसा ही एक फैसला था देवस्थानम बोर्ड का, जिसका पहले ही दिन से स्थानीय पंडा समाज विरोध कर रहे थे। इतना ही नहीं तीर्थ पुरोहितों ने अपने आंदोलन से सरकार की मुश्किलें बढ़ाने का काम किया। केन्द्र में एक तरफ जहां कृषि कानून बिल को लेकर किसानों ने संघर्ष किया, उसी तर्ज पर उत्तराखंड के चारों धामों के पंडा समाज ने राज्य सरकार को अपने निर्णय बदलने में मजबूर कर दिया। तीर्थ पुरोहितों की भावना के साथ संत समाज ने भी अपना समर्थन देकर प्रदेश सरकार को आखिरकार बोर्ड को भंग करना ही पड़ा। ऐसे में जहां इस फैसले से पुरोहित और पंडा समाज में खुशी की लहर है, वहीं इसे धामी सरकार का चुनावी साल में बड़ा चुनावी दांव भी माना जा रहा है।

पूर्व सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत को झेलना पड़ा विरोध
देवस्थानम बोर्ड को भाजपा की सरकार में पूर्व सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत ने बनवाया और लागू किया। जिसके बाद पूर्व सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत को इसका विरोध भी झेलना पड़ा। इतना ही नहीं जब त्रिवेंद्र सिंह केदारनाथ दर्शन के लिए मंदिर में प्रवेश करना चाहते थे, तो पुरोहितों ने उनका रास्ता रोककर जमकर प्रदर्शन् किया। जिसके बाद त्रिवेंद्र सिंह को वापस लौटना पड़ा। इसके बाद राज्य सरकार पूरी तरह अलर्ट हो गई और आखिरकार सरकार को बोर्ड भंग करना पड़ा है। चुनाव नजदीक आते ही सरकार के लिए बोर्ड मुसीबत बनता जा रहा था। जिसका विपक्ष के तौर पर कांग्रेस और आम आदमी पार्टी पूरा राजनीतिक लाभ ले रही थी। ऐसे में भाजपा का कैडर वोट भी भाजपा से दूर जाता हुआ दिखने लगा। जिस कारण भाजपा को चुनाव में जाने से पहले बोर्ड को भंग करना पड़ा।

15 विधानसभा सीटों पर सीधा असर
चारधाम गंगोत्री, यमुनोत्री, केदारनाथ, बद्रीनाथ धामों से जुड़े तीर्थ पुरोहित और स्थानीय लोगों के रोजगार जुड़े हैं। ऐसे में गढ़वाल की 15 विधानसभा सीटों पर इस आंदोलन का असर पड़ता हुआ नजर आ रहा था। यही कारण है कि चारधाम तीर्थ पुरोहित हकहकूकधारी महापंचायत ने भी भाजपा के प्रत्याशियों के खिलाफ 15 विधानसभा सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारने का ऐलान किया था। जिसके बाद भाजपा संगठन भी मुश्किल में पड़ता हुआ नजर आ रहा था। अब मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बोर्ड को भंग कर इन सीटों पर डेमेज कंट्रोल करने की कोशिश की है।

पीएम की रैली से पहले डेमेज कंट्रोल
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 4 दिसंबर को देहरादून में एक बड़ी रैली को संबोधित करने जा रहे हैं। जिसको लेकर भाजपा पूरी तरह तैयारियों में जुटी है। इस रैली को सफल बनाने के लिए सरकार भी पूरा जोर लगा रही है। इससे पहले जब पीएम मोदी केदारनाथ आए थे तब भी पुरोहितों को समझाकर राज्य सरकार ने 30 नवंबर तक की डेडलाइन मांगी थी। जिसके बाद सरकार को बोर्ड को भंग करने का दबाव बढ़ता जा रहा था। इधर चार धाम के तीर्थ पुरोहित देहरादून की सड़कों पर आंदोलन कर राज्य सरकार के लिए मुसीबत बनते जा रहे थे। इसके साथ ही पुरोहितों ने मोदी की रैली के दौरान भी घेराव करने का ऐलान कर सरकार को मुश्किल में डालने का काम किया था। लेकिन अब सीएम धामी ने बोर्ड को भंग करने की घोषणा कर पीएम मोदी की रैली से पहले बड़ा डेमेज कंट्रोल कर लिया है। जिससे अब पीएम मोदी की रैली को ऐतिहासिक बनाने में भी भाजपा जुट गई है। जिसका राजनीतिक लाभ लेने की भी हौड़ मच गई है।












Click it and Unblock the Notifications