देहरादून में आपातकाल के 50 वर्ष पूर्ण होने पर लोकतंत्र सेनानियों को किया गया सम्मानित, CM धामी ने कही ये बातें
देहरादून के हिमालयन सांस्कृतिक केंद्र देहरादून में आपातकाल के 50 वर्ष पूर्ण होने पर लोकतंत्र सेनानियों को सम्मानित किया गया। इस दौरान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव उपस्थित थे। इस मौके पर मुख्यमंत्री धामी ने नरेन्द्र कुमार मित्तल, रणजीत सिंह जुयाल सहित 10 लोकतंत्र सेनानियों को सम्मानित किया।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि आज हमें लोकतंत्र की रक्षा करने वाले महानायकों को सम्मानित करने का सौभाग्य प्राप्त हो रहा है। भारतीय लोकतांत्रिक इतिहास में आपातकाल का कालखंड हमेशा एक काले अध्याय के रूप में अंकित रहेगा। यह फैसला हमेशा की तरह देश को अपनी जागीर समझने वाले एक परिवार की हठधर्मिता और तानाशाही रवैए का परिणाम था।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आपातकाल में भारतीय संसद को बंधक बना लिया गया, प्रेस की स्वतंत्रता पर सेंसरशिप थोप दी गई और न्यायपालिका की गरिमा तार-तार कर करोड़ों देशवासियों के मौलिक अधिकारों को रौंद दिया गया। आपातकाल के उन काले दिनों में सत्ता के नशे में चूर तत्कालीन सरकार ने सभी विपक्षी नेताओं, सैंकड़ों पत्रकारों सहित हर उस आवाज का निर्ममता से दमन किया जो लोकतंत्र की रक्षा के लिए उठ रही थी। अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को कुचल कर पूरे देश को एक खुली जेल बना दिया था।
मुख्यमंत्री ने कहा कि नमन है लोकतंत्र के रक्षकों को, जिन्होंने जेल की कालकोठरियों को अपनी तपस्या की तपोभूमि बना लिया और लोकतंत्र के दीप को बुझने नहीं दिया। उस समय लोकनायक जयप्रकाश नारायण, श्रद्धेय नानाजी देशमुख, अटल बिहारी वाजपेयी , लालकृष्ण आडवाणी, जॉर्ज फर्नांडीज और चंद्रशेखर जी जैसे असंख्य लोकतंत्र सेनानियों ने आपातकाल लगाने के तानाशाही सरकार के उस निर्णय के विरुद्ध हुए आंदोलन को दिशा देने का काम किया।
जेल की चारदीवारी में बंद रहते हुए भी इन नेताओं ने युवाओं के भीतर लोकतंत्र के प्रति चेतना जाग्रत करने का कार्य किया। उस समय आदरणीय अटल जी ने कई कविताओं के माध्यम से युवाओं को प्रेरित करने का कार्य किया | तानाशाही सरकार के दमन के खिलाफ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद और जनसंघ सहित अनेकों सामाजिक-सांस्कृतिक संगठनों ने भी अपनी पूरी शक्ति से लोकतंत्र को पुनर्जीवित करने के लिए आंदोलन चलाया।
केंद्रीय मंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता भूपेंद्र यादव ने 25 जून को लोकतंत्र रक्षा के लिए ठीक उसी तरह मनाने का आग्रह किया जिस तरह 15 अगस्त को आजादी और 26 जनवरी को संविधान स्थापना की प्रेरणा के रूप लिया जाता है। उन्होंने विकसित भारत के लिए आर्थिक मजबूती के साथ लोकतांत्रिक मजबूती को भी अहम बताया। कहा, संविधान की किताब हाथ में रखने वाली कांग्रेस ने ही आपातकाल में संविधान को ध्वस्त किया है। ये बात और है कि इसी इमरजेंसी के संघर्ष में तपकर पीएम मोदी जैसा राजनैतिक नेतृत्व देश को मिला।












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