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चंपावत में जमानत भी नहीं बचा पाई कांग्रेस, मजबूत संगठन का दावा करने वाला नेतृत्व नजर आया मजबूर

चंपावत उपचुनाव: कांग्रेस प्रत्याशी की जमानत जब्त, संगठन पर उठे सवाल

देहरादून, 3 जून। चंपावत के उपचुनाव में कांग्रेस को करारी हार का सामना करना पड़ा है। यहां तक की कांग्रेस की प्रत्याशी निर्मला गहतोड़ी की जमानत तक जब्त हो गई है। उपचुनाव में इस हार के लिए कांग्रेस की प्रत्याशी पहले ही संगठन पर गंभीर आरोप लगा चुकी हैं। ऐसे में विधानसभा चुनाव में भाजपा के सामने पहले ही बुरी तरह हारी कांग्रेस के लिए एक बार फिर ये उपचुनाव भी नया सबक सिखा गया है। उपचुनाव से ठीक पहले हाईकमान ने प्रदेश नेतृत्व से लेकर नेता प्रतिपक्ष पर नए चेहरों को लाकर काफी कुछ बदलाव के संकेत दिए थे। लेकिन अपनी पहली ही परीक्षा में फेल हो गए। इस बीच कांग्रेस के दिग्गजों और नए नेतृत्व की रणनीति पर भी फिर से सवाल उठने लगे हैं।

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    ​चुनाव में हार के बाद बदलाव से भी नहीं मिला फायदा
    विधानसभा चुनाव 2022 में भाजपा को 47 सीटें हाथ लगी और कांग्रेस को 19 सीटों से ही संतोष करना पड़ा। सत्ता में वापसी के सपने देख रही कांग्रेस को चुनावी परिणाम से बड़ा धक्का लगा। जिसके बाद चुनाव अभियान की कमान संभाल रहे पूर्व सीएम हरीश रावत से लेकर प्रदेश संगठन के कप्तान गणेश गोदियाल ने हार की जिम्मेदारी ली। ​इसकी सबसे पहले गाज कप्तान गणेश गोदियाल पर गिरी और गोदियाल को इस्तीफा देना पड़ा। गोदियाल के इस्तीफे के बाद पार्टी ने विधायक का चुनाव हारे करन माहरा को कमान सौंप दी। तो पार्टी में विरोध भी नजर आने लगा। इतना ही नहीं नेता प्रतिपक्ष की जिम्मेदारी भाजपा छोड़कर कांग्रेस में आए यशपाल आर्य देने पर जमकर विरोध भी हुआ। प्रीतम सिंह समेत कई विधायकों ने इसका विरोध भी किया। लेकिन हाईकमान ने अपने फैसला बदलने से इनकार कर दिया।

    कांग्रेस प्रत्याशी ने संगठन पर लगाए गंभीर आरोप
    इसके बाद सबसे पहले नए चेहरों के सामने चंपावत का उपचुनाव सामने आए। तो पूरा संगठन पूरी तरह विखरा हुआ नजर आया। हालात ये रहे कि चुनाव से ठीक एक हफ्ते पहले ही बड़े चेहरे चंपावत में एकाध जगह प्रचार करते नजर आए। चंपावत में प्रत्याशी चयन को लेकर भी कई तरह के सवाल खड़े हुए। दो बार के विधायक और इस बार चुनाव लड़ चुके हेमेश खर्कवाल का चुनावी मैदान से हटना और पूर्व जिलाध्यक्ष और दायित्वधारी रह चुकी निर्मला गहतोड़ी को टिकट देने को लेकर भी प्रदेश संगठन पर सवाल उठे। लेकिन जब चंपावत में प्रत्याशी को सपोर्ट करने की बात आई तो संगठन कहीं भी नजर न​हीं आया। यही कारण रहा कि खुद प्रत्याशी निर्मला गहतोड़ी ने जमकर संगठन को लेकर सवाल खड़े कर दिए। जिसके बाद एक बार फिर नए संगठन और नए नेतृत्व पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। जो कि कांग्रेस के लिए अच्छे संकेत न​हीं है। कांग्रेस नया संगठन खड़ा करने के बाद मजबूत होने का दावा कर रही थी, लेकिन इस उपचुनाव ने कांग्रेस को एक बार फिर खुद के लिए चिंतन करने पर मजबूर कर दिया है। ऐसे में अब देखना दिलचस्प होगा कि दिल्ली से लेकर देहरादून तक चिंतन कर चुकी कांग्रेस अब इस हार से कैसे उबरती है। जिस तरह कांग्रेस उपचुनाव में सीएम को टक्कर देना तो दूर अपनी जमानत भी नहीं बचा पाई। उससे कांग्रेस के लिए इस हार को पचा पाना आसान नहीं होगा।

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