दिल्ली में उत्तराखंड को लेकर कांग्रेस का मंथन, हाईप्रोफाइल मीटिंग में टिकटों के साथ ही इस बड़े मसले पर चर्चा
दिल्ली में उत्तराखंड को लेकर कांग्रेस के सीनियर नेताओं की बैठक का दौर शुरू हो गया है। माना जा रहा है कि आज हरिद्वार व नैनीताल सीट पर प्रत्याशी की घोषणा हो जाएगी। इसके साथ ही कांग्रेस से बीते दिनों में इस्तीफे को लेकर भी केंद्रीय नेतृत्व जबाव तलब कर सकता है।

दर्जनों कांग्रेस छोड़ चुके
बता दें कि बीते तीन से चार दिनों में एक विधायक समेत पूर्व विधायक, सांसद प्रत्याशी, दावेदार समेत दर्जनों पदाधिकारी कांग्रेस छोड़ चुके हैं। जिससे चुनाव में कांग्रेस को मुश्किलें खड़ी हो सकती है।
हरिद्वार व नैनीताल को लेकर चर्चा जारी
उत्तराखंड में कांग्रेस हरिद्वार व नैनीताल सीट को लेकर अब भी प्रत्याशी का चयन नहीं कर पाई है। दिल्ली में उत्तराखंड कांग्रेस प्रभारी कुमारी शैलजा के साथ प्रदेश अध्यक्ष करन माहरा, पूर्व सीएम हरीश रावत, नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य, पूर्व अध्यक्ष प्रीतम सिंह मंथन में जुटे हैं। इस बीच हरिद्वार व नैनीताल को लेकर चर्चा जारी है। माना जा रहा है कि हरिद्वार में हरीश रावत अपने बेटे वीरेंद्र रावत के लिए टिकट मांग सकते हैं। जबकि प्रदेश अध्यक्ष करन माहरा भी दावेदारी कर रहे हैं। इसके साथ ही नैनीताल सीट पर नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य का भी दावा माना जा रहा है।
हरीश रावत बैठक में शामिल
पूर्व सीएम हरीश रावत की राय को हाईकमान किसी तरह से दरकिनार नहीं कर सकता है। ऐसे में उनकी राय से भी हाईकमान को अवगत कराया जाएगा। ये पहली बार है जब हरीश रावत दिल्ली में टिकट को लेकर हो रहे मंथन की बैठक में शामिल हुए हैं। सीईसी की बैठक से पहले उत्तराखंड की बची हुई दो सीटों पर आम सहमति बनाने की कवायद की जा रही है।
पार्टी छोड़ने को लेकर भी चर्चा
हरिद्वार और नैनीताल सीट पर उम्मीदवारों का ऐलान होना है। इस बैठक में नाम फाइनल होते ही सीईसी मुहर लगाएगी जिसके बाद देर शाम या रात में नाम सामने आ सकते हैं। टिकट बंटवारे के साथ ही विधायक, पूर्व विधायकों और सीनियर नेताओं के पार्टी छोड़ने को लेकर भी चर्चा हुई है। साथ ही जिस तरह सोशल मीडिया में इस बात के चर्चे हैं कि कांग्रेस के दूसरे विधायक भी भाजपा के संपर्क में हैं। ऐसे में कांग्रेस नई रणनीति तैयार कर ऐसे विधायकों को साधने की कोशिश की जाएगी। कांग्रेस के लिए लोकसभा चुनाव के साथ ही आने वाले समय में अपने विधायकों को बचाने की बड़ी चुनौती है। साथ ही जिस तरह कांग्रेस में भगदड़ मची हुई है। उस पर केंद्रीय नेतृत्व को गंभीरता से विचार करने की आवश्यकता है।












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