सर्द मौसम या चुनावी गर्मी, उत्तराखंड में इस वजह से 2 दिन के विधानसभा सत्र के लिए 3 बार बदली तारीखें

गैरसेंण नहीं देहरादून में होगा अब आखिरी विधानसभा सत्र

देहरादून, 27 नवंबर। उत्तराखंड में धामी सरकार का आखिरी सत्र अब देहरादून में 9 और 10 दिसंबर को आयोजित होगा। पहले सत्र को गैरसेंण में 29, 30 नवंबर उसके बाद 7 और 8 दिसंबर को कराने की तैयारी की जा रही थी, लेकिन सत्ता पक्ष और विपक्ष के नेताओं ने मिलकर सत्र को देहरादून में कराने का प्रस्ताव रखा। इसके बाद अब देहरादून में सत्र आयोजित करने के लिए नई तारीख तय की गई है। सरकार और विपक्ष के इस निर्णय से पहाड की जनता की भावनाओं पर असर पडना तय हैा जो कि वर्तमान सरकार के आखि‍री सत्र से कई उम्‍मीदें लगाए हुए थेा

 The last session of Dhami Sarkar will now be held in Dehradun on 9th and 10th December.

पहले 29, 30 नवंबर को तय हुई थी डेट
उत्तराखंड में मार्च 2022 से पहले विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में शीतकालीन सत्र सरकार का आखिरी सत्र होगा। इसके लिए धामी सरकार लंबे समय से तैयारियों में जुटी है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पहले 29 और 30 नवंबर को गैरसेंण में सत्र आयोजित करने की बात की थी, इस बीच राष्ट्रपति का देहरादून दौरा तय हुआ। जिसके बाद सरकार ने सत्र को आगे खिसकाते हुए 7 और 8 दिसंबर को गैरसेंण में सत्र आयोजित करने की बात की। लेकिन शुक्रवार को एक बार फिर सत्र का समय और जगह दोनों बदलने पर सहमति बन गई। जिसके बाद सत्र को देहरादून में ही 9 और 10 को आयोजित करने पर मुहर लगी है। हालांकि सत्र को देहरादून कराने को लेकर भाजपा, कांग्रेस दोनों ने सहमति दी है। लेकिन इससे भाजपा की चुनावी रणनीति को झटका लग सकता है।
धामी सरकार की छवि पर पड़ सकता है असर
भाजपा गैरसेंण के जरिए पहाड़ चढ़कर चुनावी फिजा बदलने की तैयारी में थी। जिसके लिए धामी सरकार कई महत्वपूर्ण निर्णय भी लेने पर विचार कर रही थी। जिसमे देवस्‍थानम बोर्ड, भू कानून, मंडल की घोषणा, जिला पुर्नगठन आदि कई अहम मुद्दे शामिल थेा इसके साथ ही गैरसेंण के जरिए धामी सरकार पहाड़ की जनता को एक संदेश भी दे पाती कि वे पहाड़ के बारे में बड़ा सोच रहे हैं। लेकिन अचानक सत्र को देहरादून कराना दूसरे दलों को बैठे बिठाए चुनावी मुद्दा बन सकता है। खासकर आम आदमी पार्टी जिस तरह से तीसरे वि​कल्प के तौर पर उत्तराखंड में सामने आ रही है। वह इस मुद्दे को चुनावी मुद्दा बना सकती है। गैरसेंण में सत्र न कराने के पीछे सरकार और विपक्ष की मंशा जो भी हो। लेकिन ये तय है कि इन दिनों मौसम अनूकूल न होना और गैरसेंण में अत्यधिक ठंड होना भी इसका प्रमुख कारण माना जा रहा है। लेकिन ऐसे में विपक्ष को यह मुद्दा भी मिल गया कि जब सरकार दो दिन गैरसेंण नहीं रह सकती तो राजधानी के बारे में कैसे सोच सकते हैं। इसके साथ ही भाजपा और कांग्रेस दिसंबर में चुनावी दौरे पर हैं। भाजपा के सबसे बड़े स्टार प्रचारक पीएम नरेंद्र मोदी 4 दिसंबर को देहरादून में रैली कर रहे हैं। जबकि कांग्रेस दिसंबर में टिकट बंटवारे को फाइनल मुहर लगा सकती है। इस तरह दोनों दल चुनावी मोड में राजधानी छोड़ने को तैयार नहीं है। इसका खामियाजा भी दोनों दलों को चुनाव में भुगतना पड सकता हैा

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