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चंपावत उपचुनाव:सीएम पुष्कर सिंह धामी के इस रिकॉर्ड पर रहेगी सबकी नजर, सीएम की कुर्सी को लेकर है खास नाता

अब तक उपचुनाव में सबसे ज्यादा मतों से जीतने का रिकॉर्ड

देहरादून, 10 मई। भाजपा हाईकमान के लिए धाकड़ धामी साबित हुए पुष्कर सिंह धामी चंपावत उपचुनाव में क्या धाकड़ बनकर जीत पाएंगे। इस पर सबकी निगाहें टिकी हुई है। ऐसे में इस बार सबकी नजर अब तक बतौर सीएम लड़े प्रत्याशियों के रिकॉर्ड को लेकर भी है। उत्तराखंड में अब तक 4 बार मुख्यमंत्रियों के लिए उपचुनाव हो चुका है। जिनमें कांग्रेस की ओर से दिवंगत पूर्व सीएम एनडी तिवारी, पूर्व सीएम विजय बहुगुणा अब भाजपा में, हरीश रावत और भाजपा की ओर से पूर्व सीएम बीसी खंडूरी उपचुनाव लड़ चुके हैं। लेकिन ​उपचुनाव में सबसे ज्यादा मतों से जीतने का रिकॉर्ड विजय बहुगुणा के नाम पर है।

Champawat by-elections - Everyones eyes will be on this record of CM Pushkar Singh Dhami, there is a special relationship with CMs chair

40 हजार से ज्यादा वोटों से जीते थे बहुगुणा
सबसे अधिक वोटों के अंतर से उपचुनाव जीतने का रिकॉर्ड मुख्यमंत्री के तौर पर विजय बहुगुणा का है। सबसे पहले 2002 में तत्कालीन मुख्यमंत्री एनडी तिवारी ने रामनगर से उपचुनाव लड़ा और भाजपा के राम सिंह को 9693 वोटों के अंतर से हराया था। 2007 में भाजपा के जनरल बीसी खंडूड़ी ने धुमाकोट से उपचुनाव लड़ा। खंडूड़ी के कांग्रेस के सुरेंद्र सिंह नेगी को 14171 मतों के अंतर से हराया। 2012 में कांग्रेस के सीएम विजय बहुगुणा ने सितारगंज से उपचुनाव लड़े। भाजपा ने उनके खिलाफ प्रकाश पंत को मैदान में उतारा। बहुगुणा ने यह चुनाव 40154 वोटों के अंतर से जीता। जो कि रिकॉर्ड बन गया। अब इस सीट पर विजय बहुगुणा के पुत्र सौरभ बहुगुणा विधायक और सरकार में कैबिनेट मंत्री हैं। 2014 में विजय बहुगुणा के इस्तीफे के बाद हरीश रावत मुख्यमंत्री बने। जिनके लिए धारचूला से कांग्रेस विधायक हरीश धामी ने सीट छोड़ी। मुख्यमंत्री हरीश रावत ने धारचूला से उपचुनाव लड़ा। रावत ने भाजपा के भानु दत्त को 20600 वोटों के अंतर से चुनाव हराया। इस तरह से सीएम रहते विजय बहुगुणा ने सबसे ज्यादा 40 हजार से भी ज्यादा वोटों से चुनाव जीता। अब भाजपा पुष्कर सिंह धामी की जीत को भी ऐतिहासिक बनाना चाहती है।

चंपावत विधानसभा सीट पर विस्तृत जानकारी के लिए यहां क्लिक करें

4 बार हो चुके हैं अब तक उपचुनाव
मुख्यमंत्री के लिए 4 बार हो चुका है उपचुनाव उत्तराखंड में अब तक 4 बार मुख्यमंत्री उपचुनाव लड़ चुके हैं। जिनमें एनडी तिवारी और हरीश रावत के लिए अपनी ही पार्टी के विधायकों ने सीट छोड़ी जबकि बीसी खंडूरी के लिए कांग्रेस और विजय बहुगुणा के लिए तब भाजपा के विधायक ने सीट छोड़ी थी। उत्तराखंड के इतिहास में मुख्यमंत्री के लिए तक 4 बार उपचुनाव हो चुके हैं। 2002 में​ पहली कांग्रेस की सरकार में एनडी तिवारी को सीएम चुना गया। एनडी तिवारी ने रामनगर सीट से चुनाव लड़ा। इसके बाद 2007 में भाजपा सरकार में तत्कालीन सीएम बीसी खंडूरी के लिए कांग्रेस के विधायक टीपीएस रावत ने सीट छोड़ी थी। पहले खंडूरी के लिए निर्दलीय विधायक यशपाल बेनाम को सीट छोड़ने को कहा गया लेकिन जब वे नहीं माने तो भाजपा ने कांग्रेस में सेंधमारी कर धुमाकोट सीट से टीपीएस रावत को इस्तीफा दिलाकर चुनाव जीताया। उस समय पूर्व सीएम​ रमेश पोखरियाल निशंक की भी इस प्रकरण में अहम भूमिका मानी जाती है। 2012 में कांग्रेस के पूर्व सीएम विजय बहुगुणा के लिए सितारगंज से भाजपा के विधायक किरण मंडल को इस्तीफा दिलवाकर कांग्रेस में शामिल किया और बहुगुणा इसी सीट से विधायक चुनकर विधानसभा पहुंचे। इसके बाद 2014 में हरीश रावत के लिए कांग्रेस के​ही विधायक हरीश धामी ने धारचूला सीट छोड़ी थी। जिसके बाद वे विधायक बनकर विधानसभा पहुंचे। अब पुष्कर सिंह धामी के सामने कांग्रेस की निर्मला गहतोड़ी चुनाव मैदान में हैं। जो कि कमजोर प्रत्याशी मानी जा रही है। ऐसे में भाजपा को इस बार रिकॉर्ड टूटने का भरोसा है। चंपावत विधानसभा में 95648 वोटर पंजीकृत हैं। तराई और पहाड़ से मिली इस विधानसभा सीट में आधे से अधिक मतदाता (48657) टनकपुर-चंपावत क्षेत्र से हैं, जबकि पहाड़ी हिस्से में करीब 47 हजार मतदाता पंजीकृत हैं।

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